मंगोलिया की पहली ऑयल रिफाइनरी में भारत की अहम भूमिका, राष्ट्रपति खुरेलसुख ने PM मोदी को कहा धन्यवाद
सारांश
मुख्य बातें
मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख ने 13 अक्टूबर 2026 को डोर्नोगोबी प्रांत के अल्तानशिरी सोम स्थित निर्माण स्थल का दौरा किया और मंगोलिया की पहली ऑयल रिफाइनरी के निर्माण में भारत द्वारा दी जा रही निरंतर सहायता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उलानबटार स्थित भारतीय दूतावास ने इस दौरे की जानकारी साझा की और बताया कि खुरेलसुख ने परियोजना की प्रगति पर गहरी संतुष्टि जताई।
दौरे का विवरण और राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया
निर्माण स्थल पर पहुँचकर राष्ट्रपति खुरेलसुख ने इंजीनियरों और कर्मचारियों से सीधी बातचीत की। भारतीय दूतावास ने एक्स पर पोस्ट करते हुए उनके शब्द उद्धृत किए: 'यह एक रणनीतिक प्रोजेक्ट है, जिससे मंगोलिया को अपना खुद का रिफाइंड ईंधन मिल सकेगा।' उन्होंने इस मेगा परियोजना को साकार करने के लिए भारतीय और मंगोलियाई दोनों टीमों को श्रेय दिया।
खुरेलसुख ने भारत और मंगोलिया को 'आध्यात्मिक भाई-बहन' बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच यह साझेदारी महज एक कूटनीतिक संबंध से कहीं आगे है। दौरे के दौरान राष्ट्रपति, राजदूत और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने मिलकर निर्माण स्थल पर एक पेड़ भी लगाया।
राजदूत की भूमिका की सराहना
राष्ट्रपति ने मंगोलिया में भारत के राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सुरवे की परियोजना की निरंतर प्रगति में निभाई गई भूमिका की विशेष सराहना की। दौरे में मंगोलिया के उद्योग और खनिज संसाधन मंत्री जी. डमदिन्याम, सड़क और परिवहन मंत्री बी. डेलगरसैखान, वित्त मंत्री जेड. मेंडसैखान, मंगोल रिफाइनरी की कार्यकारी निदेशक डी. अल्तानसेत्सेग और डोर्नोगोबी प्रांत के गवर्नर ओ. बटजार्गल भी उपस्थित थे।
परियोजना की पृष्ठभूमि
2015 में प्रधानमंत्री मोदी की मंगोलिया यात्रा के दौरान भारत ने बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए 1 अरब अमेरिकी डॉलर की 'लाइन ऑफ क्रेडिट' (LoC) को मंजूरी दी थी। मंगोलिया सरकार ने इस राशि का उपयोग डोर्नोगोबी प्रांत में देश की पहली ऑयल रिफाइनरी स्थापित करने के लिए किया, जिसकी वार्षिक प्रसंस्करण क्षमता 1.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) होगी।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मंगोलियाई नेतृत्व ने भारत की भूमिका की तारीफ की हो। इससे पहले अगस्त 2026 में मंगोलिया के प्रधानमंत्री एन. उचरल ने भी इसी परियोजना स्थल का दौरा किया था और भारत सरकार का आभार प्रकट किया था।
भारत-मंगोलिया संबंधों पर असर
यह परियोजना भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति से इतर उसकी 'विस्तारित पड़ोस' कूटनीति का एक ठोस उदाहरण है। मंगोलिया अब तक अपनी ईंधन जरूरतों के लिए मुख्यतः रूस और चीन पर निर्भर रहा है; इस रिफाइनरी के चालू होने के बाद वह ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम उठा सकेगा। यह ऊर्जा कूटनीति के नज़रिए से भारत की बढ़ती मध्य एशियाई उपस्थिति का भी संकेत है।
भारतीय दूतावास के अनुसार, परियोजना सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है और जल्द ही मंगोलिया को घरेलू स्तर पर रिफाइंड ईंधन उत्पादन की क्षमता मिल सकेगी।