क्या फुलपरास विधानसभा सीट पर कर्पूरी ठाकुर की विरासत की होगी फिर से जंग?

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क्या फुलपरास विधानसभा सीट पर कर्पूरी ठाकुर की विरासत की होगी फिर से जंग?

सारांश

फुलपरास विधानसभा सीट पर चुनावी संग्राम में कौन जीतेगा? यहां की राजनीतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए, जानिए कर्पूरी ठाकुर की ऐतिहासिक भूमिका और वर्तमान राजनीतिक समीकरणों के बारे में। क्या यह सीट फिर से किसी दिग्गज नेता की सियासी क्षमता को दिखाएगी?

Key Takeaways

  • फुलपरास विधानसभा सीट की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
  • कर्पूरी ठाकुर की राजनीतिक विरासत
  • राजनीतिक दलों की सक्रियता
  • फुलपरास की जनसंख्या और मतदाता आंकड़े
  • भौगोलिक और आर्थिक विशेषताएं

पटना, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। फुलपरास केवल एक विधानसभा सीट नहीं है, बल्कि यह जननायक कर्पूरी ठाकुर जैसे महान नेता की राजनीतिक भूमि है। उनकी सामाजिक न्याय की लड़ाई आज भी इस क्षेत्र की राजनीति को मार्गदर्शन करती है। चुनावों में लाभ उठाने के लिए कई राजनीतिक दल उनके नाम का सहारा लेते रहे हैं। वर्तमान में इस सीट पर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों दलों की निगाहें हैं। विशेष रूप से जनता दल (यूनाइटेड) और राष्ट्रीय जनता दल यहां अपनी ताकत झोंक रहे हैं।

पिछले 15 वर्षों से फुलपरास विधानसभा सीट पर जदयू का प्रभुत्व बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी और बिहार की सत्ता में रह चुकी लालू प्रसाद यादव की राजद कभी इस सीट को नहीं जीत पाई। 1951 से अब तक फुलपरास विधानसभा सीट पर 18 विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिसमें 1977 का चर्चित उपचुनाव भी शामिल है, जिसमें कर्पूरी ठाकुर की विजय हुई थी।

1977 के बिहार विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला था। उस समय कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री बने, लेकिन वे न तो बिहार विधानसभा और न ही बिहार विधान परिषद के सदस्य थे। उसी वर्ष कर्पूरी ठाकुर को समस्तीपुर की जनता ने लोकसभा चुनाव में जीत दिलाकर संसद भेजा। हालांकि, मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके लिए विधायक बनना आवश्यक था। इस स्थिति में फुलपरास सीट को कर्पूरी ठाकुर के लिए खाली किया गया। यहां से जीतकर आए देवेंद्र प्रसाद यादव ने कर्पूरी ठाकुर के लिए यह कार्य किया। इस प्रकार उपचुनाव जीतकर कर्पूरी ठाकुर विधानसभा पहुंचे और मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारियों को संभाला।

इस सीट से कांग्रेस पार्टी ने 5 बार और जनता दल (यूनाइटेड) ने 4 बार चुनाव जीते हैं। संयुक्त समाजवादी पार्टी और जनता पार्टी ने तीन-तीन बार जीत हासिल की, जबकि समाजवादी पार्टी ने दो बार विजय प्राप्त की। एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि अब तक हुए 18 चुनावों में से 13 में यादव उपनाम वाले नेता जीतकर आए हैं।

वर्तमान समय में फुलपरास की जनसंख्या और मतदाताओं की बात करें तो वर्ष 2024 की अनुमानित जनसंख्या के अनुसार, फुलपरास विधानसभा क्षेत्र की कुल जनसंख्या 5,61,998 है, जिसमें 2,90,825 पुरुष और 2,71,173 महिलाएं शामिल हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, 1 जनवरी 2024 की स्थिति में यहां कुल 3,34,289 पंजीकृत मतदाता हैं, जिनमें 1,74,359 पुरुष, 1,59,914 महिलाएं और 16 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।

भौगोलिक दृष्टि से फुलपरास एक समतल और अत्यंत उपजाऊ क्षेत्र है। इसके बीच से बिहार की सबसे उग्र नदियों में से एक भुतही-बलान बहती है। यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। फुलपरास उन क्षेत्रों में से एक है, जहां शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है। सरकारी सेवाओं की पहुंच सीमित है, और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी है।

इस क्षेत्र का रणनीतिक महत्व यह है कि फुलपरास, जिला मुख्यालय मधुबनी से लगभग 40 किमी, लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र झंझारपुर से लगभग 30 किमी और उत्तर बिहार के शहरी केंद्र दरभंगा से करीब 65 किमी की दूरी पर स्थित है। राज्य की राजधानी पटना यहां से करीब 180 किमी दूर है।

2008 में हुए परिसीमन के अनुसार, यह क्षेत्र घोघरडीहा, फुलपरास और मधेपुर सीडी ब्लॉकों के अंतर्गत आने वाले कई पंचायतों को शामिल करता है। घोघरडीहा के अंतर्गत पिरोजगढ़ पंचायत पड़ती है। फुलपरास ब्लॉक में महिंदवार, धरमडीहा, गोढ़ियारी, महथौर खुर्द, छात्र बरही, फुलपरास, रामनगर ग्राम पंचायतें आती हैं। इसके अलावा, मधेपुर ब्लॉक में सुंदर बिराजित, मटरास, तरडीहा, महिशाम, मधेपुर पूर्व, मधेपुर पश्चिम, नवादा, करहारा, दारा, दोलख, महपतिया, बसीपट्टी, गढ़गांव, भकराईन, बाथ, बकवा, भरगावां, बरशाम, भेजा और रोहुआ संग्राम ग्राम पंचायतें शामिल हैं।

Point of View

यह स्पष्ट है कि कर्पूरी ठाकुर की विरासत आज भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण है। राजनीतिक दलों की सक्रियता इस बात का संकेत है कि यहाँ की राजनीति में बदलाव की संभावनाएं हैं। यह चुनाव न केवल स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित है, बल्कि यह एक ऐतिहासिक विरासत को भी सामने लाता है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

फुलपरास विधानसभा सीट पर कब से चुनाव हो रहे हैं?
फुलपरास विधानसभा सीट पर 1951 से चुनाव हो रहे हैं, जिसमें अब तक 18 चुनाव हो चुके हैं।
कर्पूरी ठाकुर का इस सीट पर क्या महत्व है?
कर्पूरी ठाकुर इस क्षेत्र के एक प्रसिद्ध नेता हैं, जिन्होंने सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ी और इस सीट पर उनकी विरासत आज भी महत्वपूर्ण है।
फुलपरास की जनसंख्या और मतदाता संख्या क्या है?
2024 की अनुमानित जनसंख्या के अनुसार, फुलपरास की जनसंख्या 5,61,998 है, जिसमें 3,34,289 पंजीकृत मतदाता हैं।
फुलपरास की विशेषताएं क्या हैं?
फुलपरास एक उपजाऊ क्षेत्र है जिसमें कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है और यहां की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
फुलपरास विधानसभा सीट का भौगोलिक महत्व क्या है?
फुलपरास जिला मुख्यालय मधुबनी से लगभग 40 किमी, झंझारपुर से 30 किमी और दरभंगा से 65 किमी दूर है।