दावणगेरे में 41 वर्षीय महिला से सामूहिक दुष्कर्म, लिफ्ट का झांसा देकर 10 आरोपी गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दावणगेरे के चन्नागिरी तालुक में 3 जून को एक 41 वर्षीय महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है, जिसमें 10 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता घरेलू विवाद के बाद रात में अकेले अपने मायके जा रही थी, तभी आरोपियों ने उसे मोटरसाइकिल से घर छोड़ने का प्रस्ताव दिया और कथित तौर पर उसके साथ यह जघन्य अपराध किया।
घटनाक्रम: कैसे हुई वारदात
पुलिस के अनुसार, 3 जून की रात पीड़िता का अपने पति से झगड़ा हुआ और वह अकेले मायके की ओर निकल पड़ी। रास्ते में कुछ युवकों ने उसे रोककर दोस्ती का हाथ बढ़ाया और मोटरसाइकिल से घर छोड़ने की पेशकश की। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर कोल्ड ड्रिंक में शराब मिलाकर महिला को पिलाई, और जब वह बेहोश हो गई तो उसे एक सुनसान स्थान पर ले जाया गया, जहाँ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
वीडियो से धमकी, फिर शिकायत
आरोप है कि आरोपियों ने घटना को अपने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया और पीड़िता को धमकी दी कि यदि उसने खुलासा किया तो वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया जाएगा। इस धमकी के कारण महिला पहले चुप रही। हालाँकि, वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पीड़िता मंगलवार की रात करीब 12:30 बजे बसवापटना पुलिस स्टेशन पहुँची और शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तेज़ी से कदम उठाए। सुबह 4:30 बजे तक सभी 10 आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया और कुछ ही घंटों में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में इष्ट्री नागराज, अर्जुन, बसवंथा, कुंदुरु मारुति, हेग्गा मारुति, मनु, जोगी सुनील, प्रदीप, मधु और कानून से संघर्षरत एक नाबालिग शामिल हैं।
न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी
चन्नागिरी तालुक अस्पताल में मेडिकल जाँच के बाद सभी आरोपियों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने बताया कि मामले की आगे की जाँच जारी है।
गौरतलब संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कर्नाटक सहित देश भर में महिला सुरक्षा को लेकर बहस तेज़ है। रात में अकेले यात्रा कर रही महिलाओं को निशाना बनाने, नशीला पदार्थ मिलाने और वीडियो से ब्लैकमेल करने जैसे तत्व इस मामले को विशेष रूप से गंभीर बनाते हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे मामलों में पीड़िता की चुप्पी तोड़ने के लिए सामाजिक समर्थन तंत्र को और मज़बूत किए जाने की आवश्यकता है।