जयशंकर की भूटान यात्रा: 43 जर्सी गायें, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और अस्पताल — द्विपक्षीय सहयोग की बड़ी झलक
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 17 सितंबर 2026 को थिंपू पहुँचे, जहाँ भूटान के वित्त मंत्री ल्योनपो लेकी दोरजी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊँचाई देने के उद्देश्य से आयोजित की गई है।
थिंपू आगमन और स्वागत
थिंपू पहुँचने पर विदेश मंत्री जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'थिंपू में गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए भूटान के वित्त मंत्री ल्योनपो लेकी दोरजी का आभार।' यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब भारत-भूटान संबंध ऊर्जा, कृषि और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नए आयाम छू रहे हैं।
इससे पहले बुधवार को, विदेश मंत्री ने भूटान के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक, कुर्जी लखांग, में पूजा-अर्चना की। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'पवित्र कुर्जी लखांग में नमन किया। दोनों देशों की जनता के कल्याण और भारत-भूटान संबंधों के लिए प्रार्थना की।'
कृषि सहयोग: 43 शुद्ध नस्ल की जर्सी गायें सौंपीं
विदेश मंत्री जयशंकर ने भूटानी समकक्ष ल्योनपो डी.एन. धुंग्येल के साथ बुमथांग में नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर का दौरा किया। यहाँ उन्होंने भूटान के डेयरी मवेशी प्रजनन कार्यक्रम के लिए भारत की ओर से 43 शुद्ध नस्ल की जर्सी गायें सौंपीं — जिसका लक्ष्य दूध उत्पादन बढ़ाना और स्थानीय किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करना है। जयशंकर ने बताया कि इस प्रजनन कार्यक्रम से 40,000 किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
इसी दौरे में दोनों मंत्रियों ने बुमथांग के ऐतिहासिक वांगडुचोलिंग पैलेस और म्यूजियम का भी भ्रमण किया, जो भूटान की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण स्थल है।
ऊर्जा क्षेत्र में मील का पत्थर: लुनाना हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट
विदेश मंत्री जयशंकर और ल्योनपो धुंग्येल ने भूटान के गासा ज़िले में 500 किलोवाट के लुनाना हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया। जयशंकर ने इसे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग के लिए एक 'गौरवशाली मील का पत्थर' बताया।
गौरतलब है कि यह सहयोग 1967 में थिंपू में भूटान के पहले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट 'जुंगशिना' से आरंभ हुआ था और अब यह परियोजना भूटान की उन अंतिम बस्तियों तक बिजली पहुँचाएगी, जहाँ अब तक विद्युत आपूर्ति नहीं हो पाई थी।
स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी में नई पहल
दोनों मंत्रियों ने मोंगार में 65 बिस्तरों वाले ग्यालत्सुएन जेटसुन पेमा मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का उद्घाटन किया। जयशंकर ने कहा कि यह स्वास्थ्य सुविधा पूर्वी भूटान में, विशेषकर माँ और शिशु की देखभाल के क्षेत्र में, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं की पहुँच को व्यापक बनाएगी।
इसके अलावा, समद्रुप जोंगखर में 80 मीटर लंबे जगनाथन पुल का भी उद्घाटन हुआ, जिसे 'प्रोजेक्ट दंतक' ने निर्मित किया है। विदेश मंत्री ने कहा कि यह पुल पूर्वी भूटान में त्राशीगांग और समद्रुप जोंगखर के बीच कनेक्टिविटी को उल्लेखनीय रूप से बेहतर बनाएगा।
द्विपक्षीय समीक्षा बैठक
बुमथांग में आयोजित बैठक में दोनों मंत्रियों ने विकास साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों पर व्यापक चर्चा की। यह बैठक भारत-भूटान रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश में एक और महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच और समझौतों व संयुक्त परियोजनाओं की घोषणाओं की संभावना है।