17 जुलाई 2026
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डोडा गोलीकांड: आरिफ हुसैन की मौत पर परिवार ने उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की माँग

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डोडा गोलीकांड: आरिफ हुसैन की मौत पर परिवार ने उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की माँग

सारांश

डोडा के भद्रवाह में गुरुवार रात हुई गोलीबारी में 30 वर्षीय ऑटो चालक आरिफ हुसैन की मौत ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिवार का कहना है कि सुबह चार बजे पुलिस उन्हें घर से उठाकर ले गई थी। पुलिस के बयान और परिजनों की गवाही के बीच की खाई निष्पक्ष जांच की माँग को और पुख्ता करती है।

मुख्य बातें

डोडा जिले के भद्रवाह में गुरुवार देर रात हुई गोलीबारी में 30 वर्षीय आरिफ हुसैन की मौत हो गई।
स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) के तीन जवान इस घटना में घायल हुए।
पुलिस के अनुसार, आरिफ ने कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों से सर्विस राइफल छीनने की कोशिश की, जिसके बाद गोली चली।
मृतक की पत्नी के अनुसार, सुबह चार बजे पुलिस आरिफ को घर से भद्रवाह थाने ले गई थी।
परिजन और मित्र पुलिस के आधिकारिक बयान से असहमत हैं और स्वतंत्र जांच की माँग कर रहे हैं।
शव का पोस्टमार्टम जीएमसी डोडा में हुआ और बाद में परिजनों को सौंपा गया।

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भद्रवाह के जाई-गांडोह रोड इलाके में गुरुवार देर रात हुई गोलीबारी में 30 वर्षीय आरिफ हुसैन की मौत के बाद विवाद गहरा गया है। स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) के तीन जवान भी इस घटना में घायल हुए। मृतक के परिजनों और मित्रों ने पुलिस के आधिकारिक बयान पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की माँग की है।

पुलिस का पक्ष और परिवार की आपत्ति

पुलिस के अनुसार, घटना उस समय हुई जब आरिफ हुसैन ने कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों से सर्विस राइफल छीनने की कोशिश की, जिसके बाद गोलीबारी हुई। आरिफ के शव का पोस्टमार्टम गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी), डोडा में कराया गया और बाद में शव परिजनों को सौंप दिया गया। हालाँकि, परिवार और स्थानीय लोग इस आधिकारिक विवरण से संतुष्ट नहीं हैं और सच्चाई सामने लाने की माँग पर अड़े हैं।

परिजनों की गवाही: रात को उठाए जाने का दावा

मृतक के रिश्तेदार सलीम जफर ने बताया कि आरिफ हुसैन भद्रवाह के भाला क्षेत्र के निवासी थे और पहले मजदूरी करते थे। कुछ समय पहले उन्होंने ऑटो रिक्शा खरीदकर उसी से परिवार का भरण-पोषण शुरू किया था। सलीम जफर के अनुसार, आरिफ की पत्नी ने बताया कि सुबह चार बजे पुलिस उन्हें घर से उठाकर भद्रवाह थाने ले गई थी और उस समय केवल यह कहा गया कि आरिफ अस्पताल में हैं। बाद में परिवार को उनकी मौत की सूचना मिली। सलीम जफर ने कहा कि परिवार केवल यह जानना चाहता है कि आरिफ पर गोली चलाने की नौबत क्यों आई।

दोस्त का बयान: 'साधारण इंसान थे आरिफ'

मृतक के बचपन के मित्र इमरान ने बताया कि दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे और कुछ दिन पहले ही उनकी आरिफ से मुलाकात हुई थी। इमरान के अनुसार, आरिफ एक साधारण व्यक्ति थे जो ऑटो चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस की कार्रवाई कानूनी थी, तो पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए — गोली चलाने का आदेश किसने दिया और किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया गया।

जांच की माँग और जनता का भरोसा

परिजनों का कहना है कि जब तक पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच नहीं होती, तब तक कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाएंगे। इमरान ने स्पष्ट कहा कि निष्पक्ष जांच ही एकमात्र रास्ता है जिससे स्थानीय लोगों का भरोसा बना रह सकता है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों की जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस चल रही है।

आगे क्या होगा

फिलहाल अधिकारियों की ओर से स्वतंत्र जांच के संदर्भ में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। परिवार और स्थानीय लोगों की माँग है कि मामले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियाँ स्पष्ट हो सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसी घटनाएँ स्थानीय अविश्वास को और गहरा करती हैं — जो किसी भी शांति प्रक्रिया के लिए दीर्घकालिक नुकसानदेह है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डोडा गोलीकांड में आरिफ हुसैन की मौत कैसे हुई?
पुलिस के अनुसार, भद्रवाह के जाई-गांडोह रोड इलाके में आरिफ हुसैन ने कथित तौर पर एसओजी जवानों से सर्विस राइफल छीनने की कोशिश की, जिसके बाद गोलीबारी हुई और उनकी मौत हो गई। हालाँकि, परिजन इस बयान पर सवाल उठा रहे हैं।
परिवार ने किस आधार पर जांच की माँग की है?
मृतक की पत्नी के अनुसार, सुबह चार बजे पुलिस आरिफ को घर से भद्रवाह थाने ले गई थी और तब केवल यह बताया गया कि वे अस्पताल में हैं। परिवार का कहना है कि गोली चलाने की परिस्थितियाँ स्पष्ट नहीं हैं और वे जानना चाहते हैं कि किसके आदेश पर यह कार्रवाई हुई।
इस घटना में एसओजी के कितने जवान घायल हुए?
स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) के तीन जवान इस गोलीबारी की घटना में घायल हुए। उनकी स्थिति के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
क्या इस मामले में कोई जांच शुरू हुई है?
अभी तक अधिकारियों की ओर से किसी स्वतंत्र या न्यायिक जांच की घोषणा नहीं की गई है। परिवार, मित्र और स्थानीय लोग माँग कर रहे हैं कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो ताकि वास्तविक परिस्थितियाँ सामने आ सकें।
राष्ट्र प्रेस
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