केरल विधानसभा चुनाव: वाम दल की सुशासन पर निर्भरता, यूडीएफ की वापसी की उम्मीद, भाजपा की संभावनाएं

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केरल विधानसभा चुनाव: वाम दल की सुशासन पर निर्भरता, यूडीएफ की वापसी की उम्मीद, भाजपा की संभावनाएं

सारांश

केरल विधानसभा चुनाव में एलडीएफ को सत्ता बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यूडीएफ अपनी वापसी की कोशिश कर रहा है और भाजपा एनडीए के साथ बड़ी सफलता की उम्मीद कर रही है। जानिए इस त्रिकोणीय मुकाबले का हाल।

मुख्य बातें

केरल विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को हैं।
एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन तीसरी बार चुनाव में खड़े हैं।
यूडीएफ अपनी वापसी की कोशिश कर रहा है।
भाजपा ने अपनी स्थिति में सुधार लाने की कोशिश की है।

तिरुवनंतपुरम, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केरल विधानसभा चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। राज्य में त्रिकोणीय मुकाबला है, जिसमें एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए आमने-सामने हैं। माकपा के नेतृत्व वाला एलडीएफ सत्ता को बरकरार रखने की चुनौती का सामना कर रहा है, जबकि कांग्रेस नीत यूडीएफ अपनी वापसी की कोशिश में है और भाजपा नीत एनडीए को बड़ी सफलता की उम्मीद है।

140 सदस्यीय केरल विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है। एलडीएफ (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट), यूडीएफ (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) और एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस), तीनों मोर्चे अपने उम्मीदवारों के नाम तय करने और अंतिम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की होड़ में लगे हैं।

सत्ताधारी एलडीएफ ने सबसे पहले अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की, इसके बाद भाजपा और यूडीएफ ने भी अपनी-अपनी सूचियां जारी कीं। हाल के मुकाबले में जो स्थिति देखने को मिली है, वह आंकड़ों पर आधारित होने के साथ-साथ नैरेटिव (कथा) गढ़ने पर भी निर्भर करती है।

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन लगातार तीसरी बार सत्ता में आने का प्रयास कर रहे हैं और इसके लिए वे पिछले दस वर्षों के अपने शासन के कामकाज पर पूरी तरह से निर्भर हैं। हालांकि, इस चुनाव प्रचार में माकपा के भीतर से उठ रही असंतोष की लहर ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। जी. सुधाकरन और पी.के. ससी जैसे 5 वरिष्ठ नेता अब विरोधी खेमे में शामिल हो गए हैं।

विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने इस मुकाबले को और भी रोचक बना दिया है। उन्होंने यह प्रण लिया है कि यदि यूडीएफ 140 सदस्यों वाली विधानसभा में 100 सीटों का आंकड़ा पार करने में असफल रहती है, तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे।

यूडीएफ को 2024 के लोकसभा चुनावों में अपने शानदार प्रदर्शन, उपचुनावों में लगातार जीत और दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में बेहतरीन प्रदर्शन से काफी आत्मविश्वास मिला है।

वहीं, राजीव चंद्रशेखर के नेतृत्व में भाजपा ने 2021 में अपनी एकमात्र सीट (नेमोम) गंवाने के बाद अब वापसी करने की कोशिश की है। चंद्रशेखर, जिन्होंने 2024 के संसदीय चुनावों में शशि थरूर से हार का सामना किया था, ने कहा है कि हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में वोट शेयर में मामूली गिरावट के बावजूद अगली विधानसभा में एनडीए की उपस्थिति जरूर होगी।

पिछली विधानसभा में लेफ्ट फ्रंट का दबदबा था और उसके पास 99 सीटें थीं, जबकि यूडीएफ के पास केवल 41 सीटें थीं। हालांकि, विपक्ष का मानना है कि बदलती राजनीतिक हवा और स्थानीय स्तर पर सत्ता विरोधी लहर के चलते कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर जीत-हार का अंतर काफी कम हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि यूडीएफ अपनी प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है। भाजपा भी अपनी स्थिति में सुधार लाने की कोशिश कर रही है। यह चुनाव राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल विधानसभा चुनाव कब हो रहे हैं?
केरल विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को होंगे।
एलडीएफ के मुख्य प्रतिद्वंद्वी कौन हैं?
एलडीएफ के मुख्य प्रतिद्वंद्वी यूडीएफ और एनडीए हैं।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन कितनी बार चुनाव में खड़े हो रहे हैं?
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन लगातार तीसरी बार चुनाव में खड़े हो रहे हैं।
यूडीएफ की स्थिति क्या है?
यूडीएफ ने 2024 के लोकसभा चुनावों में आत्मविश्वास प्राप्त किया है।
भाजपा की स्थिति केरल में क्या है?
भाजपा ने 2021 में अपनी एकमात्र सीट गंवाई थी और अब वापसी की कोशिश कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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