क्या आम आदमी पार्टी का आरोप सही है, क्या सरकार एमसीडी को ठप करने की योजना बना रही है?
सारांश
Key Takeaways
- सियासी टकराव तेज हो गया है।
- मुख्यमंत्री का बजट देने से इनकार गंभीर है।
- पार्षदों की भूमिका प्रभावित हो रही है।
- आम आदमी पार्टी विरोध कर रही है।
- यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की स्थिरता से संबंधित है।
नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में बजट को लेकर राजनीतिक टकराव और भी बढ़ गया है। आम आदमी पार्टी ने यह आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर एमसीडी को ठप करने की योजना बना रही है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा पार्षदों को 25 लाख रुपए से अधिक का बजट देने से साफ इनकार करना इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
दिल्ली नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने सोमवार को कहा कि नववर्ष के अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने आवास पर भाजपा पार्षदों के लिए लंच आयोजित किया था। इसी दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अब पार्षदों को 25 लाख रुपए से अधिक का बजट नहीं मिलेगा। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ने यह भी सलाह दी कि पार्षद अपने-अपने विधायकों के संपर्क में रहें और यह सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्र में काम हो रहा है या नहीं।
अंकुश नारंग ने कहा कि यह बयान न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है, बल्कि इससे एमसीडी के कार्यों पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब क्षेत्र की जनता सबसे पहले पार्षद के पास अपनी समस्याएं लेकर आती है, तो बिना पर्याप्त बजट के पार्षद जनता के काम कैसे कर पाएंगे।
उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के इस रुख से भाजपा के कई पार्षद भी अंदरखाने से निराश हैं, क्योंकि सीमित बजट में विकास कार्य कर पाना लगभग असंभव है। आप नेता ने कहा कि भाजपा पहले दावा करती रही है कि दिल्ली और एमसीडी दोनों जगह उसकी सरकार होने से 'चार इंजन' की रफ्तार से विकास होगा, लेकिन अब हालात ये हैं कि पार्षदों को आवश्यक संसाधन तक नहीं दिए जा रहे।
उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान पार्षदों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर कई विकास कार्य हुए थे, जबकि मौजूदा व्यवस्था में भाजपा पार्षद खुद सदन और स्टैंडिंग कमेटी की बैठकों में आक्रोश व्यक्त करते नजर आ रहे हैं। अंकुश नारंग ने चेतावनी दी कि मुख्यमंत्री का यह कहना कि पार्षदों को अतिरिक्त बजट नहीं मिलेगा, यह एमसीडी को कमजोर करने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी इस नीति का कड़ा विरोध करती है और इसके 101 पार्षद जनता के प्रति जवाबदेह हैं। पार्टी ने ऐलान किया कि वह पार्षदों और दिल्ली की जनता के अधिकारों के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी और दिल्ली सरकार पर दबाव बनाकर पार्षदों को उनका हक दिलाने का काम करेगी।