18 सितंबर 2026
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टीएमसी नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज: राहुल गांधी बोले — 'वोट चोरी, सरकार चोरी, अब पार्टी चोरी'

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टीएमसी नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज: राहुल गांधी बोले — 'वोट चोरी, सरकार चोरी, अब पार्टी चोरी'

सारांश

शिवसेना, NCP के बाद अब TMC — चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज किया। राहुल गांधी ने एक्स पर इसे 'वोट चोरी, सरकार चोरी, अब पार्टी चोरी' कहकर लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताया और चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने 18 सितंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर TMC के नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज को 'लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक' बताया।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के लिए पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह फिलहाल फ्रीज कर दिया है।
अप्रैल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद 80 में से 58 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हुए।
राहुल ने कहा — 'पहले शिवसेना , फिर NCP , अब TMC — हर बार एक ही पैटर्न।' उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह 'जनादेश की रक्षा' की जगह 'जनता के फैसले को पलटने वाली ताकतों' की मदद कर रहा है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 18 सितंबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज किए जाने पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम भारतीय लोकतंत्र के गहरे पतन का प्रतीक बन गया है।

राहुल गांधी का एक्स पोस्ट — क्या कहा

राहुल गांधी ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न — भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।'

उन्होंने आगे लिखा, 'जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं। वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी। ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं।'

चुनाव आयोग पर सीधा निशाना

राहुल गांधी ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में कहा, 'चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है, मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल ममता बनर्जी की नहीं है — 'यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।'

टीएमसी में टूट — पूरा घटनाक्रम

अप्रैल 2026 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट गई। यह विवाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुनने के मुद्दे से शुरू हुआ था।

बाद में 80 में से करीब 58 विधायक — जो कि दलबदल विरोधी कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से अधिक है — ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ हो गए। दोनों गुट अब 'तृणमूल कांग्रेस' नाम और पार्टी के चुनाव चिन्ह पर दावा जता रहे हैं।

चुनाव आयोग का आदेश — क्या है मतलब

भारत निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के लिए पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को फिलहाल फ्रीज करने का आदेश जारी किया है। इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि जब तक आयोग अंतिम फैसला नहीं सुनाता, तब तक न ममता बनर्जी गुट और न ही ऋतब्रत बनर्जी गुट किसी भी चुनाव में 'टीएमसी' के नाम और उसके चुनाव चिन्ह का उपयोग कर सकेगा।

यह ऐसे समय में आया है जब देश में पार्टी विभाजन से जुड़े चुनावी विवाद लगातार बढ़ते जा रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मामलों में भी इसी तरह के चुनाव चिन्ह विवाद सामने आए थे।

आगे क्या होगा

चुनाव आयोग अब दोनों गुटों से दस्तावेज़ और साक्ष्य मंगाकर यह तय करेगा कि 'असली' तृणमूल कांग्रेस कौन-सी है। इस निर्णय का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर गहरा असर पड़ेगा, क्योंकि दोनों गुट विधानसभा में अपनी वैधानिक स्थिति और भविष्य के चुनावी अधिकार सुरक्षित करना चाहते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

NCP और अब TMC को एक ही धागे में पिरोकर वे 'संस्थागत कब्जे' का एक बड़ा राजनीतिक चित्र खींच रहे हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि TMC की टूट का तत्कालीन कारण भाजपा से कोई प्रत्यक्ष विलय नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर ही सत्ता-संघर्ष है — ऋतब्रत बनर्जी गुट अलग दिशा में है, न कि सीधे भाजपा की गोद में। मुख्यधारा की कवरेज यह अंतर प्रायः चूक जाती है। असली सवाल यह है कि जब दो-तिहाई से अधिक विधायक किसी गुट के साथ हों, तो चुनाव आयोग की 'फ्रीज' नीति किसे वास्तव में लाभ पहुँचाती है — और क्या यह नीति पारदर्शी मानदंडों पर आधारित है या विवेकाधीन।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग ने TMC का नाम और चुनाव चिन्ह क्यों फ्रीज किया?
अप्रैल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC दो गुटों में बंट गई — एक ममता बनर्जी के नेतृत्व में और दूसरा ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में। चूँकि दोनों गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा कर रहे हैं, इसलिए भारत निर्वाचन आयोग ने अंतिम फैसले तक दोनों को फ्रीज कर दिया है।
TMC में टूट कैसे हुई?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुनने के विवाद से यह दरार शुरू हुई। इसके बाद TMC के 80 में से करीब 58 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गए, जो दलबदल विरोधी कानून के लिए ज़रूरी दो-तिहाई बहुमत से अधिक है।
राहुल गांधी ने TMC चिन्ह फ्रीज मामले पर क्या कहा?
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि 'पहले शिवसेना, फिर NCP और अब TMC — हर बार एक ही पैटर्न।' उन्होंने इसे 'वोट चोरी, सरकार चोरी और पार्टी चोरी' करार देते हुए इसे लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताया।
चुनाव चिन्ह फ्रीज होने का TMC के दोनों गुटों पर क्या असर होगा?
जब तक चुनाव आयोग अंतिम फैसला नहीं सुनाता, न ममता बनर्जी गुट और न ही ऋतब्रत बनर्जी गुट किसी चुनाव में 'तृणमूल कांग्रेस' नाम या उसके चुनाव चिन्ह का उपयोग कर सकेगा। यह दोनों गुटों के लिए राजनीतिक और चुनावी दृष्टि से एक बड़ी बाधा है।
क्या पहले भी किसी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर ऐसा विवाद हुआ है?
हाँ, इससे पहले शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मामलों में भी चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर फैसला सुनाया था। उन दोनों मामलों में भी पार्टी में टूट के बाद दावेदारी का विवाद चुनाव आयोग के पास पहुँचा था।
राष्ट्र प्रेस
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