तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन की संभावनाएँ, केरल में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच टकराव
सारांश
Key Takeaways
- तमिलनाडु में चुनाव 23 अप्रैल को होंगे।
- केरल में मतदान 9 अप्रैल को होगा।
- मतगणना 4 मई को होगी।
- एआईएडीएमके को सत्ता परिवर्तन की संभावना है।
- एलडीएफ और यूडीएफ के बीच कांटे की टक्कर है।
नई दिल्ली, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चुनाव आयोग ने रविवार को तमिलनाडु और केरल के विधानसभा चुनावों के लिए तारीखों की घोषणा की है। दोनों राज्यों में मतदान एक ही चरण में होगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि केरल में मतदान 9 अप्रैल और तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। चुनाव आयोग ने इस संबंध में सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा के साथ ही राष्ट्र प्रेस-मैटराइज द्वारा एक ओपिनियन पोल प्रस्तुत किया गया है, जिसमें यह जानने की कोशिश की गई है कि तमिलनाडु और केरल में किसकी सरकार बनने की संभावना है।
दक्षिणी राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियों का प्रभुत्व है, लेकिन नए दावेदार उनकी स्थिति को चुनौती देते हुए नजर आ रहे हैं। अभिनेता से राजनेता बने विजय के नेतृत्व वाली टीवीके पार्टी मतदाताओं के एक बड़े हिस्से को अपनी ओर आकर्षित कर रही है, वहीं केरल में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए दोहरे अंकों में वोट प्राप्त करने की उम्मीद कर रहा है, हालांकि इसका चुनाव परिणाम पर कोई खास असर नहीं पड़ने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस-मैटराइज के ओपिनियन पोल में तमिलनाडु में 'मिशन भाजपा' को बड़ा लाभ मिलने का संकेत मिला है। इस पोल के अनुसार, दक्षिणी राज्य में सत्ता परिवर्तन की संभावना जताई गई है। इस बार ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) गठबंधन की सरकार बनने की संभावना है, जिसमें भाजपा भी एक महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में शामिल है, जबकि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) गठबंधन को सत्ता से बाहर होने की उम्मीद जताई गई है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल है।
राष्ट्र प्रेस-मैटराइज के ओपिनियन पोल के अनुसार, यदि तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों की बात करें तो एआईएडीएमके गठबंधन को 114 से 127 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके गठबंधन को 104 से 114 सीटें मिल सकती हैं। विजय की नई राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) अपने पहले चुनाव में 6 से 12 सीटें प्राप्त कर सकती है, जबकि अन्य दलों को 1 से 6 सीटें मिलने का अनुमान है।
गठबंधनों के अनुसार वोट शेयरिंग की बात करें तो एआईएडीएमके को 39 से 40 प्रतिशत, डीएमके को 37 से 38 प्रतिशत और टीवीके को 14 से 15 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना है। अन्य दलों को 10 से 12 प्रतिशत मत मिल सकते हैं।
पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों में एआईएडीएमके की बढ़त डीएमके पर स्थिर रही है। डीएमके के लिए चेन्नई क्षेत्र उसका गढ़ बना हुआ है, जहां वह अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी से 7-8 प्रतिशत अधिक वोट शेयर हासिल कर रही है और इस क्षेत्र की 37 सीटों में से सबसे बड़ा हिस्सा अपने नाम कर रही है।
केरल में दो प्रमुख गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के बीच कांटे की टक्कर हो रही है। हालांकि, लेफ्ट के नेतृत्व वाले गठबंधन का पलड़ा कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन पर भारी पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस-मैटराइज सर्वे के मुताबिक, एलडीएफ का प्रदर्शन बेहतर रहने का अनुमान है, क्योंकि यूडीएफ उसकी बढ़त को चुनौती नहीं दे रहा है, जिससे मौजूदा स्थिति बनी रहने की संभावना है। एलडीएफ को 42-43 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान है, जिससे उसे 61-71 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, यूडीएफ को 41-42 प्रतिशत वोट शेयर मिलने की उम्मीद है, जिससे उसकी सीटों की संख्या 58-69 के बीच रह सकती है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) राज्य में एक मजबूत ताकत के रूप में उभर रहा है, लेकिन इतनी मजबूत स्थिति में नहीं है कि सरकार बनाने में भूमिका निभा सके। ओपिनियन पोल के अनुसार, एनडीए दक्षिणी राज्य में अपनी गहरी पैठ बना रहा है और उसे करीब 12-13 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान है, लेकिन सीटें केवल 2 ही मिल सकती हैं। 140 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 71 सीटें है, और सत्ताधारी गठबंधन पूरी तरह से मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है।