भारत की कूटनीतिक जीत: तनाव के बावजूद ईरान से तेल और गैस की निरंतरता
सारांश
Key Takeaways
- भारत ने ईरान से गैस और तेल की आपूर्ति बनाए रखी है।
- अश्विनी कुमार ने युद्ध की जटिलता पर चिंता जताई।
- भारत ने वैश्विक शांति का संदेश दिया है।
- राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर एकता जरूरी है।
- भारत को एक शांति दूत के रूप में उभरना होगा।
गुरदासपुर, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान में चल रहे संघर्ष को लेकर पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियाँ अत्यंत जटिल हैं और इस युद्ध को समाप्त करना किसी एक देश के लिए संभव नहीं है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "इस प्रकार की स्थिति में अन्य देशों से यह उम्मीद करना कि वे अकेले युद्ध को समाप्त कर देंगे, व्यावहारिक नहीं है।" हालांकि, उन्होंने भारत की भूमिका की सराहना की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सभी देशों से शांति की अपील को सकारात्मक और सराहनीय कदम बताया।
उन्होंने आगे कहा कि भारत ने वैश्विक मंच पर शांति का संदेश देने की कोशिश की है, जो उसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दर्शाता है। ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे प्रमुख देशों की सीधी भागीदारी के कारण यह युद्ध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक जटिल हो गया है।
पूर्व मंत्री ने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद, भारत ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ संतुलित और मजबूत संबंध बनाए रखे हैं। इसी कारण, वर्तमान तनाव के बावजूद, ईरान से भारत को गैस और पेट्रोल की आपूर्ति निरंतर जारी है।
उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख किया, जो ऊर्जा संसाधनों के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, और कहा कि यह भारत की कूटनीतिक सफलता को दर्शाता है।
अश्विनी कुमार ने कहा कि अगर भारत वास्तव में "विश्वगुरु" बनने की दिशा में अग्रसर है, तो उसे शांति दूत के रूप में भी उभरना होगा। उनका मानना है कि भारत की जिम्मेदारी केवल अपने हितों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वैश्विक शांति स्थापित करने में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से अपेक्षाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों में विपक्ष को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश की विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण मामलों में सरकार के पास पर्याप्त जानकारी और अनुभव होता है, इसलिए विपक्ष को इन फैसलों का समर्थन करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सरकार या प्रधानमंत्री पर गलत नीयत के आरोप लगाना उचित नहीं है, खासकर तब जब देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा हो। उन्होंने मौजूदा वैश्विक संकट में भारत की संतुलित कूटनीति और आंतरिक राजनीतिक एकता की आवश्यकता पर जोर दिया।