3 अक्टूबर 2026
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ड्रोन IAF के लिए क्रांति नहीं, विकास का हिस्सा: एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का बड़ा बयान

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ड्रोन IAF के लिए क्रांति नहीं, विकास का हिस्सा: एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का बड़ा बयान

सारांश

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का साफ संदेश — ड्रोन IAF के लिए नई क्रांति नहीं, दशकों पुरानी क्षमता का विस्तार है। अलग ड्रोन फोर्स नहीं बनेगी; एकीकृत संचालन पर ज़ोर। तरंग शक्ति में F-35 की पहली भारतीय भागीदारी और 40 देशों की मौजूदगी भारत की बढ़ती वैश्विक सैन्य साख की तस्वीर पेश करती है।

मुख्य बातें

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 3 अक्टूबर को कहा कि ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए क्रांतिकारी नहीं, बल्कि विकासवादी बदलाव हैं।
IAF में अलग ड्रोन फोर्स बनाने की कोई योजना नहीं; ड्रोन को मौजूदा सैन्य ढाँचे में एकीकृत किया जाएगा।
वायुसेना में विशेष ड्रोन यूनिट पहले से मौजूद हैं और आवश्यकता पड़ने पर उनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है।
बहुराष्ट्रीय अभ्यास 'तरंग शक्ति' 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयरबेस पर; 40 देश , 2,000+ सैन्यकर्मी , 80+ विमान ।
F-35 लड़ाकू विमान पहली बार भारत में किसी बहुराष्ट्रीय अभ्यास में शामिल हुए।

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 3 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि ड्रोन तकनीक भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए कोई क्रांतिकारी परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह दशकों से चली आ रही क्षमता-विकास की स्वाभाविक कड़ी है। वायुसेना दिवस से पूर्व नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में उन्होंने लोइटरिंग एम्युनिशन के लिए पृथक ड्रोन फोर्स गठित करने की किसी भी योजना से साफ इनकार किया।

मुख्य बयान: क्रांति नहीं, विकास

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा, 'जहाँ तक अलग ड्रोन फोर्स की बात है, भारतीय वायुसेना में ये चीज़ें दशकों से मौजूद हैं। इसलिए मैं कह सकता हूँ कि ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए क्रांतिकारी नहीं हैं। हाँ, ये विकासवादी बदलाव ज़रूर हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि वायुसेना में ड्रोन की संख्या, म्यूनिशन और हथियारों के प्रकार निरंतर बढ़ रहे हैं।

लोइटरिंग एम्युनिशन की उपयोगिता पर उन्होंने कहा कि यह दुश्मन के बीच भ्रम पैदा करने और विशिष्ट लक्ष्यों को सटीकता से निशाना बनाने में सहायक होता है। गौरतलब है कि हाल के वैश्विक संघर्षों — विशेषकर यूक्रेन युद्ध — में लोइटरिंग एम्युनिशन की निर्णायक भूमिका ने दुनिया भर की वायुसेनाओं को पृथक ड्रोन संरचनाओं पर पुनर्विचार करने पर विवश किया है।

एकीकृत संचालन पर ज़ोर

वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि ड्रोन को मौजूदा सैन्य ढाँचे में मिलाकर अन्य हथियार प्रणालियों के साथ संयुक्त रूप से संचालित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमने अलग फोर्स बनाने के बारे में नहीं सोचा है, बिल्कुल नहीं।' उनके अनुसार, अलग-अलग हथियारों को एकाकी रूप से संचालित करने के बजाय उनका समन्वित उपयोग अधिक प्रभावी परिणाम देता है।

हालाँकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वायुसेना में कुछ विशेष ड्रोन यूनिट पहले से कार्यरत हैं और आवश्यकता अनुसार उनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय सेना और नौसेना दोनों ने ड्रोन के लिए अलग संरचनाओं पर विचार-विमर्श तेज़ किया है।

तरंग शक्ति अभ्यास: F-35 की पहली भारतीय भागीदारी

बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास 'तरंग शक्ति' के बारे में एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि इसका उद्देश्य आपसी सहयोग, इंटरऑपरेबिलिटी और एक-दूसरे की कार्यप्रणाली से सीखना है। 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयरबेस पर आयोजित इस अभ्यास में 40 देशों के 2,000 से अधिक सैन्यकर्मी और 80 से अधिक विमान हिस्सा ले रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि F-35 लड़ाकू विमान पहली बार भारत में किसी बहुराष्ट्रीय अभ्यास में भाग ले रहे हैं। इसके अलावा कुछ नए देश पहली बार पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुए हैं, जो भारत की बढ़ती वैश्विक सैन्य साझेदारी का संकेत है।

संचार और इंटरऑपरेबिलिटी की अहमियत

एयर चीफ मार्शल सिंह ने बहुराष्ट्रीय अभ्यासों में साझा संचार व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल अंग्रेज़ी में संवाद की बात नहीं, बल्कि एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और संदेश को समझने की क्षमता विकसित करने से जुड़ा विषय है।

आगे क्या

एयर चीफ मार्शल ने उम्मीद जताई कि तरंग शक्ति के दूसरे चरण से भारतीय वायुसेना को कई महत्वपूर्ण सबक मिलेंगे, जिनके आधार पर वह अपनी क्षमताओं में और सुधार कर सकेगी। अभ्यास में शामिल अन्य देश भी साझा अनुभव लेकर लौटेंगे, जो भविष्य की सैन्य साझेदारियों की नींव तैयार करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्रांतिकारी नहीं' वाला तर्क रणनीतिक रूप से सुविचारित है — यह उन आवाज़ों को शांत करता है जो यूक्रेन संघर्ष को देखकर भारत में भी पृथक ड्रोन कमान की माँग कर रही थीं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या 'एकीकरण' की यह नीति वास्तव में संचालन-क्षमता बढ़ाती है, या यह बदलाव की गति को धीमा करने का संस्थागत तरीका है। तरंग शक्ति में F-35 की उपस्थिति भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की गहराई का संकेत है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। ड्रोन नीति पर IAF का रुख तब तक अधूरा रहेगा जब तक स्पष्ट खरीद लक्ष्य और परिचालन मानक सार्वजनिक नहीं किए जाते।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ड्रोन को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि ड्रोन भारतीय वायुसेना के लिए क्रांतिकारी नहीं, बल्कि विकासवादी बदलाव हैं, क्योंकि IAF में ड्रोन से जुड़ी क्षमताएँ दशकों से मौजूद हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अलग ड्रोन फोर्स बनाने की कोई योजना नहीं है।
भारतीय वायुसेना में अलग ड्रोन फोर्स क्यों नहीं बनेगी?
एयर चीफ मार्शल सिंह के अनुसार, ड्रोन को मौजूदा सैन्य ढाँचे में एकीकृत कर अन्य हथियार प्रणालियों के साथ संयुक्त रूप से संचालित करना अधिक प्रभावी है। अलग-अलग संरचनाओं के बजाय समन्वित संचालन से अधिकतम असर पड़ता है।
तरंग शक्ति अभ्यास क्या है और इसमें कौन-कौन शामिल है?
तरंग शक्ति एक बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास है जो 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयरबेस पर आयोजित हो रहा है। इसमें 40 देशों के 2,000 से अधिक सैन्यकर्मी और 80 से अधिक विमान भाग ले रहे हैं, और F-35 लड़ाकू विमान पहली बार भारत में किसी बहुराष्ट्रीय अभ्यास में शामिल हुए हैं।
लोइटरिंग एम्युनिशन का IAF में क्या उपयोग है?
एयर चीफ मार्शल सिंह के अनुसार, लोइटरिंग एम्युनिशन दुश्मन के बीच भ्रम पैदा करने और विशिष्ट लक्ष्यों को सटीकता से निशाना बनाने में सहायक होता है। IAF इसे मौजूदा हथियार प्रणालियों के साथ एकीकृत रूप से संचालित करती है।
तरंग शक्ति अभ्यास का उद्देश्य क्या है?
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भाग लेने वाले देशों के बीच आपसी सहयोग, इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना और एक-दूसरे की कार्यप्रणाली से सीखना है। एयर चीफ मार्शल ने बताया कि साझा संचार व्यवस्था विकसित करना भी इसका अहम हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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