जम्मू के ग्रामीण क्षेत्रों में बैसाखी का धूमधाम, किसानों ने फसलों की कटाई की शुरुआत की
सारांश
Key Takeaways
- बैसाखी का त्योहार किसानों के लिए महत्वपूर्ण है।
- किसान इस दिन फसल की कटाई करते हैं।
- यह त्योहार सामूहिक खुशी और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
- मौसम ने इस वर्ष किसानों को खुश रखा।
- ढोल की थाप पर नाचना एक परंपरा है।
जम्मू, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू के मारह ब्लॉक में अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े गांवों में किसानों ने बैसाखी का त्योहार ज़ोरदार उत्साह के साथ मनाया। इस खास मौके पर किसानों ने ढोल की थाप पर नाचते हुए और एक-दूसरे के साथ मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी का इज़हार किया।
इसके साथ ही, पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को निभाते हुए किसानों ने बैसाखी के इस शुभ अवसर पर अपनी फसलों की कटाई भी प्रारंभ कर दी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि किसान इस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं और ईश्वर का नाम लेकर फसल की कटाई शुरू करते हैं।
किसान यशपाल चंद्र ने राष्ट्रीय प्रेस से बातचीत में कहा कि आज बहुत खुशियों भरा दिन है। सभी लोग फसल काटने के लिए एकत्रित हुए हैं। अनाज बेचकर हम अपने परिवार का खर्च चलाते हैं। दो-तीन दिन पहले हुई बारिश से लोग चिंतित थे, लेकिन अब मौसम साफ है। भगवान का शुक्रिया अदा करते हैं कि फसल की कटाई के समय बारिश नहीं हो रही है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हमारी फसल सुरक्षित घर पहुंचे।
किसान राजकुमार ने कहा कि हम सभी बहुत खुश हैं। पिछली बार हमने पंडित को बुलाकर पूजा भी कराई थी। पिछले दिनों की बारिश से थोड़ी घबराहट थी, लेकिन अब हम सभी खुश हैं। हमने ढोल बजाकर डांस किया है। फसल बेचकर हम पैसे लाकर अपने परिवार की समस्याएं हल करेंगे।
सरपंच ने कहा कि लोग मुझे बैसाखी के दिन कटाई की शुभ शुरुआत के लिए बुलाते हैं। सभी लोग ढोल-नगाड़े और मंत्रोच्चार के साथ कटाई प्रारंभ कर चुके हैं। सभी लोग उत्साहित हैं।