क्या झारखंड में नगर निकाय चुनाव बैलेट से कराने पर भाजपा का विरोध सही है?
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने का विरोध किया है।
- आदित्य साहू ने सत्ता के दुरुपयोग की आशंका जताई है।
- चुनाव प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की संभावना को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई हैं।
- पुलिस प्रशासन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।
रांची, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने राज्य में नगर निकाय चुनावों को बैलेट पेपर से कराने का विरोध किया है। उन्होंने आशंका जताई है कि इसके माध्यम से सत्ता का दुरुपयोग हो सकता है।
आदित्य साहू ने कहा कि भाजपा के लंबे संघर्ष और न्यायालय के कड़े निर्देशों के बाद राज्य सरकार दो वर्षों से लंबित नगर निकाय चुनाव कराने के लिए मजबूर हुई है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया में पूर्व तैयारी स्पष्ट रूप से नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 48 नगर निकायों में चुनाव की घोषणा तो की है, लेकिन जिस तरीके से बैलेट पेपर से चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है, उससे सरकार की नीयत संदिग्ध होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की मांग थी कि वर्ष 2018 की तरह इस बार भी दलीय आधार पर और ईवीएम से चुनाव कराए जाएं, लेकिन सीएम हेमंत सोरेन की सरकार इस पर सहमत नहीं हुई।
आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी गठबंधन को अपने कमजोर जनाधार का भय सता रहा है। राज्य सरकार की विफलता बड़े पैमाने पर उजागर हो रही है और विधि-व्यवस्था की स्थिति भी खराब है। ऐसे में सरकार दलीय आधार पर चुनाव कराकर संभावित हार स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है, इसी कारण बैलेट पेपर से चुनाव को प्रभावित करने की साजिश की जा रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार पुलिस प्रशासन का दुरुपयोग कर रही है और अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है। ऐसे हालात में निकाय चुनावों में भी पुलिस प्रशासन के माध्यम से अपने चहेतों को जिताने की कोशिश की जा सकती है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य निर्वाचन आयुक्त से आग्रह किया कि चुनाव प्रक्रिया को भय और भ्रष्टाचार से मुक्त रखा जाए। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश स्तर पर चुनाव में संभावित गड़बड़ी पर कड़ी नजर रखेगी। साथ ही चेतावनी दी कि यदि पुलिस प्रशासन सरकार का टूलकिट बनने की कोशिश करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।