राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने तकनीक और मानव मूल्य संतुलन पर जोर दिया
सारांश
Key Takeaways
- राज्यपाल ने तकनीक और मानव मूल्यों के संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया।
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नैतिकता का विकास महत्वपूर्ण है।
- विद्यार्थियों को समाज के कल्याण का ध्यान रखना चाहिए।
- आत्मनिर्भरता के लिए तकनीकी विकास आवश्यक है।
- शिक्षण संस्थानों में आधुनिक सुविधाओं का विकास होना चाहिए।
लखनऊ, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शनिवार को प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज परिसर में नई शैक्षिक सुविधाओं का उद्घाटन किया। इस मौके पर राज्यपाल ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और नैतिक मूल्यों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक और मानवीय मूल्यों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
राज्यपाल ने कहा कि छात्रों के लिए स्थापित की गई शैक्षणिक सुविधाएं उत्कृष्ट और उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए। प्रयोगशालाओं के प्रभावी उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इनसे छात्र अधिक व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने मूल्यांकन प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि शिक्षा अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुखी हो सके। अभिभावकों से भी अपील की कि वे नियमित रूप से विश्वविद्यालय आकर देखें कि उनके बच्चे क्या सीख रहे हैं तथा किस दिशा में बढ़ रहे हैं। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में उन्होंने वर्तमान विश्व स्थितियों और संघर्षों का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर जोर दिया, और कहा कि किसी भी राष्ट्र का विकास उसकी दूरदर्शिता पर निर्भर करता है।
राज्यपाल ने कहा कि छात्रों को केवल अपने परिवार की अपेक्षाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों के सपनों का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने लक्ष्य निर्धारण करना चाहिए। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे यह सोचें कि वे राष्ट्र निर्माण में क्या योगदान दे सकते हैं, क्योंकि हर युवा की सकारात्मक सोच और प्रयास ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि आज का भारत अवसरों से भरा हुआ है, जहां हर छात्र के पास अपने सपनों को साकार करने के लिए अनंत संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नवाचार, शोध और सृजनात्मक कार्यों के माध्यम से देश के विकास में योगदान देना चाहिए। आज का भारत एक आकांक्षी भारत है, जहां हर व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक, नवाचार और डिजिटल क्रांति का युग है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों ने जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है। तकनीक के साथ-साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने छात्रों से अपेक्षा की कि वे केवल तकनीकी रूप से दक्ष न बनें, बल्कि नैतिक रूप से भी सशक्त बनें और अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए करें। 21वीं सदी का यह दशक चुनौतियों और संभावनाओं का संगम है, जहां वैश्विक परिस्थितियों के बीच आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। भारत ने कठिन परिस्थितियों को अवसरों में बदलने की क्षमता दिखाई है और तकनीकी क्षेत्र में तेजी से प्रगति करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
उन्होंने देश में सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हो रहे विकास का उल्लेख करते हुए इसे भारत के तकनीकी आत्मविश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्थापित हो रहे सेमीकंडक्टर संयंत्र देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं। जनभवन, उत्तर प्रदेश की पहल पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय और सीमेंस कंपनी के बीच हुए समझौते के तहत सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन और सिमुलेशन जैसे क्षेत्रों में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की जा रही है। इसके अंतर्गत लगभग 200 शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, जो आगे चलकर हजारों विद्यार्थियों को उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इस तरह की पहलें युवाओं को वैश्विक स्तर की तकनीकी दक्षता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आज का भारत केवल परिवर्तन का साक्षी नहीं, बल्कि परिवर्तन का नेतृत्वकर्ता बन चुका है। ऊर्जा, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना रहा है।
उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे समय के साथ चलने के साथ-साथ समय को दिशा देने का संकल्प लें, ताकि वे स्वयं के साथ-साथ राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थित देवालय का भी दर्शन किया। इसके पश्चात उन्होंने फार्मेसी विभाग, विज्ञान विभाग और कृषि विभाग के नवनिर्मित प्रयोगशालाओं, स्मार्ट कक्षाओं और अन्य शैक्षिक अवसंरचनाओं का निरीक्षण किया।
उन्होंने इन सुविधाओं की गुणवत्ता, आधुनिकता और उपयोगिता की प्रशंसा करते हुए इसे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। साथ ही, विश्वविद्यालय के लोकार्पित मुख्य पूर्वी द्वार का भी भ्रमण किया।
कुलपति डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नव-स्थापित प्रयोगशालाओं में विद्यार्थी केवल शोध कार्य ही नहीं करेंगे, बल्कि तर्क, विश्लेषण और नवाचार की क्षमता भी विकसित करेंगे। यहां से निकलने वाले शोध समाज और राष्ट्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।