क्या ईडी ने जेनसोल ग्रुप से जुड़ी संपत्तियों को अटैच किया है?
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने जेनसोल ग्रुप की संपत्तियों को अटैच किया।
- सार्वजनिक ऋणों का दुरुपयोग का आरोप।
- जांच के आधार पर कार्रवाई की गई।
- भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
- सभी अवैध संपत्तियों का पता लगाने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय ने पीएमएलए के तहत जेनसोल ग्रुप से जुड़ी संपत्तियों को अटैच कर दिया है। ईडी ने कैपब्रिज वेंचर्स एलएलपी के नाम से रजिस्टर्ड लगभग 40.57 करोड़ रुपए के एक अपार्टमेंट और जेनसोल ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के 14.28 करोड़ रुपए के बैंक बैलेंस को अटैच किया।
यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज दो एफआईआर की जांच के आधार पर की गई। जांच में पता चला है कि जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनी ब्लूस्मार्ट फ्लीट प्राइवेट लिमिटेड ने गो ऑटो प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर सार्वजनिक ऋणों का दुरुपयोग किया है।
आरोप लगाया गया है कि कंपनियों ने आईआरईडीए और पीएफसी जैसे सरकारी ऋणदाताओं तथा एनबीएफसी टोयोटा फाइनेंशियल सर्विसेज इंडिया लिमिटेड से इलेक्ट्रिक वाहनों के बेड़े के विस्तार के लिए मिले धन को डायवर्ट किया। इस धन का उपयोग जेनसोल ग्रुप की अन्य व्यावसायिक गतिविधियों और प्रमोटरों के व्यक्तिगत लाभ के लिए किया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस ऋण निधि के दुरुपयोग के कारण जेनसोल के खाते एनपीए में चले गए और सरकारी संस्थाओं को करोड़ों का नुकसान हुआ। दिसंबर 2025 तक जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड का आईआरईडीए और पीएफसी के प्रति कुल बकाया राशि 505.27 करोड़ रुपए थी।
विशेष रूप से, जांच में पता चला कि अनमोल सिंह जग्गी ने सह-साजिशकर्ता अजय अग्रवाल की मदद से इस धन को डीएलएफ कैमेलियाज, गुरुग्राम में एक लग्जरी अपार्टमेंट में डायवर्ट किया। इसके अलावा, जेनसोल ग्रुप की अन्य कंपनियों और कर्मचारियों के नाम पर खोले गए बेनामी खातों में पड़े बैंक बैलेंस को भी ईडी ने ट्रैक कर अटैच किया।
ईडी ने इस मामले की आगे की जांच जारी रखी है और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम भ्रष्टाचार और वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है।
जेनसोल ग्रुप के प्रमोटर और संबंधित कंपनियों के खिलाफ जांच अभी भी जारी है। ईडी ने कहा है कि सभी अवैध संपत्तियों और धन का पता लगाने के लिए और अधिक कदम उठाए जाएंगे। इस कार्रवाई से यह संदेश मिलता है कि सार्वजनिक ऋण और वित्तीय संसाधनों का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।