आईआईटी दिल्ली का स्मार्ट एयर कंडीशनर: बिजली की खपत में कमी लाने की नई तकनीक

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आईआईटी दिल्ली का स्मार्ट एयर कंडीशनर: बिजली की खपत में कमी लाने की नई तकनीक

सारांश

आईआईटी दिल्ली एक अत्याधुनिक स्मार्ट एयर कंडीशनर विकसित कर रहा है, जो बिजली की खपत को कम करेगा। यह नवीनतम तकनीक, जो प्रयोगशाला में परीक्षण के दौर से गुजर रही है, गर्मी की समस्याओं का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती है।

Key Takeaways

  • कम बिजली की खपत: नया एयर कंडीशनर लगभग 33%25 कम बिजली का उपयोग करेगा।
  • नवीनतम तकनीक: नमक के घोल का उपयोग करने वाली तकनीक।
  • प्रयोगशाला परीक्षण: वर्तमान में परीक्षण के दौर से गुजर रहा है।
  • पर्यावरण संरक्षण: ऊर्जा की बचत से प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम होगा।
  • आकर्षक संभावनाएं: भारतीय भवनों में व्यापक उपयोग की उम्मीद।

नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। आईआईटी दिल्ली एक नवीनतम स्मार्ट एयर कंडीशनर विकसित कर रहा है, जो पारंपरिक एसी की तुलना में बहुत कम बिजली का उपयोग करेगा। वर्तमान में, इस एयर कंडीशनर का प्रयोगशाला में परीक्षण चल रहा है।

गर्मी की बढ़ती समस्याएं अब चिंता का विषय बन गई हैं। अधिक तापमान का स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, और कार्यक्षमता में भी कमी आती है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में ठंडक के लिए बिजली की मांग में कई गुना वृद्धि होने की संभावना है। इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा और उपभोक्ताओं के बिजली बिल भी अधिक होंगे। इस समस्या के समाधान के लिए आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ता नई तकनीक पर काम कर रहे हैं।

आईआईटी का कहना है कि सामान्य एयर कंडीशनर कमरे की हवा को अत्यधिक ठंडा करके उसमें से नमी को हटाते हैं, जिससे बिजली की खपत बढ़ती है। नई प्रणाली में नमक के घोल का इस्तेमाल किया गया है, जो हवा में मौजूद नमी को सीधे सोख लेता है। एक विशेष पतली झिल्ली की मदद से नमक कमरे की हवा में नहीं मिल पाता। जब घोल नमी को सोख लेता है, तो इसे सुखाने के लिए कोई अतिरिक्त यंत्र की आवश्यकता नहीं होती है। मशीन के बाहरी भाग से निकलने वाली गर्मी का उपयोग करके इसे फिर से उपयोग योग्य बनाया जाता है, जिससे ऊर्जा की बचत होती है।

आईआईटी दिल्ली के यांत्रिक इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ता इस हाई-एफिशियन्सी एयर कंडीशनर को विकसित कर रहे हैं, जिसमें बिजली की खपत को लगभग एक-तिहाई तक कम करने की क्षमता है। वर्तमान में प्रयोगशाला स्तर पर प्रोटोटाइप का परीक्षण चल रहा है। इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान के अनुसार, तापमान में वृद्धि और एयर कंडीशनरों के बढ़ते उपयोग के कारण 2037-38 में बिजली की खपत तीन गुना बढ़ने का अनुमान है। इससे प्राकृतिक संसाधनों पर अधिक दबाव पड़ेगा और उपभोक्ताओं के बिजली बिल में भी वृद्धि होगी।

इस चुनौती का सामना करने के लिए आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ता एक नई प्रकार की हाई-एफिशियन्सी एयर कंडीशनर बनाने पर काम कर रहे हैं। यह शोध प्रो. अनुराग गोयल के नेतृत्व में हो रहा है, जिसमें यांत्रिक इंजीनियरिंग विभाग के पीएचडी शोधार्थी अनंतकृष्णन भी शामिल हैं।

वर्तमान में उपयोग में आने वाले वेपर-कंप्रेशन सिस्टम आधारित एयर कंडीशनर नमी को हटाने के लिए हवा को आवश्यकता से अधिक ठंडा करते हैं, जिससे ऊर्जा की अत्यधिक खपत होती है।

आईआईटी दिल्ली के यांत्रिक इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अनुराग गोयल के शोध समूह ने एक नई अवधारणा विकसित की है, जिसमें नमी को सीधे नियंत्रित करने के लिए एक कॉम्पैक्ट ऐड-ऑन मॉड्यूल का उपयोग किया गया है। यह प्रणाली इस प्रकार डिजाइन की गई है कि देश में विभिन्न बाहरी परिस्थितियों के दौरान वेपर कंप्रेशन और डेसिकेंट मॉड्यूल के बीच ऊर्जा अंतरण की दर का सटीक संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।

प्रो. अनुराग गोयल का कहना है, "प्रस्तावित प्रणाली का उपयोग करते हुए सामान्य परिस्थितियों में एक सामान्य कमरे के एयर कंडीशनर के लिए लगभग १,२०० वॉट की कुल बिजली खपत की तुलना में हाइब्रिड प्रणाली में बिजली की खपत घटकर लगभग ८०० वॉट रह जाती है। इससे समान इनडोर कम्फर्ट स्टैंडर्ड्स को बनाए रखते हुए लगभग ३३ प्रतिशत तक कम ऊर्जा खपत हुई।"

शोध टीम को उम्मीद है कि इस प्रकार की सतत कूलिंग तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग होगा, विशेष रूप से भारतीय भवनों में। इस हाई-एफिशियन्सी कूलिंग पर एक अध्ययन जर्नल ऑफ बिल्डिंग इंजीनियरिंग में प्रकाशित हुआ है।

Point of View

जो बिजली की बचत करने में सहायक हो सकती है। यह कदम न केवल उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान करेगा।
NationPress
22/04/2026

Frequently Asked Questions

आईआईटी दिल्ली का नया एयर कंडीशनर कैसे काम करेगा?
यह एयर कंडीशनर हवा में मौजूद नमी को सोखने के लिए नमक के घोल का उपयोग करेगा, जिससे बिजली की खपत में कमी आएगी।
इस एयर कंडीशनर के परीक्षण का क्या चरण है?
वर्तमान में, यह एयर कंडीशनर प्रयोगशाला में परीक्षण के दौर से गुजर रहा है।
क्या यह एयर कंडीशनर पारंपरिक एसी से बेहतर होगा?
हां, यह एयर कंडीशनर लगभग एक-तिहाई कम बिजली का उपयोग करेगा, जिससे ऊर्जा की बचत होगी।
आईआईटी दिल्ली के इस अनुसंधान की आवश्यकता क्यों है?
बढ़ती गर्मी और बिजली की मांग को देखते हुए ऐसी तकनीक विकसित करना आवश्यक है, जो पर्यावरण पर कम प्रभाव डाले।
क्या यह तकनीक भारतीय भवनों में लागू की जाएगी?
जी हां, इस प्रकार की सतत कूलिंग तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग होने की संभावना है।
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