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मंगोलिया की पहली ऑयल रिफाइनरी में भारत की अहम भूमिका, राष्ट्रपति खुरेलसुख ने PM मोदी को कहा धन्यवाद

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मंगोलिया की पहली ऑयल रिफाइनरी में भारत की अहम भूमिका, राष्ट्रपति खुरेलसुख ने PM मोदी को कहा धन्यवाद

सारांश

मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख ने डोर्नोगोबी प्रांत में भारतीय सहायता से बन रही देश की पहली ऑयल रिफाइनरी का दौरा किया और PM मोदी को धन्यवाद दिया। 2015 की भारत की 1 अरब डॉलर की LoC से शुरू हुई यह परियोजना मंगोलिया को ऊर्जा आत्मनिर्भरता दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

मुख्य बातें

मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख ने 13 अक्टूबर 2026 को डोर्नोगोबी प्रांत स्थित ऑयल रिफाइनरी निर्माण स्थल का दौरा किया।
खुरेलसुख ने निर्बाध सहायता के लिए PM नरेंद्र मोदी का आभार जताया और भारत-मंगोलिया को 'आध्यात्मिक भाई-बहन' बताया।
रिफाइनरी की क्षमता 1.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) होगी, जो 2015 में स्वीकृत 1 अरब अमेरिकी डॉलर की भारतीय LoC से वित्तपोषित है।
दौरे में मंगोलिया के तीन कैबिनेट मंत्री और भारतीय राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सुरवे उपस्थित रहे।
इससे पहले अगस्त 2026 में मंगोलिया के PM एन.
उचरल ने भी इसी स्थल का दौरा कर भारत का आभार जताया था।

मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख ने 13 अक्टूबर 2026 को डोर्नोगोबी प्रांत के अल्तानशिरी सोम स्थित निर्माण स्थल का दौरा किया और मंगोलिया की पहली ऑयल रिफाइनरी के निर्माण में भारत द्वारा दी जा रही निरंतर सहायता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उलानबटार स्थित भारतीय दूतावास ने इस दौरे की जानकारी साझा की और बताया कि खुरेलसुख ने परियोजना की प्रगति पर गहरी संतुष्टि जताई।

दौरे का विवरण और राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया

निर्माण स्थल पर पहुँचकर राष्ट्रपति खुरेलसुख ने इंजीनियरों और कर्मचारियों से सीधी बातचीत की। भारतीय दूतावास ने एक्स पर पोस्ट करते हुए उनके शब्द उद्धृत किए: 'यह एक रणनीतिक प्रोजेक्ट है, जिससे मंगोलिया को अपना खुद का रिफाइंड ईंधन मिल सकेगा।' उन्होंने इस मेगा परियोजना को साकार करने के लिए भारतीय और मंगोलियाई दोनों टीमों को श्रेय दिया।

खुरेलसुख ने भारत और मंगोलिया को 'आध्यात्मिक भाई-बहन' बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच यह साझेदारी महज एक कूटनीतिक संबंध से कहीं आगे है। दौरे के दौरान राष्ट्रपति, राजदूत और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने मिलकर निर्माण स्थल पर एक पेड़ भी लगाया।

राजदूत की भूमिका की सराहना

राष्ट्रपति ने मंगोलिया में भारत के राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सुरवे की परियोजना की निरंतर प्रगति में निभाई गई भूमिका की विशेष सराहना की। दौरे में मंगोलिया के उद्योग और खनिज संसाधन मंत्री जी. डमदिन्याम, सड़क और परिवहन मंत्री बी. डेलगरसैखान, वित्त मंत्री जेड. मेंडसैखान, मंगोल रिफाइनरी की कार्यकारी निदेशक डी. अल्तानसेत्सेग और डोर्नोगोबी प्रांत के गवर्नर ओ. बटजार्गल भी उपस्थित थे।

परियोजना की पृष्ठभूमि

2015 में प्रधानमंत्री मोदी की मंगोलिया यात्रा के दौरान भारत ने बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए 1 अरब अमेरिकी डॉलर की 'लाइन ऑफ क्रेडिट' (LoC) को मंजूरी दी थी। मंगोलिया सरकार ने इस राशि का उपयोग डोर्नोगोबी प्रांत में देश की पहली ऑयल रिफाइनरी स्थापित करने के लिए किया, जिसकी वार्षिक प्रसंस्करण क्षमता 1.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) होगी।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मंगोलियाई नेतृत्व ने भारत की भूमिका की तारीफ की हो। इससे पहले अगस्त 2026 में मंगोलिया के प्रधानमंत्री एन. उचरल ने भी इसी परियोजना स्थल का दौरा किया था और भारत सरकार का आभार प्रकट किया था।

भारत-मंगोलिया संबंधों पर असर

यह परियोजना भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति से इतर उसकी 'विस्तारित पड़ोस' कूटनीति का एक ठोस उदाहरण है। मंगोलिया अब तक अपनी ईंधन जरूरतों के लिए मुख्यतः रूस और चीन पर निर्भर रहा है; इस रिफाइनरी के चालू होने के बाद वह ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम उठा सकेगा। यह ऊर्जा कूटनीति के नज़रिए से भारत की बढ़ती मध्य एशियाई उपस्थिति का भी संकेत है।

भारतीय दूतावास के अनुसार, परियोजना सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है और जल्द ही मंगोलिया को घरेलू स्तर पर रिफाइंड ईंधन उत्पादन की क्षमता मिल सकेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो क्रियान्वयन पारदर्शिता पर सवाल छोड़ती है। यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो यह भारत की विकास-सहायता कूटनीति की सबसे सफल मिसालों में से एक बन सकती है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगोलिया की ऑयल रिफाइनरी परियोजना क्या है और इसमें भारत की क्या भूमिका है?
यह मंगोलिया की पहली ऑयल रिफाइनरी है, जो डोर्नोगोबी प्रांत में निर्माणाधीन है और इसकी क्षमता 1.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष होगी। भारत ने 2015 में 1 अरब अमेरिकी डॉलर की 'लाइन ऑफ क्रेडिट' के तहत इस परियोजना को वित्तपोषित किया है।
मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख ने PM मोदी को धन्यवाद क्यों दिया?
राष्ट्रपति खुरेलसुख ने 13 अक्टूबर 2026 को निर्माण स्थल के दौरे के दौरान कहा कि भारत ने इस रणनीतिक परियोजना के लिए निर्बाध सहायता प्रदान की है। उन्होंने इस परियोजना को मंगोलिया की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया।
मंगोलिया की यह रिफाइनरी देश के लिए क्यों अहम है?
मंगोलिया अब तक रिफाइंड ईंधन के लिए रूस और चीन पर निर्भर रहा है। यह रिफाइनरी चालू होने के बाद मंगोलिया घरेलू स्तर पर ईंधन उत्पादन करने में सक्षम होगा, जिससे उसकी ऊर्जा संप्रभुता और आर्थिक स्थिरता मजबूत होगी।
इस परियोजना के दौरे में कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे?
दौरे में मंगोलिया के राष्ट्रपति खुरेलसुख के साथ भारतीय राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सुरवे, मंगोलिया के उद्योग, सड़क-परिवहन और वित्त मंत्री, मंगोल रिफाइनरी की कार्यकारी निदेशक और डोर्नोगोबी प्रांत के गवर्नर उपस्थित थे।
क्या पहले भी किसी मंगोलियाई नेता ने इस परियोजना का दौरा किया था?
हाँ, अगस्त 2026 में मंगोलिया के प्रधानमंत्री एन. उचरल ने डोर्नोगोबी प्रांत में इसी रिफाइनरी स्थल का दौरा किया था और निर्माण में सहयोग के लिए भारत सरकार का आभार जताया था।
राष्ट्र प्रेस
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