क्या इमरान मसूद ने एस जयशंकर को पत्र लिखकर ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी की मांग की?
सारांश
Key Takeaways
- ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा गंभीर है।
- कई देश अपने नागरिकों को निकालने के लिए विशेष उड़ानें शुरू कर चुके हैं।
- भारत को भी विशेष उड़ानों की व्यवस्था करनी चाहिए।
- आर्थिक स्थिति के कारण कई भारतीय मजदूर खुद लौटने में असमर्थ हैं।
- पत्र में अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी चिंता व्यक्त की गई है।
नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों और छात्रों की सुरक्षित वापसी की मांग की है।
उन्होंने ईरान में संभावित अमेरिकी हमलों और विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में स्थिति को गंभीर बताया और भारत सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील की।
पत्र में इमरान मसूद ने कहा कि तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास को तुरंत भारतीय छात्रों और नागरिकों से संपर्क करना चाहिए, ताकि किसी भी भारतीय को अनावश्यक खतरे या परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई अन्य देश पहले ही अपने नागरिकों को ईरान से निकालने के लिए विशेष उड़ानें शुरू कर चुके हैं, इसलिए भारत को भी विशेष उड़ानों का आयोजन करना चाहिए।
इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय मजदूर काम कर रहे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे अपने खर्च पर टिकट लेकर भारत लौट सकें। इसलिए, सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से वापस लाया जाए।
पत्र में उन्होंने विदेश मंत्री से इस मामले को गंभीरता से लेने का अनुरोध किया और विशेष उड़ानें शुरू करने की मांग की।
इमरान मसूद ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यदि भारत को 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनना है, तो उसे कम से कम 10 प्रतिशत की विकास दर की आवश्यकता है। आप 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर पर खुश हो रहे हैं, इससे ज्यादा दुखद क्या हो सकता है?"
संगीतकार और गायक एआर रहमान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद ने चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा, "यदि एक ऑस्कर विजेता इस तरह की बात कह रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। पूरी दुनिया में पहचान मिलने के बावजूद यदि किसी को अपने ही देश में काम नहीं मिल रहा और केवल धर्म के आधार पर अवसरों से वंचित किया जा रहा है, तो यह बेहद गंभीर मामला है।"