दिल्ली पुलिस का सफाई बयान: समयपुर बादली थाने पर सोशल मीडिया आरोप निराधार, कार्रवाई कानूनसम्मत
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 15 जुलाई 2026 को थाना समयपुर बादली के पुलिसकर्मियों पर सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों को लेकर अपना आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक किया है। पुलिस के अनुसार, उपलब्ध तथ्यों और आंतरिक जांच के आधार पर ये आरोप सही नहीं पाए गए हैं और संपूर्ण कार्रवाई कानून के दायरे में की गई थी।
मूल घटनाक्रम
पुलिस के मुताबिक, यह मामला 10 जून 2026 को हुई एक मारपीट की घटना से जुड़ा है, जिसके संबंध में थाना समयपुर बादली में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने सचिन, जीतू, भरत और चिंता देवी को आरोपी के रूप में चिह्नित किया।
अदालत और गिरफ्तारी की स्थिति
सभी आरोपियों ने न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिकाएं दाखिल कीं, परंतु अदालत ने इन्हें खारिज कर दिया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जीतू को गिरफ्तार कर लिया। शेष आरोपी — सचिन, भरत और चिंता देवी — अभी भी फरार हैं और उनकी सक्रिय तलाश जारी है।
सोशल मीडिया आरोपों की पृष्ठभूमि
पुलिस ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों के विरुद्ध आरोप लगाने वाली महिला, आरोपी सचिन और भरत की बहन हैं। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि फरार आरोपी अपने घर में छिपे हो सकते हैं। इसी आधार पर एक पुलिस दल उनके घर पहुंचा, किंतु वहां कोई आरोपी नहीं मिला। तत्पश्चात पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35 की उपधारा (3) के अंतर्गत कानूनी नोटिस घर पर चस्पा किया।
पुलिस की सफाई — क्या-क्या नकारा
दिल्ली पुलिस ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी भी पुलिसकर्मी द्वारा घर में जबरन प्रवेश करने की पुष्टि नहीं हुई है। गाली-गलौज, धमकी देने और अभद्र व्यवहार के आरोप भी जांच में निराधार पाए गए हैं। पुलिस के अनुसार, इन दावों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया।
आगे की स्थिति
फरार आरोपियों की तलाश जारी है और पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ हो रहा है — और जवाबदेही की माँग के साथ-साथ निराधार आरोपों के प्रसार पर भी बहस छिड़ी हुई है।