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पश्चिम बंगाल में भाजपा का घोषणापत्र: महिला मतदाताओं को आकर्षित करने का प्रयास - फौजिया खान

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पश्चिम बंगाल में भाजपा का घोषणापत्र: महिला मतदाताओं को आकर्षित करने का प्रयास - फौजिया खान

सारांश

फौजिया खान ने भाजपा के घोषणापत्र पर कटाक्ष करते हुए इसे महिला मतदाताओं को लुभाने का प्रयास बताया है। उनका कहना है कि चुनावों के समय महिलाओं को पैसे देने की प्रथा से आर्थिक संकट का पता चलता है।

मुख्य बातें

महिला मतदाताओं को लुभाने का प्रयास चुनाव आयोग पर सवाल अघोषित आपातकाल की स्थिति महिला आरक्षण बिल का चुनावी उपयोग लोकतंत्र पर सेंसरशिप

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एनसीपी (एसपी) की वरिष्ठ नेता फौजिया खान ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के घोषणापत्र पर तीखा कटाक्ष करते हुए इसे महिला मतदाताओं को आकृष्ट करने का प्रयास करार दिया है।

राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में फौजिया खान ने कहा कि चुनावों के दौरान महिलाओं को पैसे देने का प्रावधान सामने आता है, जिससे मतदान प्रतिशत में वृद्धि होती है। यह दर्शाता है कि महिलाएं कितनी आर्थिक संकट में हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वहाँ जीविका दीदियों को मतदान केंद्र पर बैठाया गया था, जिन्होंने अन्य महिला मतदाताओं को बताया कि भाजपा को वोट देने पर उन्हें दो लाख रुपए मिलेंगे। मतदान केंद्र पर रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं थी, इसलिए यह मामला सबके सामने नहीं आ सका।

उन्होंने कहा कि अब बिहार की तरह पश्चिम बंगाल में भी महिलाओं को लुभाने का प्रयास किया जा रहा है। चुनाव आयोग भाजपा का एक उपकरण बन गया है। सत्ता प्राप्त करने के लिए ऐसे अभियानों का संचालन किया जा रहा है, जो देश के भविष्य को अंधकारमय बना रहे हैं।

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर फौजिया खान ने कहा कि मैं उन्हें बधाई देती हूं, लेकिन यदि वे सरकार के उपकरण बनकर कार्य करेंगे, तो देश का भला कैसे होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अघोषित आपातकाल लागू है। लोकतंत्र के स्तंभों पर सेंसरशिप लगाई जा रही है। किसी की आवाज नहीं उठ रही है। मुख्यमंत्री को डराया-धमकाया जा रहा है और उनके पक्ष में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक दिन सच्चाई जनता के सामने आएगी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

महिला आरक्षण बिल पर फौजिया खान ने कहा कि हर मुद्दे को चुनावी दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। महिला आरक्षण बिल को चुनावी मुद्दा नहीं बनाना चाहिए था। 2023 में यह ऐतिहासिक कानून दो शर्तों के साथ पारित किया गया था, जिसमें परिसीमन के बाद लागू करने का प्रावधान था। चुनावों के समय विशेष सत्र क्यों बुलाया गया? पहले के संसद सत्र में इसे लागू क्यों नहीं किया गया? यह सब कुछ सरकार की मर्जी से हो रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फौजिया खान का बयान महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि राजनीतिक दलों के बीच महिला मतदाताओं की स्थिति को लेकर संवेदनशीलता की कमी है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोकतंत्र में सभी की आवाज सुनी जाए।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फौजिया खान ने भाजपा के घोषणापत्र पर क्या टिप्पणी की?
फौजिया खान ने इसे महिला मतदाताओं को लुभाने का प्रयास बताया है।
क्या बिहार में भी ऐसा कुछ हुआ था?
हाँ, बिहार में जीविका दीदियों को भाजपा को वोट देने के लिए पैसे देने का प्रलोभन दिया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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