क्या 'डंकी' रूट मानव तस्करी मामले में तीन एजेंटों की 5.41 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई?
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने 5.41 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की।
- तीन एजेंट मानव तस्करी के आरोप में पकड़े गए।
- जांच में फर्जी दस्तावेज बरामद हुए।
- युवाओं को गुमराह किया जा रहा था।
- अवैध प्रवास पर सख्त कार्रवाई हो रही है।
नई दिल्ली, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जालंधर क्षेत्र ने कुख्यात 'डंकी' मार्ग का उपयोग कर अमेरिका जाने वाले एक विशाल अवैध आव्रजन और मानव तस्करी रैकेट से जुड़े तीन एजेंटों की लगभग 5.41 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दी गई। जब्त की गई संपत्तियों में कृषि भूमि, आवासीय और व्यावसायिक परिसर और आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर बैंक खातों का समावेश है।
अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई शुभम शर्मा, जगजीत सिंह और सुरमुख सिंह नामक एजेंटों द्वारा अपराध से अर्जित आय से प्राप्त संपत्तियों के खिलाफ की गई है, जो लोगों को कानूनी प्रवास का झूठा वादा करके गुमराह करते हुए अवैध रूप से अमेरिका भेज रहे थे। तीनों हरियाणा के निवासी हैं और लंबे समय से 'डंकी' रूट नेटवर्क में विभिन्न भूमिकाएं निभा रहे थे।
अधिकारी ने आगे बताया कि वे युवाओं को निशाना बनाकर उन्हें बहला-फुसलाकर अपने नेटवर्क में मौजूद अन्य एजेंटों के पास भेज देते थे। इसके अतिरिक्त, वे विशेष रूप से विभिन्न देशों के लिए हवाई टिकट दिलाने और आगंतुक वीजा की व्यवस्था में संलग्न थे।
फरवरी 2025 में अमेरिकी सरकार द्वारा कथित तौर पर अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने वाले 330 भारतीय नागरिकों को निर्वासित किए जाने के बाद, पंजाब और हरियाणा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 (पूर्ववर्ती आईपीसी, 1860) और आव्रजन अधिनियम, 1983 की विभिन्न धाराओं के तहत कई एफआईआर दर्ज की। इसके आधार पर ईडी ने अवैध आव्रजन और मानव तस्करी रैकेट की जांच शुरू की।
ईडी की जांच में पता चला कि आरोपी एजेंट और उनके सहयोगी भोले-भाले लोगों को अमेरिका में कानूनी रूप से प्रवेश दिलाने का लालच देकर उन्हें निशाना बनाते थे और उनसे बड़ी रकम वसूलते थे। हालांकि, कानूनी प्रवास के बजाय, उन्हें कई दक्षिण अमेरिकी देशों के खतरनाक और अवैध रास्तों से ले जाया जाता था और अंत में उन्हें जबरन अमेरिका-मेक्सिको सीमा को गैरकानूनी रूप से पार कराया जाता था।
ईडी ने कहा कि यात्रा के दौरान पीड़ितों को यातना, जबरन वसूली, दबाव और यहां तक कि अवैध कार्य करने के लिए मजबूर किया जाता था। इस प्रकार की धोखाधड़ी वाली गतिविधियों के माध्यम से एकत्र की गई बड़ी रकम मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपराध की आय मानी जाती है।
जांच के तहत, ईडी ने पीएमएलए के प्रावधानों के तहत 9 और 11 जुलाई को पंजाब और हरियाणा में 19 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप फर्जी आव्रजन स्टाम्प, नकली वीजा स्टाम्प, रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरणों सहित आपत्तिजनक दस्तावेज और सामग्री बरामद हुई, जिससे आरोपियों के खिलाफ मामला और मजबूत हुआ।
ईडी के अधिकारी ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और जैसे-जैसे अधिक सबूतों का विश्लेषण किया जा रहा है और वित्तीय लेन-देन का पता लगाया जा रहा है, वैसे-वैसे अतिरिक्त कार्रवाई भी की जा सकती है।