क्या फिल्म 'डेड टू राइट्स' ने मलेशियाई प्रीमियर में दर्शकों पर गहरा प्रभाव डाला?

सारांश
Key Takeaways
- फिल्म 'डेड टू राइट्स' नानचिंग नरसंहार पर आधारित है।
- दर्शकों ने फिल्म को गहराई से प्रभावित पाया।
- शांति का संदेश प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।
बीजिंग, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। चीनी फिल्म 'डेड टू राइट्स' का प्रीमियर २४ अगस्त को मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित किया गया। नानचिंग नरसंहार की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।
प्रीमियर में लगभग एक हजार मलेशियाई और चीनी राजनीतिक एवं व्यावसायिक नेता, सांस्कृतिक हस्तियां, मीडिया प्रतिनिधि और प्रशंसक शामिल हुए। फिल्म के समापन के बाद, दर्शक गंभीर भावनाओं के साथ अपनी सीटों पर बैठे रहे, कुछ की आंखों में आंसू थे।
मलेशियाई दर्शक मा जिमिंग ने पत्रकारों से कहा कि यह फिल्म केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि एक गहरी चेतावनी भी है, जो दुनिया को इतिहास को याद रखने और शांति बनाए रखने के महत्व की याद दिलाती है।
चीनी दर्शक यू च्युनयुआन ने कहा, "हम शांति पसंद करते हैं और आशा करते हैं कि यह इतिहास हमेशा के लिए दुनिया के दिलों में अंकित रहेगा। युद्ध अत्यंत भयावह होता है। हम जीवन से प्यार करते हैं और अपनी मातृभूमि से और अधिक।"
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)