ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव को ठुकराया, संघर्ष के लिए 10 बिंदुओं की योजना प्रस्तुत की
सारांश
Key Takeaways
- ईरान ने अमेरिका के 15 बिंदुओं के प्रस्ताव को ठुकराया।
- ईरान ने स्थायी समाधान के लिए 10 बिंदुओं की योजना प्रस्तुत की।
- ईरान की कई मांगें हैं, जैसे युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्निर्माण।
तेहरान, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान ने अमेरिका के 15 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और कहा है कि वह संघर्ष का स्थायी अंत चाहता है। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, ईरान ने इसके जवाब में 10 बिंदुओं का एक दस्तावेज़ प्रस्तुत किया है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, ईरान ने अपने पूर्व अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह केवल युद्धविराम (सीजफायर) को स्वीकार नहीं करेगा। इस जवाब में ईरान की कई मांगें शामिल हैं, जैसे क्षेत्रीय संघर्षों का अंत, होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना, युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्निर्माण करना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का हटाना।
आईआरएनए ने बताया कि यह प्रस्ताव ऐसे समय में प्रस्तुत किया गया जब ईरान के पश्चिमी और मध्य इलाकों में स्थिति बदल गई है और अमेरिका का एक हेलीकॉप्टर ऑपरेशन सफल नहीं हुआ। साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले तय की गई समय सीमा को फिर से बढ़ा दिया और अपने पुराने रुख में कुछ बदलाव किया।
सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने ईरान के 10 बिंदुओं वाले जवाब को “एक अहम कदम” बताया, लेकिन कहा कि यह “पर्याप्त नहीं है।”
सोमवार को ही ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि सीज़फ़ायर से विरोधियों को केवल पुनर्गठित होने और और अधिक अपराध करने का समय मिलेगा, और “कोई भी समझदार” व्यक्ति इसे स्वीकार नहीं करेगा।
मार्च के अंत में अमेरिकी मीडिया ने खबर दी थी कि अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को 15 बिंदुओं का प्रस्ताव भेजा था, ताकि युद्ध समाप्त किया जा सके। बाद में ईरान ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि यह “ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर बनाया गया है और जमीनी हकीकत से जुड़ा नहीं है।”
ईरान ने शांति के लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं। इनमें अमेरिका और इजराइल के हमलों को रोकना, भविष्य में हमलों को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाना, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई करना, पश्चिम एशिया में सभी मोर्चों पर लड़ाई बंद करना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता देना शामिल है।
28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर हमला किया था। इस हमले में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और आम नागरिक मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने मध्य पूर्व में इजराइल और अमेरिका से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए।