क्या गांवों की वास्तविक जरूरतों पर आधारित योजना है ‘विकसित भारत-जी राम जी’?
सारांश
Key Takeaways
- गांवों की जरूरतों के अनुसार योजनाओं का प्रावधान
- काम के दिन 125 तक बढ़ाए गए
- भ्रष्टाचार रोकने के लिए नई तकनीक का उपयोग
- महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि
- जलवायु प्रभाव का ध्यान रखा जाएगा
रांची, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी विकास मंत्री और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि ‘विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025’ गांवों की वास्तविक आवश्यकता पर आधारित योजना है।
उन्होंने कहा कि गांवों के संतुलित विकास से ही ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प पूरा किया जा सकेगा। इस मुद्दे पर प्रदेश स्तरीय कार्यशाला को मुख्य अतिथि के नाते भी संबोधित किया गया।
मंत्री ने कहा कि कमजोर प्रशासनिक व्यवस्था, भ्रष्टाचार और दीर्घकालिक दृष्टि के अभाव में मनरेगा का प्रभाव समय के साथ कमजोर हो गया है। मांग आधारित व्यवस्था के कारण कई बार ऐसी योजनाएं स्वीकृत करनी पड़ती थीं, जिनकी वास्तविक आवश्यकता नहीं होती थी, जिससे सरकारी धन और श्रम का बर्बादी होती थी।
उन्होंने कहा कि नए अधिनियम में इस कमी को दूर करते हुए गांवों की जरूरत के अनुसार योजनाओं को मंजूरी देने का प्रावधान किया गया है। अब ग्रामीण कार्यों की योजना विकसित ग्राम पंचायत योजना के तहत बनाई जाएगी, जिसे ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर समेकित किया जाएगा। वार्षिक रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। साथ ही मजदूरी का समय पर भुगतान और रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान किया गया है।
मंत्री ने कहा कि योजनाओं को चार प्रमुख श्रेणियों जल सुरक्षा एवं प्रबंधन, कोर ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से जुड़ी संरचनाएं और जलवायु प्रभाव को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा, जिससे समन्वित विकास को गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने कांग्रेस शासन की तुलना में मनरेगा पर अधिक खर्च किया, महिलाओं की भागीदारी 56.74 प्रतिशत तक बढ़ाई और सक्रिय श्रमिकों की संख्या 76 लाख से बढ़कर 12.11 करोड़ हुई। लेकिन डिजिटल निगरानी के अभाव में भ्रष्टाचार जारी रहा।
मनोहरलाल ने बताया कि नए अधिनियम में एआई आधारित निगरानी, जीपीएस ट्रैकिंग, साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण, केंद्र-राज्य संचालन समितियां और पंचायत स्तर की निगरानी जैसे प्रावधान किए गए हैं। साथ ही राज्यों की भागीदारी को 60:40 अनुपात में बढ़ाया गया है ताकि उनकी जिम्मेदारी सुनिश्चित हो सके।
इससे पहले भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यशाला की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने की। उन्होंने कहा कि गांधी के आदर्शों पर चलकर ही रामराज्य और विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है, जिसे मोदी सरकार साकार कर रही है।
कार्यकारी अध्यक्ष सांसद आदित्य साहू ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को भ्रष्टाचार से परहेज नहीं है और वह अधिनियम के विरोध में केवल राजनीतिक नाटक कर रही है।
कार्यशाला को क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र त्रिपाठी और प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने भी संबोधित किया। इसी विषय पर 15, 16 और 17 जनवरी को सभी जिलों में कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।