देविका नदी कायाकल्प: डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया ₹13 करोड़ का ऐलान, उधमपुर के लोगों ने जताया आभार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय परमाणु ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ऐतिहासिक देविका नदी परियोजना के लिए कुल ₹13 करोड़ की राशि का ऐलान किया है — जिसमें ₹9 करोड़ सीवेज रखरखाव के लिए और ₹4 करोड़ नदी के कायाकल्प के लिए निर्धारित किए गए हैं। उधमपुर के निवासियों ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए इसे शहर के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
स्थानीय निवासियों की प्रतिक्रिया
उधमपुर निवासी निशा जब्बाल ने कहा, 'देविका नदी की सफाई और गंदगी का लंबे समय से जो मसला चल रहा था, उसे लेकर डॉ. जितेंद्र सिंह की ओर से यह योजना लाई गई है। हम चाहते हैं कि इस पैसे को अच्छे से इस्तेमाल किया जाए, जिससे देविका माता और वहाँ रहने वाले लोगों के लिए अच्छा वातावरण मिल सके।'
एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा, 'हम डॉ. जितेंद्र सिंह के बेहद शुक्रगुजार हैं। संसदीय क्षेत्र में उनका योगदान बहुत अधिक रहता है। ₹9 करोड़ सीवेज के रखरखाव के लिए और ₹4 करोड़ देविका नदी के लिए दिए गए हैं। पानी बहने की शिकायतों से राहत मिलेगी। लोगों से भी अपील है कि जब इस पैसे का उपयोग हो तो इसका अच्छे से ध्यान रखें, क्योंकि यह हमारे टैक्स का पैसा है।'
सीवेज समाधान से उधमपुर की छवि होगी बेहतर
इंद्र बत्रा ने कहा, 'देविका नदी के किनारे से हज़ारों लोगों का आना-जाना होता है। यदि सीवेज परियोजना अच्छे से पूरी होती है, तो इससे उधमपुर की छवि सकारात्मक होगी।' उन्होंने आगे जोड़ा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु उधमपुर आते हैं और इस सुधार का असर पूरे शहर पर पड़ेगा।
गौरतलब है कि देविका नदी, जिसे 'उत्तर भारत की गंगा' भी कहा जाता है, डोगरा समुदाय के लिए अत्यंत धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है। वर्षों से इस नदी में सीवेज और प्रदूषण की समस्या गंभीर बनी हुई है।
परियोजना का महत्व
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब देश भर में नदियों की स्वच्छता को लेकर सरकारी प्रयास तेज़ हो रहे हैं। उधमपुर एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में जाना जाता है और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ रही है। नदी की स्वच्छता सीधे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इस राशि का सही उपयोग हो तो देविका नदी के आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को जल-जनित बीमारियों से भी राहत मिल सकती है।
आगे की राह
निवासियों ने माँग की है कि आवंटित राशि का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो और परियोजना के क्रियान्वयन में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। डॉ. जितेंद्र सिंह की इस पहल के बाद अब सभी की निगाहें परियोजना के समयबद्ध कार्यान्वयन पर टिकी हैं।