पीएलआई-ऑटो स्कीम से ₹44,326 करोड़ का निवेश, 67,820 रोजगार सृजित: भारी उद्योग मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
भारी उद्योग मंत्रालय ने 4 अगस्त 2026 को बताया कि केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) ऑटो स्कीम के तहत 31 मार्च 2026 तक ₹44,326 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ है और 67,820 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। इसके साथ ही, वित्त वर्ष 2020 को आधार वर्ष मानते हुए ऑटोमोबाइल क्षेत्र में ₹52,414 करोड़ की अतिरिक्त बिक्री (इंक्रीमेंटल सेल्स) दर्ज की गई है।
मुख्य उपलब्धियाँ
मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, पात्र कंपनियों को अब तक ₹2,386.36 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है। 28 जुलाई 2026 तक 18 कंपनियों को घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं, जो 155 एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (एएटी) उत्पादों और उनके विभिन्न संस्करणों को कवर करते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक ऑटोमोबाइल आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य उन्नत ऑटोमोटिव तकनीकों के घरेलू निर्माण को प्रोत्साहित करना और आयात पर निर्भरता घटाना है।
डीवीए शर्त और स्थानीय उत्पादन
योजना के तहत प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए कंपनियों को कम से कम 50 प्रतिशत घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) सुनिश्चित करना अनिवार्य है। मंत्रालय के अनुसार, इस शर्त का उद्देश्य स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना, आयात निर्भरता कम करना और देश में उत्पादन गतिविधियों को गहरा करना है। एएटी उत्पादों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि भारतीय ऑटो उद्योग नई तकनीकों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
फ्लेक्स-फ्यूल और एथेनॉल नीति
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के मुद्दे पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने वाले वाहनों के लिए फिलहाल कोई अलग राष्ट्रीय चरणबद्ध नीति नहीं बनाई गई है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि फ्लेक्स-फ्यूल या इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने के प्रभावों पर कोई स्वतंत्र अध्ययन नहीं कराया गया है।
हालाँकि, सरकार ने एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मंत्रालय के अनुसार, इस दिशा में जल संरक्षण, खाद्य सुरक्षा और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चा माल
राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत एथेनॉल उत्पादन के लिए कई प्रकार के कच्चे माल को मंजूरी दी गई है — इनमें गन्ना-आधारित उत्पाद, मक्का, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न, टूटा हुआ चावल, मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त अनाज और राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति (एनबीसीसी) द्वारा अनुमोदित अधिशेष खाद्यान्न शामिल हैं।
कम पानी की खपत वाली फसलों, विशेषकर मक्का, की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 2024 में एक विशेषज्ञ समिति गठित की थी, जिसने विभिन्न फसलों की जल आवश्यकता का अध्ययन किया। सरकार उस समिति की सिफारिशों पर विचार कर रही है और उन्हें कार्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।
आगे क्या
आँकड़ों के अनुसार, पीएलआई-ऑटो स्कीम के तहत निवेश और रोजगार की रफ्तार जारी है, लेकिन फ्लेक्स-फ्यूल नीति की अनिश्चितता और एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में संतुलन की चुनौती आने वाले महीनों में नीति-निर्माताओं के लिए अहम परीक्षा होगी। विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के लागू होने के बाद ऑटो क्षेत्र में हरित ईंधन की दिशा अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।