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रेप केस में बरी हुए केरल के पूर्व कांग्रेस विधायक एल्डहोस कुन्नप्पिल्ली, नेय्याट्टिनकारा अदालत का फैसला

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रेप केस में बरी हुए केरल के पूर्व कांग्रेस विधायक एल्डहोस कुन्नप्पिल्ली, नेय्याट्टिनकारा अदालत का फैसला

सारांश

नेय्याट्टिनकारा सत्र अदालत ने पूर्व कांग्रेस विधायक एल्डहोस कुन्नप्पिल्ली को रेप केस में बरी कर दिया — शिकायतकर्ता सहित चार गवाह अपने बयानों से मुकर गए। यह फैसला उस चुनाव के बाद आया जिसमें कांग्रेस ने इसी मामले का हवाला देकर उन्हें टिकट नहीं दिया था।

मुख्य बातें

नेय्याट्टिनकारा सत्र अदालत ने 26 मई 2026 को पूर्व विधायक एल्डहोस कुन्नप्पिल्ली को रेप केस में बरी किया।
शिकायतकर्ता सहित चार प्रमुख गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए; साक्ष्य अपर्याप्त पाए गए।
मामला 2022 में सामने आया था; तिरुवनंतपुरम जिला अपराध शाखा ने मई 2024 में आरोप पत्र दाखिल किया था।
कांग्रेस ने लंबित मामले के कारण उन्हें पेरुम्बावूर विधानसभा सीट से टिकट नहीं दिया था; कांग्रेस उम्मीदवार ने वह सीट जीती।
अदालती राहत के बाद कांग्रेस में एल्डहोस की राजनीतिक पुनर्वापसी की चर्चाएँ तेज होने की संभावना।

केरल के पूर्व कांग्रेस विधायक एल्डहोस कुन्नप्पिल्ली को 26 मई 2026 को बलात्कार के एक मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली, जब नेय्याट्टिनकारा सत्र अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में उन्हें बरी कर दिया। पेरुम्बावूर विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके कुन्नप्पिल्ली के विरुद्ध यह मामला 2022 से केरल की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ था।

मुख्य घटनाक्रम

अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि शिकायतकर्ता सहित चार प्रमुख गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। सोमवार को शिकायतकर्ता ने स्वयं अदालत में बयान दिया कि एल्डहोस कुन्नप्पिल्ली ने उनके साथ कोई यौन उत्पीड़न नहीं किया था। साक्ष्यों के इस बिखराव के आधार पर अदालत ने मंगलवार को बरी करने का फैसला सुनाया।

तिरुवनंतपुरम जिला अपराध शाखा ने मई 2024 में नेय्याट्टिनकारा सत्र अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोप पत्र में एल्डहोस पर बलात्कार और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। जाँच एजेंसी के अनुसार, उन पर शिकायतकर्ता का कई बार यौन उत्पीड़न करने का आरोप था।

आरोपों का विस्तार और सह-आरोपी

इस मामले में एल्डहोस के दो करीबी दोस्तों को भी आरोपी बनाया गया था। आरोप था कि उन्होंने शिकायतकर्ता पर धमकी देकर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। यह ऐसे समय में आया था जब केरल में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर महिला सुरक्षा को लेकर बहस तेज थी।

कांग्रेस और चुनावी राजनीति पर असर

यह प्रकरण भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के लिए असहज स्थिति का कारण बना था। पार्टी नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव में लंबित आपराधिक मामले का हवाला देते हुए एल्डहोस को पेरुम्बावूर सीट से टिकट देने से इनकार कर दिया था। प्रारंभ में वह इस फैसले से नाराज बताए गए थे, लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी का निर्णय स्वीकार करते हुए कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में सक्रिय प्रचार किया। अंततः कांग्रेस उम्मीदवार ने पेरुम्बावूर सीट जीती।

गौरतलब है कि उस दौरान कांग्रेस राज्य की वामपंथी सरकार को महिला सुरक्षा और राजनीतिक नैतिकता के मुद्दों पर घेर रही थी, ऐसे में पार्टी के भीतर से ही किसी विधायक का इस तरह के मामले में नामजद होना पार्टी की स्थिति को कमज़ोर करता था।

राजनीतिक विश्लेषण

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह फैसला विधानसभा चुनाव से पहले आ जाता, तो संभवतः कांग्रेस उन्हें दोबारा उम्मीदवार बना सकती थी। अब अदालत से राहत मिलने के बाद पार्टी में एल्डहोस की राजनीतिक पुनर्वापसी और उनकी भावी भूमिका को लेकर चर्चाएँ तेज होने की संभावना है।

आगे क्या

अदालत के इस फैसले के बाद एल्डहोस कुन्नप्पिल्ली पर लगे आरोपों को लेकर बना संदेह काफी हद तक समाप्त हो गया है। अब नज़रें इस पर टिकी हैं कि कांग्रेस नेतृत्व इस बदली परिस्थिति में उनके साथ किस तरह का रुख अपनाता है और क्या वह पार्टी में अपनी पुरानी सक्रिय भूमिका हासिल कर पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अदालती फैसला वर्षों बाद आता है। कांग्रेस ने टिकट काटकर नैतिकता का संदेश देने की कोशिश की, लेकिन अब जब अदालत ने बरी कर दिया है तो सवाल उठता है कि क्या पार्टी ने बिना सिद्ध दोष के एक निर्वाचित प्रतिनिधि का राजनीतिक नुकसान किया। दूसरी ओर, गवाहों का मुकरना न्यायिक प्रक्रिया की उस कमज़ोरी को रेखांकित करता है जो गंभीर आपराधिक मामलों में भी साक्ष्य संरक्षण को लेकर बार-बार सामने आती है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एल्डहोस कुन्नप्पिल्ली को किस मामले में बरी किया गया?
नेय्याट्टिनकारा सत्र अदालत ने उन्हें 2022 में दर्ज बलात्कार और हत्या के प्रयास के मामले में बरी किया। अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के आधार पर यह फैसला सुनाया।
अदालत ने बरी करने का क्या आधार बताया?
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता सहित चार प्रमुख गवाह अपने पहले के बयानों से मुकर गए। शिकायतकर्ता ने सोमवार को अदालत में कहा कि एल्डहोस ने उनके साथ कोई यौन उत्पीड़न नहीं किया था, जिसके बाद अदालत ने साक्ष्य अपर्याप्त मानते हुए बरी किया।
कांग्रेस ने एल्डहोस को टिकट क्यों नहीं दिया था?
पार्टी नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव से पहले उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मामले का हवाला देते हुए पेरुम्बावूर सीट से टिकट देने से इनकार किया था। बाद में एल्डहोस ने पार्टी का फैसला स्वीकार कर कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार किया और कांग्रेस ने वह सीट जीती।
इस मामले में और कौन आरोपी थे?
एल्डहोस के अलावा उनके दो करीबी दोस्तों को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया था। आरोप था कि उन्होंने शिकायतकर्ता को धमकाकर शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया।
अदालती फैसले के बाद एल्डहोस की राजनीतिक स्थिति क्या होगी?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस फैसले के बाद कांग्रेस में एल्डहोस कुन्नप्पिल्ली की राजनीतिक पुनर्वापसी और भावी भूमिका को लेकर चर्चाएँ तेज होने की संभावना है। यदि यह फैसला चुनाव से पहले आया होता, तो पार्टी उन्हें उम्मीदवार बना सकती थी।
राष्ट्र प्रेस
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