धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण: राष्ट्रपति भवन में हेमा मालिनी और अहाना देओल की आँखें हुईं नम
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में 25 मई 2026 को आयोजित पद्म सम्मान समारोह में दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण से नवाज़ा गया — भारत का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों यह पुरस्कार उनकी पत्नी, अभिनेत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद हेमा मालिनी ने ग्रहण किया। इस भावपूर्ण क्षण में हेमा मालिनी के साथ उनकी बेटी अहाना देओल भी उपस्थित थीं और दोनों को भावुक होते देखा गया।
मंच पर भावुक पल
जब हेमा मालिनी मंच की ओर बढ़ीं, तो पूरे सभागार में एक गहरी भावनात्मक लहर दौड़ गई। पति के लिए सम्मान ग्रहण करते समय उनके चेहरे पर गर्व और वियोग का मिला-जुला भाव स्पष्ट था। वह स्वयं को संयत रखने की कोशिश करती नज़र आईं, लेकिन आँखें उनकी भावनाओं को छुपा न सकीं।
गौरतलब है कि धर्मेंद्र का निधन 24 नवंबर 2025 को हुआ था। 89 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम साँस ली थी; सांस लेने में कठिनाई के चलते उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। उनके जाने के बाद यह पहला बड़ा राजकीय सम्मान है जो उनके नाम पर प्रदान किया गया।
प्रोसेनजीत चटर्जी को पद्म श्री
इसी समारोह में बंगाली सिनेमा के दिग्गज अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी को भारतीय सिनेमा में 40 से अधिक वर्षों के योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया। 400 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर चुके प्रोसेनजीत ने कहा, 'मैं आज बहुत खुश हूँ। एक एक्टर के तौर पर मेरा फिल्मी करियर 40 साल से ज़्यादा का रहा है, और इस सफर में मैंने 400 से ज़्यादा फिल्मों में काम किया है। मैं इस खुशी को शब्दों में बयाँ नहीं कर सकता।'
पीयूष पांडेय को मरणोपरांत पद्म भूषण
समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कला एवं विज्ञापन जगत के अग्रणी हस्ताक्षर पीयूष पांडेय को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया। पीयूष पांडेय ने भारतीय विज्ञापन को वैश्विक पहचान दिलाई और 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' सहित 100 से अधिक यादगार विज्ञापनों का निर्माण किया।
पद्म सम्मानों का महत्त्व
पद्म पुरस्कार भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित किए जाते हैं और राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में प्रदान किए जाते हैं। पद्म विभूषण देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जबकि पद्म भूषण तीसरा और पद्म श्री चौथा। इस वर्ष का समारोह विशेष रूप से भावनात्मक रहा, क्योंकि कई दिग्गज कलाकारों को मरणोपरांत सम्मान दिए गए।
आगे की राह
धर्मेंद्र की विरासत अब इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान के साथ और अधिक अमर हो गई है। उनके परिवार ने इस पुरस्कार को उनके जीवनभर के संघर्ष और समर्पण की स्वीकृति बताया है। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को यह राजकीय मान्यता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।