गोड्डा में अवैध गन फैक्ट्री का भंडाफोड़, आरटीआई एक्टिविस्ट पवन तुरी मुख्य आरोपी — हथियार लेकर फरार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के गोड्डा जिले में बिहार एसटीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने 16 सितंबर को महगामा थाना क्षेत्र के घाट बलिया गाँव में छापेमारी कर एक अवैध मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। समाजसेवा और आरटीआई एक्टिविज्म की आड़ में कथित तौर पर यह हथियार निर्माण का कारोबार चलाया जा रहा था। इस मामले का मुख्य आरोपी पवन कुमार तुरी छापेमारी की भनक लगते ही कुछ हथियार लेकर कार से फरार हो गया।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस टीम ने करीब चार घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान पवन के घर में बने एक गुप्त कमरे का पता लगाया। पुलिस के अनुसार, उस कमरे तक पहुँचने के लिए जेसीबी मशीन से दीवार तोड़नी पड़ी। इसके बाद वहाँ से एक लोडेड राइफल, जिंदा कारतूस, पिस्टल, कई अर्धनिर्मित पिस्टल, कट्टा बनाने के लिए तैयार लोहे के फ्रेम, फरमा, लेथ मशीन और ड्रिल मशीन सहित अन्य सामान बरामद किया गया।
बरामद सामान की मात्रा इतनी अधिक थी कि उसे थाने तक ले जाने के लिए ट्रैक्टर और पिकअप वाहन का उपयोग करना पड़ा। यह पूरी कार्रवाई महगामा एसडीपीओ वरुण रजक के नेतृत्व में छह थानों की पुलिस ने मिलकर अंजाम दी।
आरोपी की चालाक आड़
स्थानीय लोगों के अनुसार, पवन कुमार तुरी गाँव में समाजसेवी और आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता था। ग्रामीणों का कहना है कि उसके घर में अक्सर तेज आवाज में फिल्मी गाने बजाए जाते थे — आरोप है कि इसी शोर की आड़ में मशीनों से हथियार तैयार किए जाते थे। इसके अलावा, पवन घर में लगी मशीन को पत्तल बनाने की मशीन बताता था और सामाजिक आयोजनों में पत्तल बाँटकर अपनी छवि बनाए रखता था।
फरार आरोपी और पुलिस कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, छापेमारी की भनक लगते ही पवन तुरी कार से कुछ हथियार लेकर फरार हो गया। पुलिस ने उसके परिजनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। फरार आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है।
खुफिया तंत्र पर सवाल
यह ऐसे समय में सामने आया है जब घाट बलिया के आसपास महगामा, ललमटिया और बोआरीजोर जैसे कई थाने मौजूद हैं। इसके बावजूद कथित तौर पर लंबे समय से यह अवैध हथियार निर्माण का कारोबार चलता रहा — जिससे पुलिस की स्थानीय खुफिया व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि ऐसे मामले जहाँ सामाजिक कार्यकर्ता की आड़ में आपराधिक गतिविधि चलती रही हो, स्थानीय प्रशासन की निगरानी प्रणाली की खामियों को उजागर करते हैं।
आगे की जाँच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस फैक्ट्री से बने हथियार किन तक पहुँचाए जाते थे और इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।