क्या राहुल गांधी में साहस होता तो वे चुनाव में मिली हार को स्वीकार करते?

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क्या राहुल गांधी में साहस होता तो वे चुनाव में मिली हार को स्वीकार करते?

सारांश

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नेतृत्व पर तीखा हमला किया, आरोप लगाते हुए कि उन्होंने चुनावी हार को स्वीकार नहीं किया। क्या राहुल गांधी में साहस होता कि वे अपनी हार का सामना करते?

Key Takeaways

  • गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर तीखा हमला किया।
  • राहुल गांधी की हार को स्वीकार न करने का आरोप।
  • लोकतंत्र की मर्यादाओं का उल्लंघन।
  • सुप्रिया सुले ने ईवीएम में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया।
  • राजनीतिक बयानबाज़ी में सच्चाई की कमी।

नई दिल्ली, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली में कांग्रेस की रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उठाए गए विवादास्पद नारों पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में लगातार घिनौने और बेहद आपत्तिजनक नारे गूंज रहे हैं।

गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि यह सब एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, लेकिन अब देश की जनता सब कुछ समझ चुकी है। अब समय आ गया है जब जनता खुद कह रही है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस तरह की भाषा और नारेबाजी लोकतंत्र की मर्यादाओं के खिलाफ है और इससे कांग्रेस की सोच और संस्कार उजागर होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक बयान देकर कांग्रेस अपनी राजनीतिक हताशा को प्रदर्शित कर रही है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के उस बयान पर भी गिरिराज सिंह ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'वोट चोरी' कांग्रेस की समस्या है। इस पर गिरिराज सिंह ने कहा कि राहुल गांधी का अपना अलग ही नाटकीय अंदाज है। राहुल गांधी अपनी हार छिपाने के लिए कहानियाँ गढ़ते हैं और झूठे आश्वासन देते हैं। चुनाव में हार मिलने पर वे अपनी असफलता स्वीकार करने के बजाय दूसरों पर आरोप लगाने लगते हैं।

गिरिराज सिंह ने कहा कि अगर राहुल गांधी में जरा भी साहस होता तो वे अपनी हार को खुले तौर पर स्वीकार करते। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उमर अब्दुल्ला और एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले भी यही कह रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस या विपक्षी दल महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना या कर्नाटक जैसे राज्यों में जीत हासिल करते हैं, तब वे कभी यह नहीं कहते कि वोट चोरी हुए, लेकिन जब हार होती है, तो तुरंत ईवीएम में गड़बड़ी और वोट चोरी का आरोप लगाने लगते हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक ड्रामा करार दिया।

एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले द्वारा विपक्ष के ईवीएम में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किए जाने पर भी गिरिराज सिंह ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर कभी वोट चोरी हुई भी है तो वह कांग्रेस के शासनकाल में हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के दौर में तो बैलेट बॉक्स तक छीने जाते थे। इसी कारण सुप्रिया सुले अब सच्चाई बोल रही हैं और सही बात कह रही हैं।

Point of View

यह स्पष्ट है कि राजनीतिक बयानबाज़ी अक्सर सच्चाई से परे होती है। गिरिराज सिंह के आरोपों में एक निश्चित सच्चाई है, लेकिन सभी पक्षों को अपने-अपने दृष्टिकोण को समझने और स्वीकार करने की आवश्यकता है।
NationPress
13/02/2026

Frequently Asked Questions

गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस के नेतृत्व पर अपमानजनक नारे लगाने और चुनावी हार स्वीकार न करने का आरोप लगाया।
क्या राहुल गांधी अपनी हार स्वीकार करेंगे?
गिरिराज सिंह के अनुसार, यदि राहुल गांधी में साहस होता, तो वे अपनी हार को स्वीकार करते।
कांग्रेस के नारेबाजी के बारे में क्या कहा गया?
गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस की नारेबाजी लोकतंत्र की मर्यादाओं के खिलाफ है।
उमर अब्दुल्ला के बयान पर गिरिराज सिंह ने क्या कहा?
गिरिराज सिंह ने कहा कि उमर अब्दुल्ला का 'वोट चोरी' बयान कांग्रेस की समस्या को उजागर करता है।
सुप्रिया सुले के आरोपों पर गिरिराज सिंह का क्या कहना है?
गिरिराज सिंह ने कहा कि वोट चोरी केवल कांग्रेस के शासनकाल में हुई।
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