क्या विधायक-कलेक्टर विवाद में आईएएस एसोसिएशन ने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखा?

सारांश
Key Takeaways
- आईएएस एसोसिएशन ने प्रशासनिक तंत्र की गरिमा की रक्षा की मांग की है।
- भाजपा विधायक का आचरण अस्वीकृत है।
- पत्र में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच सम्मान का महत्व बताया गया है।
- इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- आवश्यक कार्रवाई के लिए सरकार से अपेक्षा की गई है।
भोपाल, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश आईएएस एसोसिएशन ने भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव के निवास पर भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा और उनके समर्थकों द्वारा की गई अभद्रता के प्रति कड़ा विरोध प्रकट किया है। एसोसिएशन ने इसे अपमानजनक और खतरनाक बताते हुए प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर एक गंभीर हमला माना है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में आईएएस एसोसिएशन ने 27 अगस्त 2025 को भिंड में हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को डराने और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का प्रयास किया। किसी जनप्रतिनिधि द्वारा अधिकारी के प्रति इस प्रकार का दुर्व्यवहार न केवल सिविल सेवा की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि लोकतांत्रिक शासन की नींव पर भी आघात करता है जो जनप्रतिनिधियों और सिविल सेवकों के बीच परस्पर सम्मान पर आधारित है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि जिला कलेक्टर, जो जिला स्तर पर सरकार का प्रतिनिधित्व करता है, का अपमान केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा का ही अपमान नहीं बल्कि सम्पूर्ण शासन-तंत्र की अधिकारिता का अपमान है। इसका प्रभाव शासन व्यवस्था के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकता है। आईएएस एसोसिएशन, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की भूमिका का सम्मान करता है, इस अस्वीकृत आचरण की कड़ी निंदा करता है। हम आग्रह करते हैं कि प्रशासनिक तंत्र में विश्वास बहाल करने के लिए इस संबंध में तत्काल और ठोस कार्रवाई की जाए।
कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। हम उम्मीद करते हैं कि फील्ड अधिकारियों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चत करने हेतु स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे और अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद की व्यवस्था की जाएगी। हमें विश्वास है कि सरकार का समय पर हस्तक्षेप न केवल अधिकारियों का मनोबल सुरक्षित रखेगा, बल्कि राज्य में सुशासन के सिद्धांतों को भी सुदृढ़ करेगा।