3 अगस्त 2026
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टीएमसी का चुनाव चिन्ह खतरे में: कृष्णा हेगड़े बोले — 'ऑपरेशन टाइगर की ज़रूरत नहीं'

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टीएमसी का चुनाव चिन्ह खतरे में: कृष्णा हेगड़े बोले — 'ऑपरेशन टाइगर की ज़रूरत नहीं'

सारांश

शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने दावा किया कि ममता बनर्जी की टीएमसी का चुनाव चिन्ह और नाम संकट में आ सकता है — शिवसेना व NCP के उदाहरण देते हुए। साथ ही 'ऑपरेशन टाइगर' को अनावश्यक बताया, नागपुर धर्मांतरण मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग की और DMK-कांग्रेस दरार का हवाला देकर विपक्षी एकता पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

कृष्णा हेगड़े ने दावा किया कि टीएमसी का चुनाव चिन्ह और नाम ममता बनर्जी के हाथ से जा सकता है — शिवसेना व NCP के पूर्व उदाहरणों का हवाला दिया।
महाराष्ट्र में चर्चित 'ऑपरेशन टाइगर' को हेगड़े ने अनावश्यक बताया; कहा — उद्धव गुट के अधिकांश नेता पहले ही शिंदे के साथ आ चुके हैं।
नागपुर धर्मांतरण मामले में पुलिस जाँच शुरू; हेगड़े ने फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई और कड़ी सज़ा की माँग की।
DMK के मुखपत्र 'मुरासोली' में कांग्रेस की कार्यशैली पर उठे सवालों का हवाला देते हुए हेगड़े ने विपक्षी एकता पर कांग्रेस को घेरा।
कर्नाटक मंत्री प्रियंक खड़गे की आरएसएस पर टिप्पणी को हेगड़े ने अनुचित और अनावश्यक बताया।

शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने मंगलवार, 16 जून 2026 को मुंबई में कई राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय मुद्दों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का चुनाव चिन्ह और नाम संकट में आ सकता है। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र में चर्चित 'ऑपरेशन टाइगर' को अनावश्यक बताया।

टीएमसी के चुनाव चिन्ह पर संकट के दावे

हेगड़े ने कहा कि टीएमसी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों के अलग होने की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि पार्टी के भीतर टूट और बहुमत से जुड़े दावे अदालत तक पहुँचते हैं, तो न्यायालय बहुमत के आधार पर फैसला कर सकता है। उन्होंने शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के उदाहरण सामने रखे — जहाँ एकनाथ शिंदे को शिवसेना का नाम व चिन्ह मिला और अजित पवार को NCP का — और कहा कि ममता बनर्जी के साथ भी ऐसा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

ऑपरेशन टाइगर की ज़रूरत नहीं

महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चित 'ऑपरेशन टाइगर' पर हेगड़े ने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी अभियान की आवश्यकता नहीं है। उनका दावा था कि उद्धव ठाकरे गुट के अधिकांश नेता और कार्यकर्ता पहले ही शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ आ चुके हैं और राज्य के विभिन्न हिस्सों से लगातार लोग जुड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उद्धव गुट के भीतर असंतोष गहरा है और जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेतृत्व की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा है।

आरएसएस पर प्रियंक खड़गे की टिप्पणी का जवाब

कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर की गई टिप्पणी के जवाब में हेगड़े ने कहा कि आरएसएस एक स्वयंसेवी संगठन है जो बाढ़, प्राकृतिक आपदा और हर संकट की घड़ी में आगे आकर लोगों की सेवा करता है। उन्होंने कहा कि खड़गे को शायद संगठन के कार्यों की पूरी जानकारी नहीं है और बिना आधार के विवाद खड़ा करना उचित नहीं।

नागपुर धर्मांतरण मामले पर सख्त रुख

नागपुर में एक महिला द्वारा मांस खाने, उर्दू सीखने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के लगाए गए आरोपों पर हेगड़े ने कहा कि पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। उन्होंने माँग की कि यदि जाँच में आरोप सही पाए जाएँ, तो फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई हो और दोषियों को कड़ी सज़ा दी जाए। उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र में धर्मांतरण से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए एक समिति गठित की गई थी, जिसमें कई शिकायतें दर्ज हुई हैं। उन्होंने अन्य राज्यों से भी ऐसे मामलों में कठोर कानून लागू करने की अपील की।

विपक्षी एकता पर कांग्रेस को घेरा

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के मुखपत्र 'मुरासोली' में राहुल गांधी की विपक्षी एकता की अपील पर उठाए गए सवालों का हवाला देते हुए हेगड़े ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब सहयोगी दल स्वयं कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं, तो विपक्षी गठबंधन के भविष्य को लेकर और भी चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया गठबंधन की एकजुटता पहले से ही दबाव में बताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उन मामलों में विधायकों की संख्या और अदालती प्रक्रिया निर्णायक थी, जिसका टीएमसी में अभी कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है। 'ऑपरेशन टाइगर' को अनावश्यक बताना एक रणनीतिक संदेश है — यह दर्शाता है कि शिंदे गुट बिना किसी औपचारिक अभियान के भी उद्धव गुट को कमज़ोर मान रहा है। DMK-कांग्रेस दरार का हवाला देकर हेगड़े ने इंडिया गठबंधन की आंतरिक दरारों को राष्ट्रीय विमर्श में लाने की कोशिश की है — जो सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए स्वाभाविक रूप से अनुकूल कथा है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कृष्णा हेगड़े ने टीएमसी के चुनाव चिन्ह को लेकर क्या दावा किया?
हेगड़े ने दावा किया कि टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष और जनप्रतिनिधियों के अलग होने की खबरों के मद्देनज़र पार्टी का चुनाव चिन्ह और नाम ममता बनर्जी के हाथ से जा सकता है। उन्होंने शिवसेना (एकनाथ शिंदे) और NCP (अजित पवार) के उदाहरण देते हुए कहा कि अदालत बहुमत के आधार पर फैसला कर सकती है।
'ऑपरेशन टाइगर' क्या है और हेगड़े ने इसे क्यों अनावश्यक बताया?
'ऑपरेशन टाइगर' महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चित एक कथित अभियान है जिसके तहत उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं को शिंदे गुट में लाने की बात कही जा रही थी। हेगड़े ने कहा कि ऐसे किसी अभियान की ज़रूरत नहीं क्योंकि उद्धव गुट के अधिकांश नेता और कार्यकर्ता पहले ही स्वेच्छा से शिंदे की शिवसेना के साथ आ चुके हैं।
नागपुर धर्मांतरण मामले में अब तक क्या हुआ है?
नागपुर में एक महिला ने मांस खाने, उर्दू सीखने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं, जिस पर पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। हेगड़े ने माँग की कि यदि आरोप सही साबित हों तो फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई हो और दोषियों को कड़ी सज़ा दी जाए।
DMK और कांग्रेस के बीच दरार पर हेगड़े ने क्या कहा?
हेगड़े ने DMK के मुखपत्र 'मुरासोली' में राहुल गांधी की विपक्षी एकता की अपील पर उठाए गए सवालों का हवाला देते हुए कहा कि जब सहयोगी दल स्वयं कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं, तो विपक्षी गठबंधन का भविष्य और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उनके अनुसार कांग्रेस ने सहयोगी दलों के साथ विश्वास कायम नहीं रखा।
आरएसएस पर प्रियंक खड़गे की टिप्पणी पर हेगड़े की क्या प्रतिक्रिया थी?
हेगड़े ने कर्नाटक मंत्री प्रियंक खड़गे की आरएसएस पर की गई टिप्पणी को अनुचित बताया और कहा कि आरएसएस बाढ़ व प्राकृतिक आपदाओं में लोगों की सेवा करने वाला स्वयंसेवी संगठन है। उन्होंने कहा कि खड़गे को शायद संगठन के कार्यों की पूरी जानकारी नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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