जन्माष्टमी 2025 पर ₹40 हजार करोड़ से अधिक व्यापार का अनुमान, सीएआईटी ने जारी किए आंकड़े
सारांश
मुख्य बातें
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के अनुसार, इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर देशभर में ₹40 हजार करोड़ से अधिक का व्यापार होने का अनुमान है। यह अनुमान विभिन्न क्षेत्रों में संभावित बिक्री, धार्मिक पर्यटन, मंदिरों पर होने वाले खर्च और डिजिटल कॉमर्स के विस्तार पर आधारित है। नई दिल्ली से जारी इस आकलन ने जन्माष्टमी को भारत की 'सनातन अर्थव्यवस्था' के एक सशक्त स्तंभ के रूप में रेखांकित किया है।
व्यापार में लगातार वृद्धि का रुझान
सीएआईटी के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में जन्माष्टमी के दौरान देशभर में लगभग ₹25 हजार करोड़ का व्यापार हुआ था, जो 2025 में बढ़कर लगभग ₹30 हजार करोड़ हो गया। इस वर्ष उपभोक्ता मांग में वृद्धि, सामाजिक उत्सवों का विस्तार, धार्मिक पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता और आधुनिक रिटेल तथा डिजिटल कॉमर्स के प्रसार के कारण लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
किन उत्पादों की है सबसे अधिक मांग
सीएआईटी के सेक्रेटरी जनरल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि इस वर्ष माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद, मिठाइयाँ, फल, सूखे मेवे, पूजा सामग्री, फूलों की मालाएँ, सजावटी तोरण, झूले, लड्डू गोपाल की मूर्तियाँ, मुकुट, बाँसुरी, मोर पंख, आभूषण और पारंपरिक परिधान विशेष रूप से माँग में हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' आह्वान का असर त्योहारी बाज़ारों में साफ दिख रहा है, जिससे स्थानीय व्यापार, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सीधा लाभ मिल रहा है।
लाखों आजीविकाओं से जुड़ा है यह त्योहार
खंडेलवाल ने कहा, 'भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव सिर्फ भक्ति और आस्था का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक भागीदारी और आर्थिक गतिविधियों का एक अद्भुत संगम भी है।' उन्होंने रेखांकित किया कि किसान, डेयरी उत्पादक, फूल उगाने वाले, मिठाई निर्माता, कपड़ा व्यापारी, मूर्तिकार, कारीगर, महिला उद्यमी, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, होटल एवं रेस्टोरेंट संचालक — सभी इस त्योहार से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभान्वित होते हैं।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
सीएआईटी के अनुसार, लाखों श्रद्धालु इस वर्ष मथुरा-वृंदावन, द्वारका, नाथद्वारा, दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद, इंदौर सहित उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में उत्सव मनाएंगे। इससे होटल, परिवहन, रेस्टोरेंट, प्रसाद विक्रय, स्थानीय हस्तशिल्प और संबंधित सेवाओं में उल्लेखनीय आर्थिक गतिविधि होने की संभावना है।
भारत की 'सनातन अर्थव्यवस्था' का बड़ा इकोसिस्टम
खंडेलवाल ने जोर दिया कि भारतीय त्योहारों पर होने वाला खर्च केवल उपभोग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आय और रोज़गार के रूप में समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचता है। उन्होंने कहा कि दिवाली, होली, रक्षाबंधन, नवरात्रि, गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा, करवा चौथ और छठ पूजा जैसे त्योहार मिलकर लाखों व्यापारियों, कारीगरों, किसानों और सेवा प्रदाताओं के लिए आर्थिक अवसरों का एक विशाल नेटवर्क बनाते हैं। यह प्रवृत्ति आने वाले वर्षों में भारत की धार्मिक अर्थव्यवस्था को एक बड़े आर्थिक इकोसिस्टम के रूप में और मज़बूत करेगी।