गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने गांधीनगर में बेचे मानसिक रोगियों के बनाए 35,000 दीये, ₹1.90 लाख की बिक्री
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 6 नवंबर 2026 को गांधीनगर के सेक्टर 21 के मुख्य बाज़ार में स्वयं दुकानदार की भूमिका निभाते हुए अहमदाबाद के सरकारी मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल में उपचाराधीन मरीजों द्वारा हाथ से बनाए गए 35,000 दीयों की बिक्री में सहयोग किया। ये दीये ₹1.90 लाख में बिके और इस पहल का उद्देश्य मानसिक बीमारी से उबर रहे लोगों के आर्थिक एवं सामाजिक पुनर्वास को गति देना था।
पहल की पृष्ठभूमि
यह आयोजन गुरुवार, 5 नवंबर को संघवी की अहमदाबाद के सरकारी मानसिक अस्पताल की यात्रा के बाद आकार लिया। उस दौरान उपमुख्यमंत्री ने मरीजों से सीधे बातचीत की, उनके हाथ से बने दीये खरीदे और उनके साथ दीप प्रज्वलित कर उनके परिश्रम की सराहना की। इसी यात्रा से प्रेरित होकर गांधीनगर में बड़े पैमाने पर बिक्री अभियान की रूपरेखा बनाई गई।
संघवी नई जीएसआरटीसी बस से गांधीनगर के सेक्टर 21 बाज़ार पहुँचे, जिससे इस पहल को एक प्रतीकात्मक आयाम भी मिला।
मरीजों के लिए क्या मायने रखती है यह पहल
ये मिट्टी के दीये अहमदाबाद मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल के व्यावसायिक चिकित्सा कार्यक्रम के तहत तैयार किए गए हैं। अस्पताल में पहले से ही स्क्रीन प्रिंटिंग, बुनाई, सिलाई, फाइल निर्माण, राखी बनाना, अगरबत्ती निर्माण और लकड़ी के सामान बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इन गतिविधियों का उद्देश्य रोगियों को व्यावहारिक कौशल देना है ताकि वे अस्पताल से बाहर भी आजीविका कमा सकें।
संघवी ने इस अवसर पर कहा, 'अस्पताल में रहते हुए आपने जिस प्रेम और परिश्रम से ये दीये तैयार किए हैं, वे महज मिट्टी के दीये नहीं हैं; वे आपकी खुशी और आत्मनिर्भरता के प्रतीक हैं।'
व्यापक सामाजिक संदर्भ
यह पहल 'नशा मुक्त गुजरात, स्वस्थ युवा, सशक्त परिवार' अभियान के संकल्प से जुड़ी है। गौरतलब है कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज में कलंक की भावना अक्सर मरीजों को रोज़गार के अवसरों से वंचित रखती है। ऐसे में किसी वरिष्ठ जनप्रतिनिधि द्वारा सीधे बाज़ार में उतरकर इन उत्पादों को बेचना इस धारणा को चुनौती देने का प्रतीकात्मक प्रयास है।
उपस्थित जनप्रतिनिधि
इस अवसर पर परिवहन राज्य मंत्री प्रवीण माली, गांधीनगर नगर निगम के मेयर रूपसिंह ठाकोर, विधायक अल्पेश ठाकोर एवं रीता पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिल पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और नागरिक मौजूद रहे।
आगे की राह
व्यावसायिक पुनर्वास कार्यक्रमों को सार्वजनिक समर्थन और बाज़ार तक पहुँच मिलने से इन मरीजों की आत्मनिर्भरता की दिशा में यह एक ठोस कदम माना जा रहा है। उम्मीद है कि इस तरह की पहल भविष्य में अन्य ज़िलों में भी दोहराई जाएगी।