गुजरात के सुरेंद्रनगर में 'शुद्धिकरण' के नाम पर महिला से गैंगरेप, दो महिलाओं समेत नौ गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के सुरेंद्रनगर ज़िले में एक विवाहित महिला को पेड़ से बाँधकर कथित 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान के नाम पर सामूहिक बलात्कार किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने 7 अक्टूबर 2026 को इस मामले में दो महिलाओं सहित नौ आरोपियों को मारपीट, अवैध बंधक और सामूहिक बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया। पूरी घटना को मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिसके बाद यह मामला अधिकारियों की नज़र में आया।
घटनाक्रम: कैसे हुई यह वारदात
पुलिस शिकायत के अनुसार, पीड़िता अपने पति को छोड़कर किसी अन्य पुरुष के साथ रह रही थी। उसके पति और रिश्तेदारों ने उसका पता लगाकर उसे एक घर में लाया, जहाँ उसे ताले और जंजीरों से बंधक बनाकर रखा गया। महिला वहाँ से भाग निकलने में सफल रही, परंतु आरोपियों ने उसे दोबारा पकड़ लिया और रस्सियों से पेड़ से बाँध दिया।
इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता और उसके साथ रहने वाले पुरुष को 'शुद्धिकरण' के नाम पर शारीरिक प्रताड़ना और अपमान का शिकार बनाया। पुलिस के अनुसार, कई व्यक्तियों ने महिला के साथ यौन उत्पीड़न किया और इस पूरी घटना को रिकॉर्ड किया गया।
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की कार्रवाई
सुरेंद्रनगर एसपी प्रेमसुख देलू ने बताया कि महिला ने शुरुआत में पुलिस से संपर्क नहीं किया था। यह मामला तब सामने आया जब घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए और समुदाय के सदस्यों से जानकारी मिली। इसके बाद कई पुलिस टीमों को तैनात कर पीड़िता की तलाश की गई।
पीड़िता का पता लगाने के बाद उसे पुलिस स्टेशन लाया गया, जहाँ उसका बयान दर्ज किया गया और उसे सुरक्षा प्रदान की गई। पुलिस इंस्पेक्टर आरएम संगदा ने कहा कि वीडियो रिकॉर्ड करने और सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों की भूमिका की भी अलग से जाँच की जा रही है।
गिरफ्तारी और जाँच की स्थिति
पुलिस ने अपराध में भागीदारी और सहयोग के आरोप में दो महिलाओं सहित कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जाँचकर्ता गिरफ्तार व्यक्तियों की पृष्ठभूमि, उनकी-उनकी भूमिका और वीडियो के प्रसार की परिस्थितियों की पड़ताल कर रहे हैं। पुलिस ने कहा कि आगे की जाँच जारी है।
गौरतलब है कि 'शुद्धिकरण' के नाम पर महिलाओं के साथ हिंसा और उत्पीड़न के मामले देश के विभिन्न हिस्सों से समय-समय पर सामने आते रहे हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब महिला सुरक्षा और सामाजिक न्याय को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ है।
आम जनता और सामाजिक संदर्भ
यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि 'सामाजिक न्याय' की आड़ में होने वाली लैंगिक हिंसा का प्रतिनिधि उदाहरण है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे मामलों में समुदाय का मूकदर्शक बने रहना और वीडियो का वायरल होना, दोनों ही चिंताजनक हैं। घटना के वायरल वीडियो ने इस अपराध को उजागर करने में भूमिका निभाई, लेकिन साथ ही पीड़िता की गोपनीयता को भी गंभीर खतरे में डाला।
इस मामले में आगे न्यायिक कार्यवाही और आरोप-पत्र दायर होने की संभावना है, जिस पर सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं की नज़र होगी।