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विनोद तावड़े का राहुल गांधी पर पलटवार: '90 बार सरकारें गिराने वालों को लोकतंत्र पर बोलने का अधिकार नहीं'

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विनोद तावड़े का राहुल गांधी पर पलटवार: '90 बार सरकारें गिराने वालों को लोकतंत्र पर बोलने का अधिकार नहीं'

सारांश

BJP महासचिव विनोद तावड़े ने राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर लगाए आरोपों का एक्स पर जवाब दिया — '90 बार सरकारें गिराने वालों को लोकतंत्र पर बोलने का अधिकार नहीं।' यह बहस TMC के चुनाव चिन्ह विवाद के बीच तेज हुई है और शिवसेना-NCP के पैटर्न को लेकर दोनों दल आमने-सामने हैं।

मुख्य बातें

BJP महासचिव विनोद तावड़े ने 18 सितंबर 2026 को एक्स पर राहुल गांधी के चुनाव आयोग संबंधी आरोपों का जवाब दिया।
तावड़े ने कहा — कांग्रेस ने 90 बार चुनी हुई सरकारें बर्खास्त कीं, उत्तर प्रदेश में 6 बार राष्ट्रपति शासन लगाया या समर्थन वापस लिया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि BJP और चुनाव आयोग मिलकर पार्टियाँ तोड़ते हैं और चुनाव चिन्ह छीनते हैं — शिवसेना, NCP और अब TMC के साथ एक ही पैटर्न।
यह विवाद पश्चिम बंगाल में TMC के चुनाव चिन्ह को लेकर जारी राजनीतिक बहस की पृष्ठभूमि में उभरा है।
राहुल गांधी ने कहा — यह लड़ाई केवल ममता बनर्जी की नहीं, हर उस मतदाता की है जो स्वतंत्र चुनाव चाहता है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने 18 सितंबर 2026 को कांग्रेस सांसद एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों का तीखा जवाब देते हुए कहा कि जिन्होंने अपने शासनकाल में 90 बार चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त किया, उन्हें संवैधानिक संस्थाओं पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। यह विवाद पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनाव चिन्ह को लेकर चल रही राजनीतिक बहस की पृष्ठभूमि में उभरा है।

तावड़े का एक्स पर पलटवार

तावड़े ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, '90 बार चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त कर लोकतंत्र की हत्या का खिताब जिनके सिर पर हो, उन्हें संवैधानिक संस्थाओं पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।' उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश ने भी छह बार कांग्रेस द्वारा राष्ट्रपति शासन लगाने या समर्थन वापस लेने के कारण चुनी हुई सरकारों को गिरते देखा है।

यह प्रतिक्रिया उस बयान के जवाब में आई जो राहुल गांधी ने इससे पहले एक्स पर पोस्ट किया था। तावड़े का यह पलटवार BJP की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें कांग्रेस के ऐतिहासिक आचरण को उसके वर्तमान आरोपों के विरुद्ध खड़ा किया जाता है।

राहुल गांधी के मूल आरोप

इससे पहले राहुल गांधी ने एक्स पर चुनाव आयोग (ECI) और BJP पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले शिवसेना, फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ एक जैसा पैटर्न दोहराया जा रहा है।

राहुल गांधी ने लिखा, 'हर बार एक ही पैटर्न होता है। BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं, फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।' उन्होंने यह भी दावा किया कि जब पूरी की पूरी पार्टी 'चोरी' हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी आश्चर्यजनक नहीं। उनके अनुसार, 'वोट चोरी, सरकार चोरी और अब पार्टी चोरी हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं।'

चुनाव आयोग पर कांग्रेस का रुख

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है, परंतु वह उन ताकतों की सहायता कर रहा है जो जनता के फैसले को पलट देती हैं। राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई केवल ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि हर राजनीतिक दल और हर उस मतदाता की है जो स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव चाहता है।

गौरतलब है कि TMC के चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद BJP और कांग्रेस दोनों के लिए राजनीतिक अवसर बन गया है — एक पक्ष चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगा रहा है, तो दूसरा विपक्ष के इतिहास को उसके सामने रख रहा है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति

BJP और कांग्रेस के बीच चुनाव आयोग तथा दलों के चुनाव चिन्हों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का यह नया दौर ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर राजनीतिक उठापटक की चर्चाएँ तेज हैं। यह पहली बार नहीं है कि किसी विभाजित दल के चुनाव चिन्ह पर विवाद हुआ हो — शिवसेना और NCP के मामलों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया था। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की भूमिका और TMC के चुनाव चिन्ह विवाद पर राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह वर्तमान संस्थागत चिंताओं से ध्यान भटकाने का भी जोखिम उठाता है। असली सवाल यह है कि क्या चुनाव चिन्ह आवंटन के मामलों में ECI की प्रक्रिया पारदर्शी और एकसमान रही है — और इसका जवाब किसी दल के इतिहास से नहीं, बल्कि संस्था के कार्यकरण की जाँच से मिलेगा। जब तक दोनों पक्ष इतिहास की आड़ में एक-दूसरे पर हमला करते रहेंगे, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता का असली सवाल अनुत्तरित रहेगा।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विनोद तावड़े ने राहुल गांधी को क्या जवाब दिया?
BJP महासचिव विनोद तावड़े ने 18 सितंबर 2026 को एक्स पर कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में 90 बार चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त किया, इसलिए उन्हें संवैधानिक संस्थाओं पर टिप्पणी करने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में 6 बार राष्ट्रपति शासन लगाने का भी विशेष उल्लेख किया।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने एक्स पर आरोप लगाया कि BJP और चुनाव आयोग मिलकर पार्टियाँ तोड़ते हैं और फिर उनके चुनाव चिन्ह छीन लेते हैं — यही पैटर्न शिवसेना, NCP और अब TMC के साथ दोहराया गया है। उन्होंने इसे 'लोकतांत्रिक पतन' करार देते हुए कहा कि यह लड़ाई हर उस मतदाता की है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।
यह विवाद किस घटना की पृष्ठभूमि में सामने आया है?
यह विवाद पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनाव चिन्ह को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच उभरा है। इससे पहले शिवसेना और NCP के मामलों में भी चुनाव चिन्ह विवाद राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बिंदु बन चुके हैं।
चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह विवाद क्यों अहम हैं?
चुनाव चिन्ह किसी दल की पहचान और मतदाता के मन में उसकी छवि से सीधे जुड़ा होता है। जब किसी दल में विभाजन होता है तो चुनाव आयोग तय करता है कि असली दल कौन है और चिन्ह किसे मिलेगा — यह निर्णय उस दल की राजनीतिक ताकत को निर्धारित कर सकता है।
अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग का तर्क क्यों उठाया गया?
तावड़े ने कांग्रेस के उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड का हवाला दिया जिसमें केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 356 के तहत राज्य सरकारों को बर्खास्त किया था। यह तर्क कांग्रेस के 'लोकतंत्र खतरे में है' के आख्यान को उसके अपने इतिहास से काटने की BJP की सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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