क्या फ्रैंक वॉरेल ने भारतीय कप्तान की जान बचाने के लिए अपना खून दिया?

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क्या फ्रैंक वॉरेल ने भारतीय कप्तान की जान बचाने के लिए अपना खून दिया?

सारांश

फ्रैंक वॉरेल, एक अद्वितीय क्रिकेटर, जिन्होंने अपने खेल से क्रिकेट को बदल दिया। क्या आप जानते हैं कि उन्होंने भारतीय कप्तान की जान बचाने के लिए अपना खून दिया था? जानिए उनकी प्रेरणादायक कहानी और क्रिकेट जगत में उनके योगदान के बारे में।

मुख्य बातें

फ्रैंक वॉरेल का जन्म 1 अगस्त 1924 को बारबाडोस में हुआ।
उन्होंने 51 टेस्ट मैच खेले और 9 शतक बनाए।
फ्रैंक वॉरेल वेस्टइंडीज के पहले अश्वेत कप्तान थे।
उन्होंने भारतीय कप्तान की जान बचाने के लिए अपना खून दिया।
बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन हर साल सर फ्रैंक वॉरेल दिवस मनाता है।

नई दिल्ली, 31 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम में ऐसे एक अद्वितीय क्रिकेटर का नाम जुड़ा है, जिसने न केवल इस टीम को अजेय बनाया बल्कि अपने उत्कृष्ट खेल से वैश्विक स्तर पर क्रिकेट की दिशा ही बदल दी। उनका नाम है फ्रैंक वॉरेल। उनकी शख्सियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके देश बारबाडोस ने उनके चित्र को नोट पर छापा।

फ्रैंक वॉरेल का जन्म 1 अगस्त 1924 को बारबाडोस में हुआ था। वह एक दाएं हाथ के कलात्मक बल्लेबाज थे।

1948 से 1963 के बीच उन्होंने वेस्टइंडीज के लिए 51 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 9 शतक और 22 अर्धशतकऔसत से 3,860 रन बनाए। वह एक बाएं हाथ के स्पिनर भी थे और 69 विकेट प्राप्त किए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 208 मैचों में 39 शतक और 80 अर्धशतक लगाते हुए 15,025 रन बनाते हुए 349 विकेट हासिल किए।

वॉरेल ने विभिन्न द्वीपों को जोड़कर वेस्टइंडीज टीम के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह वेस्टइंडीज के पहले अश्वेत कप्तान थे। 1960 से 1963 के बीच उन्होंने 15 टेस्ट मैचों में टीम की कप्तानी की। फ्रैंक वॉरेल दुनिया के पहले क्रिकेटर थे, जिन्होंने 500 या उससे अधिक रन की साझेदारी में दो बार भाग लिया। भारतीय ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा ने 2010 में इसकी बराबरी की।

क्रिकेट के मैदान के बाहर भी फ्रैंक वॉरेल की शख्सियत महान थी और उन्हें सामाजिक रूप से भी विश्वभर में प्रतिष्ठा और लोकप्रियता मिली।

1962 में वेस्टइंडीज दौरे के दौरान भारतीय कप्तान नारी कॉन्ट्रैक्टर के सिर पर तेज गेंदबाज चार्ली ग्रिफिथ की गेंद लगी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका ऑपरेशन हुआ। उनकी जान बचाने के लिए खून की आवश्यकता थी, वॉरेल ने तब अपना खून देकर भारतीय कप्तान की जान बचाई।

बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन हर साल 3 फरवरी को सर फ्रैंक वॉरेल दिवस के रूप में मनाता है और इस दिन मुख्यालय के साथ-साथ जिलों में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है।

बारबाडोस ने अपने डाक टिकट और करेंसी पर फ्रैंक वॉरेल की तस्वीर छापी थी। ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच फ्रैंक वॉरेल ट्रॉफी खेली जाती है।

फ्रैंक वॉरेल का निधन 42 वर्ष की आयु में 13 मार्च 1967 को किंग्सटन, जमैका में हुआ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ्रैंक वॉरेल का जन्म कब हुआ?
फ्रैंक वॉरेल का जन्म 1 अगस्त 1924 को बारबाडोस में हुआ था।
फ्रैंक वॉरेल ने कितने टेस्ट मैच खेले?
उन्होंने 51 टेस्ट मैच खेले।
फ्रैंक वॉरेल ने भारतीय कप्तान की जान कैसे बचाई?
उन्होंने अपना खून देकर भारतीय कप्तान नारी कॉन्ट्रैक्टर की जान बचाई।
फ्रैंक वॉरेल का निधन कब हुआ?
उनका निधन 13 मार्च 1967 को किंग्सटन, जमैका में हुआ।
सर फ्रैंक वॉरेल दिवस कब मनाया जाता है?
यह हर साल 3 फरवरी को मनाया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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