दिल्ली पुलिस ने पकड़ा साइबर ठग अमन सेठी, पुरानी कार के नाम पर ₹2 लाख की धोखाधड़ी
सारांश
Key Takeaways
दिल्ली पुलिस ने 2 मई 2026 को साइबर धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी अमन सेठी को गिरफ्तार किया, जिसने त्रिलोकपुरी निवासी हरीश से पुरानी कार बेचने का झाँसा देकर ₹2 लाख की ठगी की थी। आरोपी के पास से डेबिट कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। यह मामला 16 अप्रैल को दर्ज एफआईआर के बाद दिल्ली पुलिस की विशेष जांच टीम की कार्रवाई का नतीजा है।
मामले का पूरा घटनाक्रम
दिल्ली पुलिस के अनुसार, 16 अप्रैल को त्रिलोकपुरी निवासी हरीश ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि एक अज्ञात व्यक्ति ने उनसे एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए संपर्क किया और पुरानी कार बेचने का प्रस्ताव रखा। आरोपी ने धीरे-धीरे शिकायतकर्ता का भरोसा जीता और उन्हें बुकिंग एवं प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर ₹2 लाख ट्रांसफर करने के लिए राजी कर लिया।
रकम मिलते ही आरोपी ने न तो कार सौंपी और न ही पैसे वापस किए। इसके बाद उसने संपर्क करना भी बंद कर दिया, जिससे धोखाधड़ी की पुष्टि हुई। पुलिस ने मामला दर्ज होने के तुरंत बाद जांच शुरू कर दी।
विशेष टीम की जांच और तकनीकी निगरानी
अपराध की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम गठित की गई। टीम ने विस्तृत वित्तीय और तकनीकी जांच की। बैंक लेन-देन के विश्लेषण से पता चला कि ठगी की रकम एक विशेष बैंक खाते में स्थानांतरित की गई थी।
केवाईसी दस्तावेज़ों, खाते की गतिविधियों और डिजिटल फुटप्रिंट्स की गहन जांच से संदिग्ध की पहचान अमन सेठी के रूप में हुई। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर में कई स्थानों पर छापे मारे गए।
फरार आरोपी की गिरफ्तारी
आरोपी अमन सेठी गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गया था और अपना ज्ञात पता भी खाली कर दिया था। पुलिस ने गुप्त सूचना और तकनीकी निगरानी के ज़रिए उसकी गतिविधियों को लगातार ट्रैक किया और अंततः उसे पकड़ने में सफलता हासिल की।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने जांचकर्ताओं को गुमराह करने और अहम जानकारी छिपाने की कोशिश की, लेकिन जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड और आगे की जांच
जांच में यह भी सामने आया कि अमन सेठी पहले भी कृष्णा नगर पुलिस थाने में दर्ज एक धोखाधड़ी के मामले में शामिल रहा है, जो उसकी आदतन अपराधी प्रवृत्ति को दर्शाता है। पुलिस के अनुसार, पैसों के पूरे लेन-देन का पता लगाने, उसके संभावित साथियों की पहचान करने और धोखाधड़ी से प्राप्त रकम की वसूली के प्रयास अभी जारी हैं। यह मामला ऑनलाइन वाहन खरीद-बिक्री में बढ़ते साइबर अपराधों की बढ़ती प्रवृत्ति की ओर भी ध्यान दिलाता है।