क्या हमें अपनी संस्कृति को बढ़ावा नहीं देना चाहिए? : दीया कुमारी
सारांश
Key Takeaways
- संस्कृति का विकास महत्वपूर्ण है।
- पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
- कार्यक्रमों का आयोजन सांस्कृतिक पहचान को बढ़ाने में सहायक है।
- नई पीढ़ी को संस्कृति का महत्व समझाना चाहिए।
- सकारात्मक सोच और सामाजिक समरसता का संदेश देना आवश्यक है।
जयपुर, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के जयपुर में बुधवार को मकर संक्रांति के अवसर पर टूरिज्म डिपार्टमेंट द्वारा आयोजित पतंग महोत्सव में राजस्थान की डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह वास्तव में एक खूबसूरत कार्यक्रम था। पूरे जयपुर में आतिशबाजी हो रही थी। यहां आए पर्यटकों ने भी इसका भरपूर आनंद लिया। लोग अपने घरों से पटाखे चला रहे थे।
उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए एक बहुत अच्छा दिन है, मकर संक्रांति के दिन लोगों ने सुबह पतंगें उड़ाईं और अब वे आतिशबाजी का आनंद ले रहे हैं। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। यह हमारी संस्कृति है, हमारा त्योहार है और इसे बढ़ावा देना चाहिए। नई पीढ़ी को इसे समझना और आगे बढ़ाना चाहिए।
डिप्टी सीएम ने बताया कि हमारी सरकार ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। हमने घूमर फेस्टिवल का आयोजन किया है और इसे हर जिले में फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। यह बहुत महत्वपूर्ण है। हम यहां टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन पर्यटकों को अच्छा अनुभव देने की आवश्यकता है। अगर हम उन्हें सुरक्षित रखें, उनका अनुभव बेहतर बनाएं और कनेक्टिविटी प्रदान करें, तो यह भी एक बड़ी उपलब्धि होगी।
एक्स पोस्ट में डिप्टी सीएम ने लिखा कि मकर संक्रांति के पावन अवसर पर जयपुर के विश्व-प्रसिद्ध हवामहल पर राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित भव्य लालटेन प्रज्ज्वलन एवं आतिशबाजी कार्यक्रम में भाग लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। रंग-बिरंगी लालटेनें और आतिशबाजी ने हवामहल की ऐतिहासिक भव्यता को और भी आकर्षक बना दिया। यह आयोजन राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन और परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाने का एक सुंदर प्रयास है।
उन्होंने आगे लिखा कि भाजपा परिवार के वरिष्ठ सदस्यों एवं समर्पित कार्यकर्ता बंधुओं के साथ हर्षोल्लास एवं पारस्परिक सौहार्द के साथ मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया। यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने के साथ जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। वरिष्ठजनों का सान्निध्य और कार्यकर्ताओं का उत्साह संगठन की मजबूती और एकता का प्रतीक है।