क्या दक्षिण भारत में धर्म की ध्वजा फहराएगी: आचार्य प्रमोद कृष्णम?
सारांश
Key Takeaways
- दक्षिण भारत में धर्म की ध्वजा फहराने का दावा।
- आचार्य प्रमोद ने वामपंथियों पर आरोप लगाया।
- भाजपा की चुनावी रणनीति क्षेत्रीय पार्टियों के सहयोग पर आधारित है।
- आरएसएस की भूमिका पर चर्चा महत्वपूर्ण है।
- दक्षिण भारत की राजनीति में बदलाव की संभावना।
गाजियाबाद, २४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आगामी चुनावों के संदर्भ में दक्षिण भारत के राज्यों में बदलाव का दावा किया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत की राजनीति एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। इस बार यहां भी धर्म की ध्वजा फहराने का समय आया है।
समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बताया कि उत्तर भारत में धर्म की ध्वजा फहराई जा चुकी है। अब यह दक्षिण भारत की बारी है।
इस दौरान, आचार्य प्रमोद ने वामपंथियों पर आरोप लगाया कि वे देश को बांटने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की।
आचार्य प्रमोद ने कहा, "केरल के मुख्यमंत्री का बयान देश के खिलाफ है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक समर्पित संगठन है। संघ किसी पर हमला नहीं करता है और हमेशा हमलों को झेलता रहा है। संघ को बदनाम करने की साजिशें की गईं हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि संघ भारत के प्रति पूरी तरह से समर्पित है और केरल के मुख्यमंत्री को संवैधानिक पद पर रहते हुए इस तरह की गलत टिप्पणियाँ नहीं करनी चाहिए।
यह ध्यान देने योग्य है कि दक्षिण भारत के तमिलनाडु और केरल में अगले कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों राज्यों में सत्ता पाने के लिए प्रयासरत है। तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव में मिली जीत के बाद भाजपा का हौसला और बढ़ा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इन दोनों राज्यों में भाजपा नीत एनडीए के चुनावी अभियान की शुरुआत की। भाजपा तमिलनाडु में मुख्य रूप से ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। एनडीए के अन्य घटक दलों में क्षेत्रीय पार्टियाँ, पट्टाली मक्कल काची (पीएमके), तमिल मनीला कांग्रेस, और अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) शामिल हैं।
केरल में भाजपा का प्रमुख गठबंधन सहयोगी बीडीजेपीएस है। क्षेत्रीय पार्टी ट्वेंटी-२० भी एनडीए का हिस्सा बन चुकी है। वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी), शिवसेना और कॉनराड संगमा के नेतृत्व वाली नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) जैसे दल भी एनडीए का हिस्सा हैं।