केरल चुनाव की तैयारी: एलडीएफ उम्मीदवारों की सूची तैयार, यूडीएफ में चर्चा जारी

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केरल चुनाव की तैयारी: एलडीएफ उम्मीदवारों की सूची तैयार, यूडीएफ में चर्चा जारी

सारांश

तिरुवनंतपुरम में केरल चुनाव की तारीख की घोषणा हो चुकी है। एलडीएफ ने अपने उम्मीदवारों की सूची लगभग तैयार कर ली है, जबकि यूडीएफ में अभी भी सीटों पर बातचीत चल रही है, जो चुनाव की दिशा तय कर सकती है।

Key Takeaways

  • केरल चुनाव की तारीख 9 अप्रैल है।
  • एलडीएफ ने उम्मीदवारों की सूची लगभग तय कर ली है।
  • यूडीएफ में सीटों पर बातचीत जारी है।
  • पिछले चुनाव में एलडीएफ को 99 सीटें मिली थीं।
  • भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए को सीट बंटवारे में समस्या नहीं है।

तिरुवनंतपुरम, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चुनाव आयोग ने रविवार को केरल चुनाव की तारीख की घोषणा की है। केरल में 9 अप्रैल को मतदान किए जाएंगे। राज्य में तीन प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों की तैयारियों में बड़ा अंतर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में उम्मीदवारों और सीटों के बंटवारे में काफी आगे बढ़ चुका है। 10 दलों वाले एलडीएफ में सीपीआई (एम) और सीपीआई ने आंतरिक बैठकों के बाद लगभग अपने उम्मीदवार तय कर लिए हैं और सूची पर सहमति बन गई है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार छोटे सहयोगी दलों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है, जिससे जल्द ही उम्मीदवारों की लगभग अंतिम सूची जारी की जा सकती है।

एलडीएफ इस चुनाव में मजबूत स्थिति के साथ उतर रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में 140 सदस्यीय विधानसभा में एलडीएफ को 99 सीटें मिली थीं, जबकि विपक्षी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को 41 सीटें मिली थीं।

वहीं, भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) 2016 में जीती अपनी एकमात्र सीट भी बरकरार नहीं रख सका था।

पिछले चुनाव का वोट प्रतिशत भी एलडीएफ की बढ़त दिखाता है। एलडीएफ को 45.43 प्रतिशत, यूडीएफ को 39.47 प्रतिशत और भाजपा-एनडीए को 12.41 प्रतिशत वोट मिले थे।

दूसरी ओर, आठ दलों वाले यूडीएफ में अभी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। गठबंधन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की सूची तय नहीं की है।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और केरल कांग्रेस (जोसेफ) जैसे सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे पर भी बातचीत जारी है।

आमतौर पर कांग्रेस करीब 90 सीटों पर चुनाव लड़ती है और बाकी सीटें सहयोगी दलों में बांटी जाती हैं। इन सहयोगियों में आईयूएमएल, पीजे जोसेफ और अनुप जैकब के नेतृत्व वाली केरल कांग्रेस की इकाइयां, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, कम्युनिस्ट मार्क्सिस्ट पार्टी, रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी और विधायक मणि सी. कप्पेन की पार्टी शामिल हैं।

इतिहास बताता है कि यूडीएफ में सीट बंटवारा हमेशा सबसे संवेदनशील मुद्दा रहा है और इस बार भी स्थिति कुछ अलग नहीं दिख रही है।

वहीं, भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को सीट बंटवारे में ज्यादा परेशानी होने की संभावना नहीं है। गठबंधन में प्रमुख होने के कारण अधिकांश सीटों पर फैसला भाजपा ही करेगी। इसके साथ भारत धर्म जन सेना (बीडीजेएस) और उद्योगपति से नेता बने साबू एम. जैकब की पार्टी ट्वेंटी20 जैसे सहयोगी भी हैं, जिनका एर्नाकुलम जिले की कुछ सीटों पर प्रभाव है।

अब जब चुनावी मुकाबला औपचारिक रूप से शुरू होने वाला है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कौन सा गठबंधन अपने अंदरूनी मसलों को कितनी जल्दी सुलझाता है, क्योंकि इससे चुनाव प्रचार की शुरुआती गति तय हो सकती है।

Point of View

केरल चुनाव की राजनीतिक स्थिति में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच काफी महत्वपूर्ण अंतर दिखाई दे रहा है। एलडीएफ ने अपनी उम्मीदवार सूची को लगभग अंतिम रूप दे दिया है, जबकि यूडीएफ में अभी भी कई मुद्दे चर्चा का विषय हैं। यह स्थिति आगामी चुनाव में वोटर के मनोविज्ञान को प्रभावित कर सकती है।
NationPress
15/03/2026

Frequently Asked Questions

केरल चुनाव की तारीख कब है?
केरल चुनाव की तारीख 9 अप्रैल निर्धारित की गई है।
एलडीएफ और यूडीएफ में क्या अंतर है?
एलडीएफ ने अपने उम्मीदवारों की सूची लगभग तैयार कर ली है, जबकि यूडीएफ में अभी भी सीटों पर बातचीत जारी है।
पिछले चुनाव में एलडीएफ को कितनी सीटें मिली थीं?
पिछले चुनाव में एलडीएफ को 99 सीटें मिली थीं।
यूडीएफ में कौन-कौन से दल शामिल हैं?
यूडीएफ में कई दल शामिल हैं, जैसे कि कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और केरल कांग्रेस (जोसेफ)।
भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए की स्थिति क्या है?
भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए सीट बंटवारे में ज्यादा परेशानी नहीं महसूस कर रहा है।
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