'मेक इन इंडिया' के 12 साल: ड्रोन नियम 2021, PLI और आयात प्रतिबंध ने बदला भारत का ड्रोन इकोसिस्टम — स्मित शाह
सारांश
मुख्य बातें
ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के अध्यक्ष स्मित शाह ने 25 सितंबर 2026 को कहा कि 'मेक इन इंडिया' पहल के 12 वर्ष पूरे होने पर यह स्पष्ट है कि भारत का ड्रोन इकोसिस्टम पूरी तरह नीति-आधारित बदलाव की देन है। उनके अनुसार, ड्रोन नियम 2021, उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना और ड्रोन आयात प्रतिबंध — इन तीन नीतिगत कदमों ने मिलकर देश में एक सक्षम और आत्मनिर्भर ड्रोन उद्योग की नींव रखी है।
ड्रोन नियम 2021: उद्योग का सबसे बड़ा मोड़
शाह ने कहा, 'ड्रोन नियम 2021 के लागू होने के बाद उद्योग के लिए 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को व्यापक रूप से बढ़ावा मिला और पूरे इकोसिस्टम को अधिक खुला एवं निवेश-अनुकूल बनाया गया।' उनके अनुसार, इससे पहले ड्रोन क्षेत्र कई नियामकीय अड़चनों में उलझा हुआ था, जिससे कंपनियाँ, स्टार्टअप और निवेशक सतर्क रहते थे। नए नियमों ने उन बाधाओं को हटाकर अवसरों के द्वार खोल दिए।
गौरतलब है कि 2021 से पहले ड्रोन का व्यावसायिक उपयोग अत्यंत सीमित था और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया जटिल थी। नए नियमों ने न केवल पंजीकरण प्रक्रिया को सरल किया, बल्कि विभिन्न श्रेणियों के ड्रोन के लिए स्पष्ट परिचालन दिशानिर्देश भी तय किए।
PLI योजना: घरेलू विनिर्माण की रीढ़
शाह ने बताया कि सरकार द्वारा शुरू की गई PLI योजना ने घरेलू ड्रोन विनिर्माण को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अनुसार, वित्तीय प्रोत्साहन मिलने से देश में ड्रोन निर्माण क्षमता बढ़ी और स्थानीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिला।
यह ऐसे समय में आया जब चीन सहित अन्य देश वैश्विक ड्रोन बाज़ार में अपनी पकड़ मज़बूत कर रहे थे। PLI ने भारतीय कंपनियों को दीर्घकालिक व्यावसायिक योजना बनाने और अनुसंधान एवं विकास में निवेश करने का आत्मविश्वास दिया।
आयात प्रतिबंध: आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम
DFI अध्यक्ष ने कहा कि ड्रोन आयात पर लगाए गए प्रतिबंध ने घरेलू कंपनियों को अपनी तकनीक और उत्पाद विकसित करने का अनमोल अवसर दिया, जिससे 'आत्मनिर्भर भारत' की भावना को व्यावहारिक आधार मिला।
उनके अनुसार, इन तीनों नीतियों — ड्रोन नियम, PLI और आयात प्रतिबंध — ने मिलकर एक ऐसा वातावरण तैयार किया जिसमें न केवल ड्रोन का निर्माण बढ़ा, बल्कि अनुसंधान, नवाचार, रोज़गार और स्टार्टअप गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिली।
'मेक इन इंडिया' का व्यापक प्रभाव
शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज देश में जो ड्रोन इकोसिस्टम दिखाई देता है, वह 'मेक इन इंडिया' और नीति उदारीकरण के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 'मेक इन इंडिया' के अंतर्गत बनाई गई नीतियों ने ड्रोन क्षेत्र को एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित किया है — जहाँ स्पष्ट नीति, वित्तीय प्रोत्साहन और उद्योग-समर्थक दृष्टिकोण के समन्वय से किसी भी उभरते क्षेत्र को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है।
आगे की राह
ड्रोन उद्योग के जानकारों के अनुसार, भारत में ड्रोन का उपयोग कृषि, रक्षा, निगरानी, लॉजिस्टिक्स और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से बढ़ रहा है। स्मित शाह की टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब सरकार 'मेक इन इंडिया' की सफलता का आकलन कर रही है और ड्रोन क्षेत्र को इसके सबसे उज्ज्वल अध्यायों में से एक माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक ड्रोन निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की संभावनाएँ और अधिक मज़बूत हुई हैं।