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गोरखपुर का बुढ़िया माई मंदिर: एक रहस्यमय स्थल जो मौत की चेतावनी देता है

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गोरखपुर का बुढ़िया माई मंदिर: एक रहस्यमय स्थल जो मौत की चेतावनी देता है

सारांश

गोरखपुर का बुढ़िया माई मंदिर, जहाँ आस्था और चमत्कार का अद्भुत संगम है। यह मंदिर अकाल मृत्यु से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। जानें इसकी पौराणिक कथा और भक्तों की आस्था।

मुख्य बातें

बुढ़िया माई मंदिर गोरखपुर का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।
यह मंदिर अकाल मृत्यु से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है।
स्थानीय पौराणिक कथा के अनुसार, बुढ़िया ने बारातियों को चेतावनी दी थी।
नवरात्रि के समय यहाँ विशेष अनुष्ठान होते हैं।
मंदिर तक पहुँचने के लिए भक्तों को एक बड़ी नदी पार करनी होती है।

नई दिल्ली, ६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। १९ मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है और शक्तिपीठों और सिद्धपीठों में नव दुर्गा की पूजा के लिए तैयारियां जोरों पर हैं।

भारत में माँ भगवती के कई चमत्कारिक सिद्धपीठ हैं, जो भक्तों को माता रानी की चौखट तक खींच लाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है जो मृत्यु से पहले की चेतावनी देता है? उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक ऐसा ही मंदिर है, जो भविष्यवाणी करने की क्षमता रखता है।

गोरखपुर के कुसम्ही के जंगल में स्थित बुढ़िया माई मंदिर जिला गोरखपुर से १२ किलोमीटर दूर है। जंगल के बीच होने के बावजूद, नवरात्रि के समय भक्तों की भीड़ यहाँ दर्शन के लिए उमड़ती है। ऐसा माना जाता है कि यह सिद्धपीठ अकाल मृत्यु को टालने की शक्ति रखता है, जिसका प्रमाण यहाँ की पौराणिक कथा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर के निकट एक पुल था जहाँ एक बारात आई। वहाँ सफेद साड़ी में एक बुढ़िया ने बारातियों को पुल पर न जाने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने उसकी बात नहीं मानी। जैसे ही वे लोग पुल पर पहुँचे, पुल टूट गया और सभी बारातियों की मृत्यु हो गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भविष्यवाणी के बाद बुढ़िया कहाँ गई, यह किसी को नहीं पता। लेकिन जंगल में रहने वाले आदिवासी लोगों ने एक बूढ़ी महिला को देखा, जो एक पल में ओझल हो जाती थी। उसी पुल के पास आज भी बुढ़िया माई का मंदिर स्थित है।

यह मंदिर ६०० साल पुराना है और यहाँ की आस्था से प्रदेश के मंत्री और मुख्यमंत्री भी प्रभावित हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार यहाँ दर्शन के लिए आ चुके हैं। नवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष अनुष्ठान होते हैं, और भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए जंगल की यात्रा पैदल करते हैं। मंदिर तक पहुँचने के लिए एक बड़ी नदी को पार करना होता है, जिसके लिए नाव का प्रबंध रहता है। भक्त शहर के मोहद्दीपुर चौराहे से ऑटो या जीप लेकर कुसम्ही जंगल तक पहुँच सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इसे अकाल मृत्यु से मुक्ति का प्रतीक भी माना जाता है। इसकी पौराणिक कथा लोगों को आकर्षित करती है और यहाँ की विशेष अनुष्ठान भक्तों के लिए अद्वितीय अनुभव प्रदान करते हैं।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बुढ़िया माई मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में स्थित है, जो जिला गोरखपुर से १२ किलोमीटर दूर है।
बुढ़िया माई मंदिर की पौराणिक कथा क्या है?
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, एक बारात के पुल पर जाने से पहले एक बुढ़िया ने चेतावनी दी थी, लेकिन बारातियों ने उसकी बात नहीं मानी और पुल टूट गया, जिससे सभी बारातियों की मृत्यु हो गई।
नवरात्रि के समय मंदिर में क्या विशेष अनुष्ठान होते हैं?
नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष अनुष्ठान आयोजित होते हैं और भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए जंगल की यात्रा करते हैं।
मंदिर तक पहुँचने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
भक्त मोहद्दीपुर चौराहे से ऑटो या जीप लेकर कुसम्ही जंगल पहुँच सकते हैं।
क्या बुढ़िया माई मंदिर की कोई ऐतिहासिकता है?
यह मंदिर लगभग ६०० साल पुराना है और यहाँ की आस्था से कई मंत्री और मुख्यमंत्री भी प्रभावित हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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