16 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गोड्डा में अवैध गन फैक्ट्री का भंडाफोड़, आरटीआई एक्टिविस्ट पवन तुरी मुख्य आरोपी — हथियार लेकर फरार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गोड्डा में अवैध गन फैक्ट्री का भंडाफोड़, आरटीआई एक्टिविस्ट पवन तुरी मुख्य आरोपी — हथियार लेकर फरार

सारांश

समाजसेवी और आरटीआई कार्यकर्ता की आड़ — और तेज फिल्मी गानों के शोर में — झारखंड के गोड्डा में चल रही थी अवैध गन फैक्ट्री। बिहार एसटीएफ व झारखंड पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में राइफल, पिस्टल और हथियार बनाने की मशीनें बरामद। मुख्य आरोपी पवन तुरी हथियार लेकर फरार।

मुख्य बातें

बिहार एसटीएफ और झारखंड पुलिस ने 16 सितंबर को गोड्डा के घाट बलिया गाँव में अवैध मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया।
मुख्य आरोपी पवन कुमार तुरी — गाँव में आरटीआई कार्यकर्ता और समाजसेवी के रूप में जाना जाता था — कार से हथियार लेकर फरार हो गया।
गुप्त कमरे तक पहुँचने के लिए जेसीबी से दीवार तोड़ी गई; लोडेड राइफल , पिस्टल , अर्धनिर्मित हथियार , लेथ व ड्रिल मशीन बरामद।
कार्रवाई महगामा एसडीपीओ वरुण रजक के नेतृत्व में छह थानों की पुलिस ने की; बरामदगी के लिए ट्रैक्टर और पिकअप वाहन की ज़रूरत पड़ी।
आरोपी के परिजनों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी; संभावित ठिकानों पर छापेमारी चल रही है।
कई थानों के बावजूद लंबे समय तक फैक्ट्री चलती रही — पुलिस की स्थानीय खुफिया व्यवस्था पर सवाल।

झारखंड के गोड्डा जिले में बिहार एसटीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने 16 सितंबर को महगामा थाना क्षेत्र के घाट बलिया गाँव में छापेमारी कर एक अवैध मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। समाजसेवा और आरटीआई एक्टिविज्म की आड़ में कथित तौर पर यह हथियार निर्माण का कारोबार चलाया जा रहा था। इस मामले का मुख्य आरोपी पवन कुमार तुरी छापेमारी की भनक लगते ही कुछ हथियार लेकर कार से फरार हो गया।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस टीम ने करीब चार घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान पवन के घर में बने एक गुप्त कमरे का पता लगाया। पुलिस के अनुसार, उस कमरे तक पहुँचने के लिए जेसीबी मशीन से दीवार तोड़नी पड़ी। इसके बाद वहाँ से एक लोडेड राइफल, जिंदा कारतूस, पिस्टल, कई अर्धनिर्मित पिस्टल, कट्टा बनाने के लिए तैयार लोहे के फ्रेम, फरमा, लेथ मशीन और ड्रिल मशीन सहित अन्य सामान बरामद किया गया।

बरामद सामान की मात्रा इतनी अधिक थी कि उसे थाने तक ले जाने के लिए ट्रैक्टर और पिकअप वाहन का उपयोग करना पड़ा। यह पूरी कार्रवाई महगामा एसडीपीओ वरुण रजक के नेतृत्व में छह थानों की पुलिस ने मिलकर अंजाम दी।

आरोपी की चालाक आड़

स्थानीय लोगों के अनुसार, पवन कुमार तुरी गाँव में समाजसेवी और आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता था। ग्रामीणों का कहना है कि उसके घर में अक्सर तेज आवाज में फिल्मी गाने बजाए जाते थे — आरोप है कि इसी शोर की आड़ में मशीनों से हथियार तैयार किए जाते थे। इसके अलावा, पवन घर में लगी मशीन को पत्तल बनाने की मशीन बताता था और सामाजिक आयोजनों में पत्तल बाँटकर अपनी छवि बनाए रखता था।

फरार आरोपी और पुलिस कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, छापेमारी की भनक लगते ही पवन तुरी कार से कुछ हथियार लेकर फरार हो गया। पुलिस ने उसके परिजनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। फरार आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है।

खुफिया तंत्र पर सवाल

यह ऐसे समय में सामने आया है जब घाट बलिया के आसपास महगामा, ललमटिया और बोआरीजोर जैसे कई थाने मौजूद हैं। इसके बावजूद कथित तौर पर लंबे समय से यह अवैध हथियार निर्माण का कारोबार चलता रहा — जिससे पुलिस की स्थानीय खुफिया व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि ऐसे मामले जहाँ सामाजिक कार्यकर्ता की आड़ में आपराधिक गतिविधि चलती रही हो, स्थानीय प्रशासन की निगरानी प्रणाली की खामियों को उजागर करते हैं।

आगे की जाँच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस फैक्ट्री से बने हथियार किन तक पहुँचाए जाते थे और इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और फिर उसी आड़ में वर्षों तक हथियार बनाना — यह बताता है कि सामाजिक प्रतिष्ठा किस तरह निगरानी की आँखों पर पर्दा डाल सकती है। गौरतलब है कि घाट बलिया के आसपास तीन थाने होने के बावजूद यह कारोबार चलता रहा, जो ग्रामीण झारखंड में खुफिया नेटवर्क की संरचनात्मक कमज़ोरी को उजागर करता है। असली सवाल यह है कि इन हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला कहाँ तक फैली थी — और जाँच उस नेटवर्क तक पहुँचती है या नहीं।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोड्डा में अवैध गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ कैसे हुआ?
बिहार एसटीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने 16 सितंबर को महगामा थाना क्षेत्र के घाट बलिया गाँव में छापेमारी की। करीब चार घंटे की कार्रवाई में जेसीबी से दीवार तोड़कर गुप्त कमरे का पता लगाया गया, जहाँ से हथियार, कारतूस और मशीनें बरामद हुईं।
मुख्य आरोपी पवन कुमार तुरी कौन है?
पवन कुमार तुरी घाट बलिया गाँव में आरटीआई कार्यकर्ता और समाजसेवी के रूप में जाना जाता था। वह सामाजिक आयोजनों में पत्तल बाँटता था और घर में लगी मशीनों को पत्तल बनाने की मशीन बताता था। छापेमारी की भनक लगते ही वह कुछ हथियार लेकर कार से फरार हो गया।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने एक लोडेड राइफल, जिंदा कारतूस, पिस्टल, कई अर्धनिर्मित पिस्टल, कट्टा बनाने के लिए तैयार लोहे के फ्रेम, फरमा, लेथ मशीन और ड्रिल मशीन सहित अन्य सामान बरामद किया। बरामद सामान इतना अधिक था कि उसे ले जाने के लिए ट्रैक्टर और पिकअप वाहन की ज़रूरत पड़ी।
आरोपी ने हथियार निर्माण को छुपाने के लिए क्या तरीका अपनाया?
ग्रामीणों के अनुसार, पवन के घर में अक्सर तेज आवाज में फिल्मी गाने बजाए जाते थे — कथित तौर पर इसी शोर की आड़ में मशीनों से हथियार तैयार किए जाते थे। इसके अलावा वह घर में लगी मशीनों को पत्तल बनाने की मशीन बताता था।
इस मामले में पुलिस की खुफिया व्यवस्था पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
घाट बलिया के आसपास महगामा, ललमटिया और बोआरीजोर जैसे कई थाने होने के बावजूद कथित तौर पर लंबे समय से यह अवैध हथियार निर्माण का कारोबार चलता रहा। इससे पुलिस की स्थानीय खुफिया व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 13 मिनट पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले