BJP प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान का हमला: राहुल गांधी को टिप्पणी का नैतिक अधिकार नहीं, कांग्रेस में लोकतंत्र नहीं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने 4 अक्टूबर 2026 को पटना में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। पासवान ने कहा कि जो पार्टी अपने भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुनिश्चित नहीं कर पाती, उसे देश के लोकतंत्र पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। यह बयान कांग्रेस द्वारा हाल ही में कई राज्यों में चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद आया है।
कांग्रेस पर आंतरिक लोकतंत्र का आरोप
गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि यदि कोई पार्टी मजबूत संगठन और अपनी क्षमता के दम पर चुनाव लड़ना चाहती है, तो चुनाव के ठीक पहले नेतृत्व में बदलाव जैसी स्थिति नहीं बननी चाहिए। उन्होंने इसे कांग्रेस की संगठनात्मक कमज़ोरी का प्रमाण बताया।
उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश का उदाहरण दिया, जहाँ कथित तौर पर अजय राय को हटाकर एक नए चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पासवान ने गोवा का भी ज़िक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले अपनी आंतरिक तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए।
इंडी गठबंधन पर निशाना
NSUI और IYC के नेताओं की हिरासत से जुड़े आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पासवान ने इंडी गठबंधन को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हुई इंडी गठबंधन की बैठक के एजेंडे में यह भी तय होना चाहिए था कि किसे BJP की 'बी-टीम' कहा जाए।
पासवान ने कहा कि अलग-अलग समय पर मायावती, असदुद्दीन ओवैसी और अब सीजेपी (CJP) को BJP की 'बी-टीम' बताया जा रहा है। उनके अनुसार, इन आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है और न ही इनका राजनीतिक अर्थ बनता है।
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर विपक्ष को घेरा
BJP प्रवक्ता ने चुनाव आयोग (ECI) की निष्पक्षता पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर संकट पैदा करने की कोशिश उचित नहीं है। यदि किसी को कोई शिकायत है, तो वह न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता अपना सकता है।
पासवान ने इस प्रवृत्ति को 'ग्रामर ऑफ अनार्की' की संज्ञा दी और कहा कि चुनाव हारने पर संस्थाओं पर सवाल उठाना और जीतने पर सब कुछ सही मान लेना — यह रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि BJP का यह हमला आगामी राज्य चुनावों की पृष्ठभूमि में कांग्रेस को संगठनात्मक रूप से कमज़ोर दिखाने की रणनीतिक कोशिश है। गौरतलब है कि चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति या बदलाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन सत्तापक्ष इसे आंतरिक अस्थिरता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।
आगे देखें तो यह बयानबाज़ी कांग्रेस और BJP के बीच तेज़ होते वाकयुद्ध की एक कड़ी है, जो आने वाले हफ्तों में और तीव्र होने की संभावना है।