क्या हरिद्वार में कुंभ 2027 से पहले हरकी पैड़ी पर सख्ती बढ़ाई जा रही है?
Key Takeaways
- हरकी पैड़ी पर सुरक्षा बढ़ाई जा रही है।
- गैर-हिंदुओं की पहचान के लिए चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।
- तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि यह आस्था से जुड़ा मामला है।
- कुंभ 2027 से पहले घाट क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखना जरूरी है।
- स्थानीय समुदाय के विचार विभाजित हैं।
हरिद्वार, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। हरकी पैड़ी का माहौल वर्तमान में कुछ अलग सा नजर आ रहा है। कुंभ 2027 से पूर्व यहां सुरक्षा और सख्ती दोनों ही बढ़ती हुई दिख रही हैं। हाल ही में गैर-हिंदुओं की पहचान के लिए शुरू किए गए चेकिंग अभियान का मामला सामने आया है।
इस अभियान का संचालन तीर्थ पुरोहितों ने स्वयं किया है, जिसमें घाटों के पास स्थित दुकानदारों और ठेलों पर काम करने वालों से आधार कार्ड दिखाने के लिए कहा जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह पहल श्री गंगा सभा द्वारा की गई है। उनका मानना है कि हरकी पैड़ी और इसके आसपास का क्षेत्र अत्यंत पवित्र है, इसलिए यहां होने वाली गतिविधियों पर नजर रखना आवश्यक है। खासकर कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन से पहले यह सुनिश्चित करना चाहती है कि घाट क्षेत्र में केवल हिंदू ही व्यापार या अन्य गतिविधियों में सम्मिलित हों।
चेकिंग के दौरान दुकानदारों और ठेला लगाने वालों से उनकी पहचान पूछी जा रही है। आधार कार्ड के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वे किस धर्म से हैं। यदि कोई गैर-हिंदू पाया जाता है, तो उसे घाट क्षेत्र में व्यापार करने से रोका जा रहा है। हालांकि, इस अभियान को लेकर कुछ लोग असहज महसूस कर रहे हैं, लेकिन तीर्थ पुरोहित इसे आस्था से जुड़ा मामला मानते हैं।
साधु-संतों और पुरोहितों का कहना है कि हाल के समय में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां कुछ लोग श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते पाए गए। इसके कारण विवाद उत्पन्न हुआ और माहौल खराब हुआ। उनका आरोप है कि पवित्र स्थल पर ऐसे तत्वों की उपस्थिति से धार्मिक मर्यादाएं प्रभावित होती हैं।
संत समाज का कहना है कि कुंभ कोई साधारण आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा सबसे बड़ा पर्व है। हरिद्वार को देवभूमि का द्वार माना जाता है। ऐसे में घाटों और कुंभ क्षेत्र की पवित्रता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। इसी कारण गैर-हिंदुओं के प्रवेश और व्यापार पर रोक लगाना आवश्यक है।