22 अगस्त 2026
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हिप-हॉप बनाम कमर्शियल म्यूजिक की बहस पर एमसी स्क्वायर बोले — 'अंडरग्राउंड ही अब मेनस्ट्रीम है'

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हिप-हॉप बनाम कमर्शियल म्यूजिक की बहस पर एमसी स्क्वायर बोले — 'अंडरग्राउंड ही अब मेनस्ट्रीम है'

सारांश

एमसी स्क्वायर का मानना है कि हिप-हॉप और कमर्शियल म्यूजिक का पुराना फर्क अब बेमानी हो चुका है — अंडरग्राउंड ही आज की मेनस्ट्रीम है। 'हसल सीजन 5' में मेंटर की भूमिका निभाते हुए वे नई पीढ़ी के रैपर्स को यही सीख दे रहे हैं।

मुख्य बातें

एमसी स्क्वायर (अभिषेक बैंसला) एमटीवी 'हसल सीजन 5' में बतौर मेंटर शामिल हैं।
उनका कहना है कि अंडरग्राउंड म्यूजिक अब मेनस्ट्रीम बन चुका है और कमर्शियल की पुरानी परिभाषा अप्रासंगिक है।
एमसी स्क्वायर ने एमटीवी हसल 2.0 जीतकर अपने करियर की शुरुआत की थी।
उनका संगीत हरियाणवी लोक , रागिनी और शहरी हिप-हॉप का मिश्रण है।
उनके अनुसार 'हसल सीजन 5' किसी खास वर्ग नहीं, बल्कि सभी संगीत प्रेमियों के लिए है।

मशहूर रैपर और हिप-हॉप कलाकार एमसी स्क्वायर (असली नाम: अभिषेक बैंसला) इन दिनों एमटीवी के रैप रियलिटी शो 'हसल सीजन 5' में बतौर मेंटर नज़र आ रहे हैं। 22 अगस्त को मुंबई में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि हिप-हॉप और कमर्शियल म्यूजिक के बीच की विभाजन रेखा अब लगभग मिट चुकी है, और आज का श्रोता हर शैली के संगीत को खुले दिल से अपना रहा है।

कमर्शियल की परिभाषा पर सवाल

एमसी स्क्वायर ने पारंपरिक सोच को चुनौती देते हुए कहा कि किसी गाने को महज उसकी लोकप्रियता या कमाई के आधार पर 'कमर्शियल' का ठप्पा लगाना सही नहीं है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि कला एक ऐसी चीज़ है, जो अगर चार पैसे कमा ले तो उसे कमर्शियल कह दिया जाता है। मैं कमर्शियल की इस परिभाषा को नहीं मानता कि किसी खास तरह का म्यूजिक कमर्शियल है।'

उनका यह बयान उस पुराने नज़रिए को सीधी चुनौती है, जिसमें हिप-हॉप को केवल एक सीमित वर्ग की विधा माना जाता था।

अंडरग्राउंड से मेनस्ट्रीम तक का सफर

एमसी स्क्वायर ने आगे कहा, 'आजकल आपने देखा होगा कि अंडरग्राउंड म्यूजिक भी मेनस्ट्रीम म्यूजिक बन गया है। हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण हैं — हमारे खुद के गानों में भी।' उन्होंने जोड़ा कि यह शो किसी खास ऑडियंस के लिए नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए है जो संगीत से प्यार करता है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय हिप-हॉप ने स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों श्रोता जोड़े हैं, और 'गली बॉय' जैसी फिल्मों ने इस शैली को मुख्यधारा में स्थापित किया है।

'हसल सीजन 5' और मेंटरशिप का अनुभव

एमसी स्क्वायर ने मेंटर की भूमिका को लेकर कहा कि इस शो में दर्शकों को 'कई तरह की बातें सुनने को मिलती हैं — कुछ अच्छी होती हैं, तो कुछ से सीखने को मिलता है।' उनके अनुसार यह अनुभव सभी के लिए है, न कि किसी खास वर्ग के लिए।

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रैप सीन तेज़ी से विस्तार पा रहा है और युवा कलाकार अपनी क्षेत्रीय भाषाओं व लोक परंपराओं को हिप-हॉप से जोड़ रहे हैं।

एमसी स्क्वायर: करियर और पहचान

एमसी स्क्वायर ने अपने करियर की शुरुआत एमटीवी हसल 2.0 से की थी और उस सीज़न की ट्रॉफी अपने नाम की थी। उनके गानों में शहरी हिप-हॉप के साथ-साथ हरियाणवी लोक संगीत, रागिनी और स्थानीय सांस्कृतिक रंग का अनूठा संगम देखने को मिलता है — जो उन्हें भारतीय रैप परिदृश्य में एक अलग पहचान देता है।

आने वाले समय में 'हसल सीजन 5' के ज़रिए वे नई पीढ़ी के रैपर्स को मंच और मार्गदर्शन दोनों देने की भूमिका में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह भारतीय संगीत उद्योग की बदलती संरचना की स्वीकृति है। स्ट्रीमिंग एल्गोरिदम ने 'कमर्शियल' और 'अंडरग्राउंड' के बीच की दीवार को तोड़ा है — अब वायरल होना ही मेनस्ट्रीम होना है। लेकिन यह सवाल बना रहता है कि क्या इस धुंधलेपन से हिप-हॉप की वह कच्ची, विद्रोही आवाज़ भी धुंधली नहीं हो रही, जो कभी इसकी असली ताकत थी? 'हसल' जैसे शो इस शैली को लोकप्रिय बनाते हैं, पर साथ ही उसे एक पैकेज्ड प्रोडक्ट में भी बदलते हैं — यह द्वंद्व भारतीय रैप सीन के लिए अभी अनसुलझा है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमसी स्क्वायर 'हसल सीजन 5' में किस भूमिका में हैं?
एमसी स्क्वायर 'हसल सीजन 5' में बतौर मेंटर नज़र आ रहे हैं। वे नए रैपर्स को मार्गदर्शन देने की भूमिका में हैं और अपने अनुभव से प्रतिभागियों को तराशने का काम कर रहे हैं।
एमसी स्क्वायर का हिप-हॉप और कमर्शियल म्यूजिक पर क्या मत है?
एमसी स्क्वायर का मानना है कि किसी गाने को कमाई या लोकप्रियता के आधार पर 'कमर्शियल' नहीं कहा जा सकता। उनके अनुसार अंडरग्राउंड म्यूजिक खुद ही मेनस्ट्रीम बन चुका है और दोनों के बीच की रेखा अब लगभग मिट गई है।
एमसी स्क्वायर का असली नाम और पृष्ठभूमि क्या है?
एमसी स्क्वायर का असली नाम अभिषेक बैंसला है। उन्होंने एमटीवी हसल 2.0 जीतकर करियर की शुरुआत की और उनका संगीत शहरी हिप-हॉप के साथ हरियाणवी लोक संगीत व रागिनी का अनूठा मिश्रण है।
क्या 'हसल सीजन 5' केवल हिप-हॉप प्रेमियों के लिए है?
एमसी स्क्वायर के अनुसार यह शो किसी खास वर्ग के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग गाने सुनना पसंद करते हैं वे इस शो को भी देखते हैं, और इसमें हर तरह के संगीत का अनुभव मिलता है।
भारत में अंडरग्राउंड हिप-हॉप मेनस्ट्रीम कैसे बना?
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स, यूट्यूब और 'गली बॉय' जैसी फिल्मों ने भारतीय हिप-हॉप को करोड़ों श्रोताओं तक पहुँचाया। एमसी स्क्वायर जैसे कलाकारों ने स्थानीय भाषा और लोक परंपरा को रैप से जोड़कर इसे व्यापक दर्शकों से जोड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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