क्या मध्य प्रदेश में शराब के फर्जी चालान स्कैम के मामले में ईडी का एक्शन है?
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने 28 एसेट्स को अटैच किया है।
- संपत्तियों का मूल्य 70 करोड़ रुपये से अधिक है।
- आरोपियों ने जालसाजी और धोखाधड़ी की।
- न्यायिक हिरासत में मुख्य आरोपी हैं।
- जांच जारी है।
इंदौर, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ईडी), इंदौर सब-जोनल ऑफिस ने 28 नवंबर को एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है, जिसके तहत शराब के फर्जी चालान स्कैम के मामले में 28 एसेट्स (क्राइम से हुई कमाई) को अटैच किया गया है। अटैच की गई संपत्तियों में इंदौर, मंदसौर और खरगोन में विभिन्न स्थानों पर मौजूद जमीन और फ्लैट शामिल हैं, जो विभिन्न शराब कॉन्ट्रैक्टर्स के स्वामित्व में हैं। इन अटैच की गई प्रॉपर्टीज की वर्तमान बाजार मूल्य 70 करोड़ रुपये से अधिक है।
ईडी ने इंदौर के रावजी पुलिस स्टेशन में विभिन्न शराब कॉन्ट्रैक्टर्स के खिलाफ ट्रेजरी चालान की जालसाजी और धोखाधड़ी करके सरकारी राजस्व को नुकसान पहुँचाने के आरोप में दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की।
आरोपियों ने छोटी रकम के चालान तैयार कर उन्हें बैंक में जमा किया। चालान के निर्धारित प्रारूप में, 'रुपये अंकों में' और 'रुपये शब्दों में' लिखा जाता था। आंकड़ों में मूल्य भरा जाता था, लेकिन 'रुपये शब्दों में' के लिए जगह खाली छोड़ दी जाती थी। जब राशि जमा हो जाती थी, तो जमा करने वाला बाद में उस राशि को 'रुपये अंकों में' में परिवर्तित कर देता था और बढ़ी हुई राशि को 'रुपये शब्दों में' की खाली जगह में भर देता था। ऐसे परिवर्तित चालान की प्रति संबंधित देसी शराब गोदाम या विदेशी शराब के मामले में जिला आबकारी ऑफिस में जमा कर दी जाती थी।
इस प्रक्रिया के माध्यम से, कम ड्यूटी देने के बावजूद अधिक शराब का स्टॉक जमा किया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
जांच में यह खुलासा हुआ कि राजू दशवंत, अंश त्रिवेदी और अन्य शराब ठेकेदारों ने मिलकर जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तहत 49 करोड़ रुपये से अधिक की आय को बनाने, रखने, छिपाने और दिखाने में शामिल रहे। पहले, ईडी ने इस मामले में मुख्य आरोपी राजू दशवंत और अंश त्रिवेदी को गिरफ्तार किया था। वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। वहीं, आगे की जांच जारी है।