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क्या आईएनएसवी कौंडिन्य ने पोरबंदर से मस्कट तक अपनी पहली यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की?

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क्या आईएनएसवी कौंडिन्य ने पोरबंदर से मस्कट तक अपनी पहली यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की?

सारांश

भारतीय नौसेना का जलयान आईएनएसवी कौंडिन्य ने अपनी पहली यात्रा पोरबंदर से मस्कट तक सफलतापूर्वक की। यह यात्रा भारत की समुद्री परंपरा और सांस्कृतिक संबंधों को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण है। जानें इस ऐतिहासिक यात्रा के बारे में।

मुख्य बातें

आईएनएसवी कौंडिन्य की पहली यात्रा पोरबंदर से मस्कट तक सफल रही।
यह यात्रा भारत की समुद्री कूटनीति का प्रतीक है।
जहाज का निर्माण पारंपरिक तकनीक से किया गया है।
भारत और ओमान के बीच ऐतिहासिक संबंधों को पुनर्जीवित किया गया।
यह यात्रा 17 दिनों तक चली।

नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय नौसेना का जलयान आईएनएसवी कौंडिन्य ने गुजरात के पोरबंदर से ओमान के मस्कट तक अपनी पहली यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न की है। यह भारत की समुद्री कूटनीति और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस जहाज की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी थी और इसका डिज़ाइन अजंता की गुफाओं में प्रदर्शित पांचवीं शताब्दी के जहाज से लिया गया है। यह यात्रा अरब सागर में 17 दिनों तक चली।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर आईएनएसवी कौंडिन्य के मस्कट पहुंचने की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि आईएनएसवी कौंडिन्य ने पोरबंदर से अपनी पहली यात्रा पूरी कर मस्कट में प्रवेश किया।

आईएनएसवी कौंडिन्य एक पारंपरिक तरीके से निर्मित स्टिच्ड सेल वाली नौका है। इसमें कील या धातु का उपयोग नहीं किया गया है। इसके लकड़ी के तख्तों को नारियल के रेशे और प्राकृतिक रेजिन से जोड़ा गया है। यह तकनीक कभी हिंद महासागर में नौकायन के लिए सामान्य थी और यह भारत की कारीगरी और टिकाऊ निर्माण पद्धति को दर्शाती है।

जहाज के पालों पर गंडभेरुंड और सूर्य की आकृतियां हैं और आगे की तरफ सिंह यालि का नक्काशीदार स्वरूप है। डेक पर हरप्पन शैली का पत्थर का एंकर रखा गया है। यह जहाज भारतीय नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने सदियों पहले भारतीय महासागर पार कर दक्षिण-पूर्व एशिया तक समुद्री यात्रा की थी। यह यात्रा केवल नौसेना अभ्यास नहीं थी, बल्कि एक सांस्कृतिक मिशन भी थी।

यह परियोजना 2023 में संस्कृति मंत्रालय, भारतीय नौसेना और होड़ी इनोवेशन के बीच त्रिपक्षीय समझौते से आरंभ हुई। केरल के कारीगरों ने जहाज का निर्माण किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस परियोजना का उद्देश्य भारत को उसकी समुद्री परंपरा से जोड़ना और ओमान के साथ संबंध मजबूत करना बताया, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से भारत और ओमान के बीच मसाले, कपड़े और बहुमूल्य पत्थरों के व्यापार के माध्यम से संबंध रहे हैं।

पोरबंदर से मस्कट की 17-दिन की यात्रा प्राचीन व्यापार मार्गों पर हुई थी, जिन्हें पहले भारतीय व्यापारी और नाविक इस्तेमाल करते थे। इस यात्रा में आधुनिक इंजन का उपयोग नहीं हुआ और जहाज केवल पालों और पारंपरिक रस्सी तकनीक पर निर्भर रहा। यह क्रू और जहाज की मजबूती की परीक्षा भी थी।

भारतीय नौसेना ने यात्रा के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित की और जहाज की पारंपरिक विशेषताओं को संरक्षित रखा। आईआईटी मद्रास में पहले हाइड्रोडायनामिक मॉडल टेस्ट से साबित हुआ था कि प्राचीन तकनीक आधुनिक समुद्री परिस्थितियों को सहन कर सकती है।

भारत और ओमान के बीच सदियों पुराने समुद्री संबंध हैं। पुरातात्विक खोजों से पता चलता है कि ब्रॉन्ज एज से ही भारत और ओमान का व्यापार होता रहा है। हरप्पन काल के अवशेष ओमान में पाए गए हैं। जहाज का मस्कट में गर्मजोशी से स्वागत यह दिखाता है कि सांस्कृतिक कूटनीति द्विपक्षीय संबंधों में कितनी महत्वपूर्ण है।

यह यात्रा भारत और ओमान के ऊर्जा, रक्षा और व्यापार सहयोग के समय पर हुई। भविष्य में और नौकायन यात्राओं से भारतीय महासागर में प्राचीन व्यापार मार्गों को फिर से जोड़ा जाएगा, जो भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका से जोड़ेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर और समुद्री कूटनीति को भी सशक्त बनाती है। भारतीय नौसेना ने इसे सुरक्षित और सफलतापूर्वक पूरा कर दिखाया है कि भारत अपने प्राचीन समुद्री रास्तों को फिर से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएनएसवी कौंडिन्य का क्या महत्व है?
आईएनएसवी कौंडिन्य भारतीय नौसेना की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत और समुद्री परंपरा को पुनर्जीवित करती है।
इस यात्रा का उद्देश्य क्या था?
इस यात्रा का उद्देश्य भारत और ओमान के बीच ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करना और समुद्री संस्कृति को बढ़ावा देना था।
यह जहाज किस प्रकार का है?
यह जहाज पारंपरिक स्टिच्ड सेल तकनीक से निर्मित है और इसमें कोई धातु का उपयोग नहीं किया गया है।
इस यात्रा में कितने दिन लगे?
इस यात्रा में कुल 17 दिन लगे।
आईएनएसवी कौंडिन्य की प्रेरणा किससे मिली?
इस जहाज की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी थी और इसका डिज़ाइन अजंता की गुफाओं से लिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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