25 सितंबर 2026
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मेक इन इंडिया के 12 साल: ड्रोन बाज़ार ₹60 करोड़ से ₹3,000–4,000 करोड़ पर, स्मित शाह ने गिनाए तीन बड़े बदलाव

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मेक इन इंडिया के 12 साल: ड्रोन बाज़ार ₹60 करोड़ से ₹3,000–4,000 करोड़ पर, स्मित शाह ने गिनाए तीन बड़े बदलाव

सारांश

मेक इन इंडिया के 12 साल में ड्रोन बाज़ार ने ₹60 करोड़ से ₹4,000 करोड़ तक का सफर तय किया। ड्रोन फेडरेशन इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह के अनुसार, नीति उदारीकरण, पीएलआई और आयात प्रतिबंध — इन तीन कदमों ने यह बदलाव संभव किया। अगले दो वर्षों में ₹20,000 करोड़ के बाज़ार का अनुमान है।

मुख्य बातें

ड्रोन फेडरेशन इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह ने 25 सितंबर 2026 को मेक इन इंडिया के 12 वर्ष पूरे होने पर ड्रोन क्षेत्र की प्रगति का आकलन साझा किया।
भारत का ड्रोन बाज़ार ₹60 करोड़ से बढ़कर ₹3,000–4,000 करोड़ तक पहुँचा — कुछ वर्षों में लगभग 50 गुना से अधिक वृद्धि।
अगले दो वर्षों में बाज़ार के ₹19,000–20,000 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान (ड्रोन फेडरेशन इंडिया के अनुसार)।
तीन प्रमुख नीतिगत कदम: ड्रोन नियम 2021 , पीएलआई स्कीम और विदेशी ड्रोन आयात पर पूर्ण प्रतिबंध ।
शाह ने कहा कि यह वृद्धि किसी एकल निर्णय का नहीं, बल्कि मेक इन इंडिया के समन्वित नीतिगत हस्तक्षेपों का परिणाम है।

ड्रोन फेडरेशन इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह ने 25 सितंबर 2026 को मेक इन इंडिया अभियान के 12 वर्ष पूरे होने पर कहा कि नीतिगत सुधारों, ड्रोन नियम 2021, पीएलआई स्कीम और विदेशी ड्रोन के आयात पर पाबंदी ने भारत के ड्रोन उद्योग को आमूल बदल दिया है। उनके अनुसार, जो बाज़ार कभी मात्र ₹60 करोड़ का था, वह अब ₹3,000 से ₹4,000 करोड़ तक पहुँच चुका है।

तीन प्रमुख नीतिगत हस्तक्षेप

शाह ने बताया कि मेक इन इंडिया के तहत ड्रोन क्षेत्र में तीन स्तरों पर बदलाव हुए। पहला — इज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और नीति उदारीकरण: ड्रोन नियम 2021 के ज़रिये एक ऐसा नियामक ढाँचा तैयार किया गया जिसने पूरे ड्रोन इकोसिस्टम को खुला कर दिया और नए व्यावसायिक अवसरों के द्वार खोले।

दूसरा बदलाव पीएलआई स्कीम के रूप में वित्तीय प्रोत्साहन का था। शाह के अनुसार इस स्कीम ने घरेलू ड्रोन निर्माताओं को सीधा आर्थिक सहारा दिया, जिससे देश के भीतर उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

तीसरा और शायद सबसे निर्णायक कदम रहा — विदेशी ड्रोन के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध। इस फैसले ने बाज़ार में घरेलू निर्माताओं के लिए स्थान सुनिश्चित किया और 'आत्मनिर्भर' ड्रोन उद्योग की नींव रखी।

बाज़ार का विस्तार: आँकड़े क्या कहते हैं

शाह ने दावा किया कि इन हस्तक्षेपों का परिणाम संख्याओं में साफ दिखता है। भारत के ड्रोन उद्योग का कुल बाज़ार जो एक समय ₹60 करोड़ के आसपास सिमटा था, वह आज ₹3,000 से ₹4,000 करोड़ के दायरे में आ चुका है — यानी कुछ वर्षों में लगभग 50 गुना से भी अधिक की वृद्धि।

उन्होंने अनुमान जताया कि अगले दो वर्षों में यह बाज़ार ₹19,000 से ₹20,000 करोड़ तक पहुँच सकता है। हालाँकि यह अनुमान ड्रोन फेडरेशन इंडिया की ओर से है और स्वतंत्र विश्लेषकों द्वारा इसकी पुष्टि अभी बाकी है।

मेक इन इंडिया विजन और व्यापक संदर्भ

शाह ने ज़ोर दिया कि ड्रोन सेक्टर की यह वृद्धि किसी एकल निर्णय का नतीजा नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया विजन के अंतर्गत किए गए समन्वित नीतिगत हस्तक्षेपों की उपज है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत रक्षा, कृषि, लॉजिस्टिक्स और सर्विलांस — सभी क्षेत्रों में ड्रोन प्रौद्योगिकी को तेज़ी से अपना रहा है।

गौरतलब है कि 2014 में मेक इन इंडिया के शुभारंभ के समय ड्रोन क्षेत्र लगभग अनियमित था और घरेलू विनिर्माण न के बराबर था। नीति उदारीकरण के इस क्रमिक सफर ने — विशेष रूप से 2021 के नियामक सुधारों के बाद — भारत को वैश्विक ड्रोन आपूर्ति श्रृंखला में एक उभरते खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना शुरू किया है।

आगे की राह

ड्रोन फेडरेशन इंडिया के अध्यक्ष के अनुसार, अब चुनौती इस गति को बनाए रखने और ड्रोन से जुड़े सेवा क्षेत्र — जैसे प्रशिक्षण, रखरखाव और सॉफ्टवेयर — को भी उसी रफ्तार से विकसित करने की है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले दो वर्ष इस उद्योग के लिए निर्णायक होंगे — और यह परखेगा कि क्या नीतिगत प्रोत्साहन टिकाऊ बाज़ार प्रतिस्पर्धा में तब्दील हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये अनुमान उसी उद्योग निकाय के हैं जिसे इस वृद्धि से सीधा हित है — स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है। ₹20,000 करोड़ का लक्ष्य तभी हासिल होगा जब घरेलू माँग — रक्षा, कृषि और लॉजिस्टिक्स में — उसी गति से बढ़े जिस गति से आपूर्ति पक्ष बढ़ रहा है। आयात प्रतिबंध से घरेलू निर्माताओं को संरक्षण मिला है, पर इससे प्रतिस्पर्धात्मकता की असली परीक्षा टल भी सकती है — वैश्विक बाज़ार में भारतीय ड्रोन की उपस्थिति अभी सीमित है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेक इन इंडिया के तहत ड्रोन सेक्टर में क्या बदलाव आए?
मेक इन इंडिया के अंतर्गत ड्रोन क्षेत्र में तीन प्रमुख बदलाव हुए — ड्रोन नियम 2021 के ज़रिये नीति उदारीकरण, पीएलआई स्कीम के माध्यम से वित्तीय प्रोत्साहन, और विदेशी ड्रोन के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध। ड्रोन फेडरेशन इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह के अनुसार इन्हीं कदमों ने घरेलू ड्रोन उद्योग के विकास का आधार तैयार किया।
भारत का ड्रोन बाज़ार अभी कितना बड़ा है?
ड्रोन फेडरेशन इंडिया के अनुसार, भारत का ड्रोन बाज़ार फिलहाल लगभग ₹3,000 से ₹4,000 करोड़ का है। यह उस स्तर से कई गुना अधिक है जब यह बाज़ार मात्र ₹60 करोड़ के आसपास था।
अगले दो साल में भारत के ड्रोन बाज़ार का क्या लक्ष्य है?
स्मित शाह ने अनुमान जताया है कि अगले दो वर्षों में भारत का ड्रोन बाज़ार ₹19,000 से ₹20,000 करोड़ तक पहुँच सकता है। यह अनुमान ड्रोन फेडरेशन इंडिया की ओर से है और स्वतंत्र विश्लेषण पर आधारित नहीं है।
ड्रोन नियम 2021 का क्या महत्व है?
ड्रोन नियम 2021 ने भारत में ड्रोन से जुड़े व्यवसाय और संचालन के लिए एक स्पष्ट नियामक ढाँचा तैयार किया। इससे पहले अनिश्चित नियामक वातावरण के कारण निवेश और कारोबार विस्तार बाधित था — नए नियमों ने यह बाधा दूर की।
विदेशी ड्रोन के आयात पर प्रतिबंध से भारतीय उद्योग को कैसे फायदा हुआ?
विदेशी ड्रोन के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध ने घरेलू निर्माताओं के लिए बाज़ार में जगह सुनिश्चित की, जिससे भारत में ही ड्रोन उत्पादन और संबंधित इकोसिस्टम को विकसित करने का अवसर मिला। हालाँकि आलोचक यह भी कहते हैं कि इस संरक्षण से वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता की परीक्षा टल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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