वायुसेना दिवस 2026: एपी सिंह बोले — ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखाई IAF की ताकत, हर चुनौती के लिए तैयार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना ने 8 अक्टूबर 2026 को अपनी स्थापना की 94वीं वर्षगांठ बड़े गौरव के साथ मनाई। हिंडन एयरबेस पर आयोजित भव्य परेड समारोह में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि यह अवसर केवल इतिहास के पन्नों को पलटने का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आगे की राह तय करने का भी है। उन्होंने वायु योद्धाओं से उस शपथ को स्मरण करने का आह्वान किया, जो उन्होंने वर्दी धारण करते समय ली थी।
ऑपरेशन सिंदूर: वैश्विक मंच पर IAF की साख
वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान के दौरान पूरी दुनिया ने भारतीय वायुसेना की तत्काल युद्धक क्षमता, सटीक प्रहार और प्रभावी वायु रक्षा अभियानों को प्रत्यक्ष रूप से देखा। उन्होंने कहा कि वायुसेना का संकल्प और शक्ति महज शब्द नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक परिचालन क्षमता का जीवंत प्रमाण है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ लगातार बढ़ रही हैं।
आत्मनिर्भरता: स्वदेशी शस्त्र प्रणालियों की उड़ान
वायुसेना प्रमुख ने आत्मनिर्भरता को वायुसेना के मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने तेजस हल्के लड़ाकू विमान, उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान, ध्रुव और प्रचंड हेलीकॉप्टर, अस्त्र मिसाइल, आकाश वायु रक्षा प्रणाली और ब्रह्मोस मिसाइल जैसी स्वदेशी प्रणालियों को इसी संकल्प की उपज बताया। गौरतलब है कि 1932 में केवल चार विकर्स विमानों से शुरू हुई भारतीय वायुसेना आज विश्व की श्रेष्ठ वायु सेनाओं में अपना स्थान रखती है।
प्रशिक्षण और तकनीक: युद्धक तैयारी की मज़बूत नींव
एपी सिंह ने कहा कि किसी भी वायुसेना की असली परख उसकी परिचालन तैयारी से होती है — यानी जरूरत पड़ने पर वह कितनी तेजी और आत्मविश्वास के साथ कार्रवाई कर सकती है। वायुसेना में प्रशिक्षण इस प्रकार दिया जाता है कि युद्धजैसी परिस्थितियों में वायु और जमीनी दोनों कर्मियों का कौशल उनके स्वभाव का हिस्सा बन जाए। इस वर्ष वायु शक्ति, द्रोणाथॉन और बहुपक्षीय वायु अभ्यास तरंग शक्ति जैसे महत्वपूर्ण अभ्यास संपन्न किए गए, जिनका उद्देश्य युद्धक तैयारी परखना और नई तकनीकों को तेज़ी से परिचालन में शामिल करना है।
AI और स्वायत्त प्रणालियाँ: भविष्य की वायुशक्ति
वायुसेना प्रमुख ने बताया कि भारतीय वायुसेना ड्रोन से लेकर हाइपरसोनिक वाहनों, आधुनिक विमानों और उपग्रहों तक नई तकनीकों को लगातार आत्मसात कर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग विशाल डेटा के विश्लेषण और कमांडरों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता के लिए किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वायत्त प्रणालियों में भी मानव की भूमिका और नियंत्रण अधिकार बना रहेगा। इसके लिए उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग निरंतर बढ़ाया जा रहा है।
मानवीय सेवा और तीनों सेनाओं में तालमेल
एपी सिंह ने कहा कि वायुसेना युद्धक क्षमता के साथ-साथ मानवीय सेवा के लिए भी जानी जाती है। बाढ़, जंगल की आग और अन्य आपदाओं में राहत अभियानों में वायुसेना की भूमिका उल्लेखनीय रही है। उन्होंने कहा कि मानवीय सहायता की यह भावना 'वसुधैव कुटुंबकम' के सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए भारत की सीमाओं से परे भी जाती है। उन्होंने भारतीय थलसेना और नौसेना के साथ संयुक्त योजना और एकीकृत युद्धक कार्रवाई को वायुसेना की दैनिक गतिविधि का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ बढ़ते सहयोग और गगनयान अभियान में वायुसेना की भूमिका का भी उल्लेख किया।
वायुसेना प्रमुख ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि उपकरण और तकनीक केवल साधन हैं — वायुसेना की वास्तविक ताकत उसके वायु योद्धाओं की क्षमता, समर्पण और शौर्य में निहित है। वायुसेना अपने मूल मूल्यों पर अडिग रहते हुए भविष्य की हर चुनौती के लिए स्वयं को तैयार करती रहेगी।