क्या गुजरात की मानभट्ट लोककला का सम्मान धार्मिक लाल चुन्नीलाल पांड्या को पद्मश्री मिला?
सारांश
Key Takeaways
- धार्मिक लाल चुन्नीलाल पांड्या को पद्मश्री पुरस्कार मिला है।
- उन्होंने 73 वर्षों तक कहानी कहने की कला को जीवित रखा है।
- उनका समर्पण उनके पिता और गुजराती कला के प्रति है।
- इस कला को स्कूल के सिलेबस में शामिल करने की आवश्यकता है।
- उन्हें 94 वर्ष की आयु में यह सम्मान प्राप्त हुआ है।
वडोदरा, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। रविवार को गणतंत्र दिवस की संध्या पर केंद्र सरकार ने पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की। इस सूची में गुजरात की 'मानभट्ट' लोककला के कलाकार धार्मिक लाल चुन्नीलाल पांड्या का नाम शामिल है।
चुन्नीलाल पांड्या ने कहा कि यह सम्मान मेरे पिता और गुजराती कला को मिला है। उन्होंने कहा कि मैंने प्रयत्न किया और भगवान ने सफलता दी। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि मैंने किसी तरह का प्रशिक्षण नहीं लिया है, मेरे गुरु पिताजी हैं। १८ साल की उम्र में उनके साथ जाता था।
वडोदरा के रहने वाले मशहूर मानभट्ट और कथाकार चुन्नीलाल पांड्या, जिन्होंने कहानी कहने की प्राचीन लोक संगीत परंपरा को जीवित रखा है, ने पिछले ७३ वर्षों से कहानी कहने की कला को जीवन समर्पित कर दिया है। वे वडोदरा समेत देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। संगीत के क्षेत्र में पद्मश्री पाने वाले चुन्नीलाल पांड्या ने वडोदरा जिले का मान बढ़ाया है।
९४ साल के संगीतकार चुन्नीलाल पांड्या मैट्रिक तक पहुंचे ही थे कि उनके पिता का देहांत हो गया। उन पर घर चलाने की जिम्मेदारी आई तो उन्होंने कहानी सुनाने को गुजारे का जरिया मान लिया और कहानी सुनानी शुरू कर दी। स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने क्लासिकल म्यूजिक का भी ज्ञान हासिल किया। उन्होंने आवाज, सुर और लय के त्रिगुण संगम से कहानी सुनाने की कला को बहुत ही सहजता से विकसित किया। शुरुआती ५-६ सालों में ही उन्होंने वडोदरा शहर के अलग-अलग इलाकों में कला का प्रदर्शन शुरू कर दिया।
उन्होंने कहा, ''मुझे जो सम्मान मिला है, वह गुरु प्रेमानंद, पिता चुन्नीलाल और गुजराती कला को मिला सम्मान है।''
इस गायब हो रही कला को स्कूल के सिलेबस में शामिल करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि भाषा, संस्कृति और संगीत आपस में जुड़े हुए हैं। युवा पीढ़ी और बच्चों को यह कला सिखाई जानी चाहिए। जब समय और समाज बदल रहा है, तो सरकार और समाज पारंपरिक कला को गायब होने से रोक सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई लिस्ट में ५ पद्म विभूषण, १३ पद्म भूषण और ११९ पद्म श्री पुरस्कार पाने वालों के नाम हैं। यह प्रतिष्ठित सम्मान राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है। यह पुरस्कार उन नागरिकों को दिया जाता है, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में विशेष और अद्वितीय योगदान दिया हो। कला, खेल, साहित्य, विज्ञान, शिक्षा, चिकित्सा, समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है।