मेक इन इंडिया के 12 साल: ड्रोन बाज़ार ₹60 करोड़ से ₹3,000–4,000 करोड़ पर, स्मित शाह ने गिनाए तीन बड़े बदलाव
सारांश
मुख्य बातें
ड्रोन फेडरेशन इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह ने 25 सितंबर 2026 को मेक इन इंडिया अभियान के 12 वर्ष पूरे होने पर कहा कि नीतिगत सुधारों, ड्रोन नियम 2021, पीएलआई स्कीम और विदेशी ड्रोन के आयात पर पाबंदी ने भारत के ड्रोन उद्योग को आमूल बदल दिया है। उनके अनुसार, जो बाज़ार कभी मात्र ₹60 करोड़ का था, वह अब ₹3,000 से ₹4,000 करोड़ तक पहुँच चुका है।
तीन प्रमुख नीतिगत हस्तक्षेप
शाह ने बताया कि मेक इन इंडिया के तहत ड्रोन क्षेत्र में तीन स्तरों पर बदलाव हुए। पहला — इज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और नीति उदारीकरण: ड्रोन नियम 2021 के ज़रिये एक ऐसा नियामक ढाँचा तैयार किया गया जिसने पूरे ड्रोन इकोसिस्टम को खुला कर दिया और नए व्यावसायिक अवसरों के द्वार खोले।
दूसरा बदलाव पीएलआई स्कीम के रूप में वित्तीय प्रोत्साहन का था। शाह के अनुसार इस स्कीम ने घरेलू ड्रोन निर्माताओं को सीधा आर्थिक सहारा दिया, जिससे देश के भीतर उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
तीसरा और शायद सबसे निर्णायक कदम रहा — विदेशी ड्रोन के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध। इस फैसले ने बाज़ार में घरेलू निर्माताओं के लिए स्थान सुनिश्चित किया और 'आत्मनिर्भर' ड्रोन उद्योग की नींव रखी।
बाज़ार का विस्तार: आँकड़े क्या कहते हैं
शाह ने दावा किया कि इन हस्तक्षेपों का परिणाम संख्याओं में साफ दिखता है। भारत के ड्रोन उद्योग का कुल बाज़ार जो एक समय ₹60 करोड़ के आसपास सिमटा था, वह आज ₹3,000 से ₹4,000 करोड़ के दायरे में आ चुका है — यानी कुछ वर्षों में लगभग 50 गुना से भी अधिक की वृद्धि।
उन्होंने अनुमान जताया कि अगले दो वर्षों में यह बाज़ार ₹19,000 से ₹20,000 करोड़ तक पहुँच सकता है। हालाँकि यह अनुमान ड्रोन फेडरेशन इंडिया की ओर से है और स्वतंत्र विश्लेषकों द्वारा इसकी पुष्टि अभी बाकी है।
मेक इन इंडिया विजन और व्यापक संदर्भ
शाह ने ज़ोर दिया कि ड्रोन सेक्टर की यह वृद्धि किसी एकल निर्णय का नतीजा नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया विजन के अंतर्गत किए गए समन्वित नीतिगत हस्तक्षेपों की उपज है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत रक्षा, कृषि, लॉजिस्टिक्स और सर्विलांस — सभी क्षेत्रों में ड्रोन प्रौद्योगिकी को तेज़ी से अपना रहा है।
गौरतलब है कि 2014 में मेक इन इंडिया के शुभारंभ के समय ड्रोन क्षेत्र लगभग अनियमित था और घरेलू विनिर्माण न के बराबर था। नीति उदारीकरण के इस क्रमिक सफर ने — विशेष रूप से 2021 के नियामक सुधारों के बाद — भारत को वैश्विक ड्रोन आपूर्ति श्रृंखला में एक उभरते खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना शुरू किया है।
आगे की राह
ड्रोन फेडरेशन इंडिया के अध्यक्ष के अनुसार, अब चुनौती इस गति को बनाए रखने और ड्रोन से जुड़े सेवा क्षेत्र — जैसे प्रशिक्षण, रखरखाव और सॉफ्टवेयर — को भी उसी रफ्तार से विकसित करने की है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले दो वर्ष इस उद्योग के लिए निर्णायक होंगे — और यह परखेगा कि क्या नीतिगत प्रोत्साहन टिकाऊ बाज़ार प्रतिस्पर्धा में तब्दील हो सके।